दिल्ली के जंतर-मंतर से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद उनकी सेहत को लेकर सफदरजंग अस्पताल की ओर से आधिकारिक जानकारी साझा की गई है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, वांगचुक को शनिवार सुबह 7:40 बजे इलाज के लिए भर्ती कराया गया। लंबे समय से जारी भूख हड़ताल और शरीर में पानी की गंभीर कमी यानी डिहाइड्रेशन के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो गई थी।
अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि फिलहाल सोनम वांगचुक की हालत स्थिर बनी हुई है। हालांकि डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है और शरीर के जरूरी पैरामीटर सामान्य करने के साथ-साथ स्वास्थ्य में सुधार के लिए आवश्यक उपचार दिया जा रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञ उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की जटिलता से बचा जा सके।
प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार के रवैये पर उठाए सवालशिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में अनशन समाप्त कराना चाहती थी, तो किसी मंत्री को बातचीत के लिए भेजा जाना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय दिल्ली पुलिस को भेजा गया। उनके मुताबिक लोग इस घटनाक्रम को आसानी से नहीं भूलेंगे।
प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक की जरूरत देश को आगे भी रहेगी, इसलिए उनका स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है ताकि वे अपनी लड़ाई जारी रख सकें। साथ ही उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि चाहे इसके लिए उन्हें आलोचना का सामना करना पड़े, लेकिन उनकी राय में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए सोनम वांगचुक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
अरविंद केजरीवाल बोले- बातचीत होती तो बेहतर होतादिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले पर सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि सरकार का यह रवैया अहंकार को दर्शाता है। उनके अनुसार, सोनम वांगचुक को जबरन हटाने के बजाय केंद्र सरकार को उनके साथ बातचीत करनी चाहिए थी।
केजरीवाल ने अपने संदेश में कहा कि आंदोलन को दबाने की जगह सरकार को देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि सोनम वांगचुक के साथ की गई जबरदस्ती सरकार की राजनीतिक विफलता को दिखाती है और संवाद की बजाय बल प्रयोग का रास्ता चुनना उचित नहीं था।
सचिन पायलट ने भी जताई नाराजगीकांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने को सरकार की गलत रणनीति बताया। उन्होंने कहा कि वांगचुक पिछले करीब 20 दिनों से युवाओं के भविष्य और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर अनशन पर बैठे थे, लेकिन सरकार ने इस दौरान न तो उनसे कोई बातचीत की और न ही उनकी मांगों पर गंभीरता दिखाई।
सचिन पायलट ने कहा कि अब जब आंदोलन का प्रभाव देशभर में बढ़ने लगा और जनता का समर्थन भी लगातार बढ़ा, तब सरकार ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने का फैसला लिया। उनके मुताबिक यदि सरकार पहले ही संवाद का रास्ता अपनाती, तो स्थिति अलग हो सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक को अस्पताल ले जाना इस बात का संकेत है कि सरकार बढ़ते जनदबाव का सामना कर रही है। पायलट का मानना है कि केवल अस्पताल में भर्ती कराने से विवाद खत्म नहीं होगा, बल्कि इससे लोगों के बीच नाराजगी और अधिक बढ़ सकती है।