दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक विवाद को लेकर चल रहे आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात आखिरकार अपना 26 दिनों से जारी आमरण अनशन समाप्त कर दिया। हालांकि इस फैसले तक पहुंचना आसान नहीं था। लगातार तीन दिनों तक चली पर्दे के पीछे की बातचीत, केंद्र सरकार के बदले रुख, विपक्षी नेताओं की पहल और पत्नी गीतांजलि अंगमो के दृढ़ आग्रह के बाद वांगचुक ने अपना उपवास समाप्त करने पर सहमति जताई। सूत्रों के मुताबिक, 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस की घटना के बाद सरकार ने उनसे संवाद स्थापित करने की प्रक्रिया तेज कर दी थी।
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) से जुड़े मामले में पहले भी वांगचुक की कानूनी पैरवी कर चुके तन्खा ने सरकार और वांगचुक के बीच संवाद का रास्ता तैयार करने में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
विवेक तन्खा ने बताई पूरी कहानीइंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान विवेक तन्खा ने कहा कि छात्रों का आंदोलन अपने उद्देश्य के साथ जारी रह सकता है, लेकिन सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत चिंता का विषय बन चुकी थी। उन्होंने बताया कि 26 दिनों के उपवास के दौरान वांगचुक का वजन 11 किलो से अधिक कम हो गया था। तन्खा के मुताबिक, देश को उनकी आवश्यकता है और युवाओं के लिए उनका मार्गदर्शन कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। इसी सोच के साथ उन्होंने वांगचुक और उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो को अनशन समाप्त करने के लिए तैयार करने का प्रयास किया।
लाठीचार्ज के बाद बदला घटनाक्रम20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद सोनम वांगचुक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा को एक खुला पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ पुलिस या कानूनी कार्रवाई न की जाए। माना जा रहा है कि यह मांग शुरुआती दौर में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से आगे बढ़कर समाधान की दिशा में एक व्यावहारिक पहल थी और यहीं से बातचीत का रास्ता खुला।
विपक्षी नेताओं ने भी निभाई अहम भूमिका22 जुलाई को विवेक तन्खा की अगुवाई में विभिन्न दलों के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल मेदांता अस्पताल पहुंचा, जहां उन्होंने सोनम वांगचुक से मुलाकात कर अनशन समाप्त करने की अपील की। इस प्रतिनिधिमंडल में शशि थरूर, तिरुचि शिवा, रामगोपाल यादव, कपिल सिब्बल, जॉन ब्रिटास और सागरिका घोष समेत कई वरिष्ठ सांसद शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल ने वांगचुक को एक संयुक्त पत्र भी सौंपा, जिसमें कहा गया कि देश और विशेष रूप से युवाओं को उनके जीवन, अनुभव और मार्गदर्शन की आवश्यकता है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि जिस तरह लद्दाख को सोनम वांगचुक की जरूरत है, उसी तरह पूरा भारत भी उनके योगदान का इंतजार कर रहा है।
पत्नी गीतांजलि अंगमो की सख्ती बनी निर्णायकसूत्रों के अनुसार, सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिलने के बावजूद सोनम वांगचुक इस दुविधा में थे कि छात्रों की पूरी सहमति के बिना अनशन खत्म किया जाए या नहीं। इसी दौरान उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया।
एक केंद्रीय मंत्री के हवाले से बताया गया कि गीतांजलि ने साफ कहा कि यदि सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर सहमत हो रही है, तो अब पीछे हटने का कोई कारण नहीं है। उन्होंने वांगचुक से अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। अंततः पत्नी की समझाइश और लगातार आग्रह के बाद वांगचुक ने अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
लद्दाख से आए प्रतिनिधियों ने भी किया आग्रहइस बीच 21 जुलाई को लेह से दिल्ली पहुंचे लद्दाख के कई प्रमुख नेताओं ने भी 23 जुलाई की सुबह वांगचुक से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उनसे कहा कि छात्र आंदोलन अब अपनी अलग दिशा में आगे बढ़ चुका है और उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाई है।
प्रतिनिधिमंडल के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि आने वाले समय में लद्दाख के राज्य के दर्जे और क्षेत्रीय अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र सरकार से बातचीत के लिए सोनम वांगचुक की सक्रिय भूमिका बेहद आवश्यक है। इसलिए उनका स्वस्थ रहना पूरे क्षेत्र के हित में है।
सरकार ने दिया लिखित भरोसा23 जुलाई की देर रात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह मेदांता अस्पताल पहुंचे और सोनम वांगचुक को सरकार की ओर से लिखित आश्वासन सौंपा। पत्र में कहा गया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों और 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा।
इसके साथ ही सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त नया कानून संसद में लाने, NEET पेपर लीक प्रकरण से जुड़े आत्महत्या पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने तथा संसद में इस पूरे मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने का भी भरोसा दिया। इन्हीं आश्वासनों के बाद लंबे समय से जारी गतिरोध खत्म हुआ और सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया।