नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को GenZ आंदोलन और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे छात्रों के साथ अन्याय हुआ है। उनके अनुसार प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने किसी तरह की हिंसा नहीं की, इसके बावजूद उन पर लाठीचार्ज किया गया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल महिला छात्रों के घर तक दबाव बनाने के लिए गुंडे भेजे गए। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले युवाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने साहस और जिम्मेदारी का परिचय दिया है।
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन कुछ GenZ प्रदर्शनकारियों को भी अपने साथ बैठाया, जिन्होंने जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखना आसान नहीं होता, लेकिन इन युवाओं ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने अनुभव साझा किए और यह उनकी बहादुरी को दर्शाता है।
'इन युवाओं पर मुझे गर्व है'राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने कई छात्र प्रदर्शनकारियों से विस्तार से बातचीत की है। बातचीत के दौरान छात्रों ने उन्हें बताया कि प्रदर्शन के बाद उनके साथ मारपीट की गई, उन्हें धमकियां दी गईं और मानसिक दबाव बनाया गया। राहुल गांधी ने कहा, मुझे इन युवाओं पर गर्व है। उन्होंने जिस हिम्मत के साथ अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई, वह सराहनीय है। सिर्फ ये ही नहीं, बल्कि ऐसे हजारों युवा भारतीय, जिन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी, वे भी सम्मान के पात्र हैं।
'शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाना अपराध नहीं'नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि छात्रों ने संविधान की भावना और देश के भविष्य की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाई है। उनका कहना था कि यदि शिक्षा व्यवस्था में कमियां हैं, परीक्षाएं प्रभावित हो रही हैं या व्यवस्था कमजोर पड़ रही है, तो उस पर सवाल उठाना किसी भी तरह से अपराध नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि छात्र केवल बेहतर और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे थे, जिसे लोकतांत्रिक अधिकार के रूप में देखा जाना चाहिए।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्र न तो हिंसक थे और न ही उन्होंने किसी प्रकार की आक्रामकता दिखाई। इसके बावजूद उनके साथ बल प्रयोग किया गया, उन्हें पीटा गया और डराने-धमकाने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल लोगों पर दबाव बनाने के लिए उनके घरों तक लोगों को भेजा गया और एक 15 वर्षीय छात्रा से कथित तौर पर जबरन माफी मंगवाई गई। राहुल गांधी ने इसे पूरी तरह अनुचित और अस्वीकार्य बताया।
'देश के भविष्य का सम्मान होना चाहिए'
राहुल गांधी ने कहा कि देश को ऐसी शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है जो ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम करे। उन्होंने मांग की कि प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जाए और देश के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।
हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जब मीडिया ने घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों द्वारा की गई प्रेस वार्ता से जुड़े सवाल पूछे, तो राहुल गांधी ने उस विषय पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया और उस प्रश्न से बचते हुए आगे बढ़ गए।