त्रिनिदाद में गूंजा भोजपुरी चौताल, भावविभोर हुए पीएम मोदी, मनोज तिवारी बोले– ये बिहार की आत्मा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की यात्रा के क्रम में त्रिनिदाद एंड टोबैगो पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय भारतीय मूल के लोगों द्वारा प्रस्तुत भोजपुरी चौताल को न केवल देखा, बल्कि उसे गहरे भाव से सराहा भी। यह प्रस्तुति पोर्ट ऑफ स्पेन में आयोजित एक सांस्कृतिक समारोह में दी गई, जिसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार से जुड़े प्रवासी भारतीयों की संस्कृति और लोकसंस्कृति की छवि स्पष्ट रूप से झलक रही थी।

सोशल मीडिया पर साझा किया वीडियो, भोजपुरी में लिखा संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अनुभव को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने उसमें लिखा – एगो अनमोल सांस्कृतिक जुड़ाव! बहुत खुशी भइल कि पोर्ट ऑफ स्पेन में हम भोजपुरी चौताल प्रस्तुति के प्रदर्शन देखनी। त्रिनिदाद एंड टोबैगो आ भारत, खास करके पूर्वी यूपी आ बिहार के बीच के जुड़ाव उल्लेखनीय बा।

पीएम मोदी के इस भावनात्मक पोस्ट पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और भोजपुरी गायक व सांसद मनोज तिवारी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पीएम के पोस्ट को री-शेयर करते हुए लिखा – बिहार की समृद्ध संस्कृति से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जुड़ाव देश में ही नहीं, विदेशों में भी दिखता है। पोर्ट ऑफ स्पेन में जब भोजपुरी चौताल की प्रस्तुति हुई, तो पीएम मोदी भावविभोर हो उठे। यह सिर्फ एक कला नहीं, हमारी आत्मा की अभिव्यक्ति है।

बिहार की विरासत को बताया दुनिया का गौरव

प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले त्रिनिदाद में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए बिहार की ऐतिहासिक भूमिका और योगदान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा – लोकतंत्र हो, राजनीति हो, कूटनीति हो, उच्च शिक्षा हो, बिहार ने सदियों पहले दुनिया को ऐसे अनेक विषयों में नई दिशा दिखाई थी। मुझे विश्वास है कि 21वीं सदी की दुनिया के लिए भी बिहार की धरती से नई प्रेरणाएं और नए अवसर निकलेंगे।

कमला प्रसाद-बिसेसर को बताया 'बिहार की बेटी'

प्रधानमंत्री ने त्रिनिदाद एंड टोबैगो की पूर्व प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर का उल्लेख करते हुए उन्हें 'बिहार की बेटी' कहा। उन्होंने बताया कि कमला बिसेसर के पूर्वज बिहार के बक्सर जिले से थे और उन्होंने वहां जाकर अपनी जड़ों से जुड़ाव महसूस किया है। उन्होंने कहा, कमला खुद वहां जाकर भी आई हैं और लोग उन्हें बिहार की बेटी मानते हैं।

त्रिनिदाद में भोजपुरी की विरासत

त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय मूल के लोगों की एक बड़ी आबादी है, जिनमें से अधिकांश के पूर्वज 19वीं शताब्दी में गिरमिटिया मजदूर के रूप में भारत से यहां पहुंचे थे। खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार से आए इन लोगों ने अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संजोया है। भोजपुरी भाषा और लोकगीतों का वहां आज भी व्यापक प्रभाव है और चौताल, फगुआ, बिरहा जैसे पारंपरिक गायन शैलियों को वहां के सांस्कृतिक आयोजनों में विशेष स्थान प्राप्त है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की त्रिनिदाद यात्रा केवल राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी ऐतिहासिक बन गई। भोजपुरी चौताल के प्रति उनका प्रेम और स्थानीय भारतीय समुदाय के साथ उनकी आत्मीयता यह दर्शाती है कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर विश्व के किसी भी कोने में बसे भारतीयों के दिलों में जिंदा है। उनकी इस पहल से बिहार और पूर्वी भारत की लोकसंस्कृति को वैश्विक मंच पर एक नया सम्मान मिला है।