छात्र प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में बुधवार को विपक्षी दलों के कई सांसदों ने संसद परिसर में काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसद इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह छात्रों से जुड़े मुद्दों, परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा क्षेत्र की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है।
प्रदर्शन में शामिल सांसदों ने संसद के मकर द्वार के सामने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों को उठाया। विपक्ष का कहना है कि देश में बढ़ती बेरोजगारी, पेपर लीक जैसी घटनाओं और छात्रों की परेशानियों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
मकर द्वार पर काले कपड़ों में विपक्ष का प्रदर्शनकांग्रेस सांसद के सुरेश ने बताया कि काले कपड़े पहनकर विरोध जताने का फैसला मंगलवार को हुए प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी समेत अन्य विपक्षी सांसदों के साथ हुई कथित पुलिस सख्ती के विरोध में लिया गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस कार्रवाई को लेकर अपना विरोध दर्ज करा रहा है।
के सुरेश ने कहा,
आज हम सभी काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे हैं और मकर द्वार के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध कल विपक्ष के नेता और अन्य सांसदों के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित कठोर कार्रवाई के खिलाफ है।
वहीं आरजेडी सांसद संजय यादव ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि देश में लगातार पेपर लीक के मामले सामने आ रहे हैं और बेरोजगारी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पारदर्शिता की मांग करने वाले युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
संजय यादव ने कहा कि सरकार की नीतियों की वजह से बड़ी संख्या में छात्र और युवा रोजगार के संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि युवाओं का भविष्य अनिश्चित हो गया है और सरकार को उनकी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
हिरासत में लिए गए थे राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताइससे पहले मंगलवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन दिल्ली में राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में आयोजित किया गया था।
कांग्रेस ने सोमवार को सेंट्रल दिल्ली में छात्र संगठन सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई की भी आलोचना की थी। पार्टी का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और नेताओं के साथ सख्ती बरती गई।
इसके बाद तिरुवनंतपुरम, गुवाहाटी, जबलपुर और भुवनेश्वर सहित कई शहरों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जा रही आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है।
'वे डरे हुए हैं, हम उनसे नहीं डरते'मंगलवार को कांग्रेस नेताओं ने राजाजी मार्ग से लोक कल्याण मार्ग तक मार्च निकाला था। इस दौरान विपक्ष की ओर से मांग की गई कि कथित परीक्षा पेपर लीक मामलों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके अलावा छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई।
मार्च के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। हालांकि कुछ समय बाद सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया।
रिहाई के बाद राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता छतरसाल स्टेडियम से रवाना हुए, जहां उन्हें हिरासत में रखा गया था। पुलिस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंका गांधी ने कहा,
वे डरपोक हैं। वे डरे हुए हैं। हम उनसे नहीं डरते। वे हमसे डरते हैं।
प्रियंका गांधी की हिरासत की जानकारी मिलने पर पुलिस स्टेशन पहुंचीं सोनिया गांधी
प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों को राहुल गांधी को पुलिस बस तक ले जाते हुए देखा गया। वहीं सुरक्षा बलों ने लोक कल्याण मार्ग के आसपास मौजूद प्रदर्शनकारियों को हटाया।
प्रियंका गांधी वाड्रा को हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिलने के बाद कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचीं। उन्होंने वहां पहुंचकर स्थिति की जानकारी ली।
लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित इस प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल और पवन खेड़ा समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इसके अलावा केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार भी प्रदर्शन में पहुंचे।
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद सोमवार को छात्र संगठन सीजेपी के 'संसद चलो' प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ था। इस प्रदर्शन के दौरान मध्य दिल्ली में पुलिस कार्रवाई हुई थी, जिसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और इसे छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया।