दिल्ली में नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर जारी आंदोलन के बीच स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा की एक टिप्पणी अब कानूनी विवाद में बदल गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान दिए गए उनके भाषण पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने उन्हें कानूनी नोटिस भेजा है। विवाद का केंद्र उनका सीता के पति, नीता के पति वाला बयान बना हुआ है।
गौरतलब है कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था और कथित पेपर लीक के मुद्दे को लेकर पिछले 20 दिनों से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे थे। अनशन के 21वें दिन उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद प्रशासन ने उन्हें धरना स्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया। इसी आंदोलन के दौरान कुणाल कामरा भी समर्थन देने पहुंचे थे और मंच से सरकार पर तीखी टिप्पणी की थी।
बयान के बाद भेजा गया कानूनी नोटिसकुणाल कामरा के भाषण के वायरल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के एक अधिवक्ता ने उनके खिलाफ लीगल नोटिस जारी किया। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि उनके बयान से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और उन्होंने भगवान के नाम का अनुचित संदर्भ देकर आस्था का अपमान किया है।
नोटिस में कहा गया है कि ईश्वर करोड़ों लोगों की आस्था का विषय हैं और उनके नाम का इस प्रकार इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। साथ ही कामरा से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से संबंधित वीडियो तुरंत हटाने की मांग भी की गई है। इस विवाद के बाद सोशल मीडिया पर भी उनके बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
क्या है पूरा विवाद?नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर छात्रों तथा विपक्षी दलों का विरोध लगातार जारी है। इसी मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया था। 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक के समर्थन में कई सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां भी वहां पहुंचीं, जिनमें कुणाल कामरा भी शामिल थे।
मंच से संबोधित करते हुए कामरा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि सोनम वांगचुक के रूप में देश को एक और गांधी मिले हैं, जो अनशन पर बैठे हैं, लेकिन गोडसेवादी सोच रखने वालों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। उन्हें देश की चिंता नहीं है।
इसी भाषण के दौरान उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि ये सीता के पति का नाम लेते हैं और नीता के पति का काम करते हैं। इसी बयान को आधार बनाते हुए वकील ने इसे हिंदू धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की पहल की।
छात्रों से क्या बोले कुणाल कामरा?अपने संबोधन में कुणाल कामरा ने छात्रों और युवाओं से संयम बनाए रखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि यदि किसी भाजपा समर्थक या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक से मुलाकात हो, तो उससे बहस या विवाद करने के बजाय शांति और धैर्य से बातचीत करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, हमें व्यक्ति से नहीं, उस सोच से लड़ना है। अगर कोई यह मानता है कि सरकार का हर फैसला सही है, तो उससे लंबी बहस में पड़ने के बजाय आगे बढ़ जाना बेहतर है। अपना समय और ऊर्जा सही दिशा में लगाइए।
कामरा ने अपने भाषण में यह भी कहा कि आंदोलन में शामिल लोगों में छात्र, किसान और बेरोजगार युवा शामिल हैं, जो अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनके फैसलों ने इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में एक अहम भूमिका निभाई है। वहीं, उनके इस पूरे भाषण और विशेष रूप से विवादित टिप्पणी को लेकर अब राजनीतिक बहस के साथ-साथ कानूनी विवाद भी तेज हो गया है।