गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइक सवार के साथ हुए हिट-एंड-रन मामले को लेकर पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने सड़क पर कानून लागू करने के तरीके में बदलाव की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं में केवल घटना का वीडियो सामने आने का इंतजार नहीं होना चाहिए, बल्कि कैमरे से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को तुरंत कार्रवाई करने की व्यवस्था होनी चाहिए। बेदी ने अमेरिकी पुलिस का उदाहरण देते हुए सड़क पर मोबाइल इंटरसेप्टर तैनात करने और संदिग्ध वाहन को तत्काल रोकने की बात कही।
यह टिप्पणी उस मामले के बाद सामने आई है जिसमें गुरुग्राम की गोल्फ कोर्स रोड पर एक कार ने महिला बाइक सवार शिवानी चौहान उर्फ सिया की बाइक को टक्कर मारी थी। घटना का वीडियो बाइक पर लगे कैमरे में रिकॉर्ड हुआ और बाद में सामने आया। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी कल्याण बैंसला को राजस्थान से गिरफ्तार किया। उसके साथ कार में मौजूद उसके चचेरे भाई लवनीश को भी पकड़ा गया। दोनों को 16 सितंबर को गुरुग्राम की अदालत ने दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा। पुलिस ने यह रिमांड घटना स्थल को दोबारा रीक्रिएट करने के लिए मांगी थी और अगली सुनवाई 18 सितंबर को तय की गई है।
कैमरा रिकॉर्डिंग को बताया अहमकिरण बेदी ने मामले पर बात करते हुए कहा कि अगर महिला की बाइक पर कैमरा नहीं लगा होता तो घटना की पूरी तस्वीर सामने आने में मुश्किल हो सकती थी। उन्होंने सड़क पर लगे कैमरों और वाहनों में मौजूद कैमरों से मिलने वाले सबूतों को तत्काल पुलिस कार्रवाई से जोड़ने की जरूरत बताई।
बेदी के मुताबिक, कैमरे से किसी वाहन की गतिविधि रिकॉर्ड होने के बाद उसकी पहचान की जा सकती है और संबंधित सूचना सड़क पर मौजूद पुलिस इंटरसेप्टर तक पहुंचाई जा सकती है। उनका सुझाव है कि ऐसे इंटरसेप्टर वाहन सड़क पर इस तरह तैनात हों कि जरूरत पड़ने पर वे संदिग्ध वाहन को रोक सकें।
उन्होंने अमेरिकी पुलिस की व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां संदिग्ध वाहन को अचानक इंटरसेप्ट कर कार्रवाई की जा सकती है। उनके मुताबिक, भारत में भी सड़क पर ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जिसमें कैमरे और जमीन पर मौजूद पुलिस इकाइयों के बीच सीधा तालमेल हो।
वाहन और लाइसेंस पर भी कार्रवाई की बातबेदी ने सड़क पर नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई को केवल व्यक्ति तक सीमित रखने के बजाय वाहन और ड्राइविंग लाइसेंस से जोड़ने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के साथ वाहन को भी रोकना और लाइसेंस पर कार्रवाई करना जरूरी है, ताकि कानून के उल्लंघन के बाद कार्रवाई की संभावना स्पष्ट रहे।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बार-बार सड़क पर आक्रामक तरीके से वाहन चलाने वाले लोगों को वाहन वापस मिलने की स्थिति में उसमें कैमरा लगाने जैसी शर्त पर विचार किया जा सकता है। उनका कहना था कि यदि वाहन में लगातार रिकॉर्डिंग की व्यवस्था हो तो भविष्य की घटनाओं में जांच के लिए प्रत्यक्ष डिजिटल सबूत उपलब्ध हो सकते हैं।
बेदी ने वाहनों और सड़क पर लगे कैमरों के बीच तकनीकी तालमेल की भी बात की। उनके अनुसार, ऊपर लगे कैमरे से वाहन की पहचान और नंबर प्लेट का रिकॉर्ड मिलने के बाद जमीन पर मौजूद इंटरसेप्टर वाहन को इसकी सूचना मिल सकती है। इसके बाद पुलिस संदिग्ध वाहन को रोकने की कार्रवाई कर सकती है।
गुरुग्राम मामले में क्या हुआ?गुरुग्राम पुलिस के अनुसार, गोल्फ कोर्स रोड की घटना के बाद शुरुआती तौर पर मामला रैश ड्राइविंग सहित धाराओं में दर्ज किया गया था। बाद में वीडियो फुटेज और पीड़िता के बयान की जांच के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 के तहत हत्या के प्रयास का आरोप जोड़ा गया। पुलिस ने धारा 78 और 79 के तहत भी कार्रवाई की है।
पुलिस ने कल्याण बैंसला और उसके साथ मौजूद लवनीश को राजस्थान के राजगढ़ से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने अदालत से दोनों की दो दिन की हिरासत मांगी थी, ताकि घटना स्थल पर जाकर पूरे घटनाक्रम को रीक्रिएट किया जा सके। अदालत ने पुलिस की मांग स्वीकार कर ली। मामले में अगली सुनवाई 18 सितंबर को होनी है।
गुरुग्राम पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी का भी गठन किया है। यह टीम घटना की परिस्थितियों और उपलब्ध सबूतों की जांच कर रही है।
आरोपी ने क्या कहा?मामले में आरोपी पक्ष की ओर से अदालत में बचाव पक्ष के वकील ने पुलिस रिमांड की जरूरत पर सवाल उठाया था। वकील का कहना था कि आरोपी पहले ही पुलिस हिरासत में करीब 24 घंटे रह चुका है और इतने समय में घटना स्थल को रीक्रिएट किया जा सकता था। अदालत ने इसके बावजूद दो दिन की पुलिस हिरासत मंजूर की।
इस बीच, मामले में आरोपी कल्याण बैंसला ने पहले दावा किया था कि घटना केवल रैश ड्राइविंग का मामला है और हत्या के प्रयास से जुड़े आरोप निराधार हैं। पुलिस ने वीडियो फुटेज और पीड़िता के बयान के आधार पर मामले में गंभीर धाराएं जोड़ी हैं।
किरण बेदी ने अपने बयान में सड़क पर कानून के प्रभावी प्रवर्तन, डिजिटल निगरानी और तत्काल पुलिस कार्रवाई के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर दिया है। फिलहाल मामले में दोनों आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं और पुलिस घटना स्थल को रीक्रिएट कर जांच आगे बढ़ा रही है। अगली सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित है।