नई दिल्ली: NEET पेपर लीक विवाद को लेकर जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन अभी भी थमा नहीं है। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुए लाठीचार्ज के बाद भी प्रदर्शनकारी लगातार धरने पर डटे हुए हैं। इसी बीच सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजधानी के 18 मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया है। दूसरी ओर, आंदोलन को लेकर शनिवार (25 जुलाई) को केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच एक और महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जिससे गतिरोध खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि छात्र संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी प्रमुख मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। CJP का कहना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और इसी मुद्दे पर आगे की रणनीति तय होगी।
18 मेट्रो स्टेशन अगले आदेश तक बंददिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने शुक्रवार को घोषणा की कि परिचालन संबंधी कारणों और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर शनिवार सुबह 7:30 बजे से अगले आदेश तक राजधानी के 18 मेट्रो स्टेशनों को बंद रखा जाएगा। यह फैसला जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में लगातार चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच लिया गया है।
DMRC ने बताया कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूरे मेट्रो नेटवर्क की कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट स्टेशनों पर इंटरचेंज सुविधा उपलब्ध रहेगी, ताकि अन्य रूटों पर यात्रा प्रभावित न हो।
इन स्टेशनों पर नहीं रुकेगी मेट्रोबंद किए गए स्टेशनों में लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग, शिवाजी स्टेडियम, झंडेवालान और नई दिल्ली शामिल हैं।
इसके अलावा एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर भी सेवाओं में बदलाव किया गया है। फिलहाल इस रूट पर मेट्रो केवल धौला कुआं और यशोभूमि द्वारका सेक्टर-25 के बीच ही संचालित की जा रही है।
राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजामजंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में लगातार बड़ी संख्या में छात्रों के जुटने को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। प्रदर्शन स्थल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और कई स्थानों पर बैरिकेडिंग भी की गई है, ताकि किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर लगातार डटे हुए हैं।
सरकार और CJP के बीच आज फिर होगी बातचीतNEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के समाधान की कोशिशों के तहत शनिवार को सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच तीसरे दौर की बातचीत होने जा रही है।
इससे पहले शुक्रवार को CJP के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ विट्ठलभाई पटेल भवन में करीब दो घंटे तक बैठक की थी। दोनों पक्षों के बीच इस सप्ताह यह तीसरी वार्ता रही, जिसमें विभिन्न मांगों पर चर्चा हुई।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ी CJPबैठक के बाद CJP ने दोहराया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। संगठन का कहना है कि यदि सरकार इस मुद्दे पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती है तो आंदोलन को देशभर में और तेज किया जाएगा।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना कोई अन्य प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि जरूरत पड़ने पर संसद मार्च के दूसरे चरण सहित व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत की जा सकती है।
CJP प्रवक्ता ने क्या कहा?सरकार के साथ हुई बैठक के बाद CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि मुआवजे और कानूनी मामलों को लेकर सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं। उन्होंने बताया कि कुछ मुद्दों पर सैद्धांतिक सहमति बनी है और उम्मीद है कि अगली बैठक में इसका लिखित स्वरूप भी सामने आ सकता है।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सबसे अहम मुद्दा धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का है, जिस पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। रांका ने कहा कि यदि सरकार इस मांग पर स्पष्ट जवाब नहीं देती, तो आगे ऐसी बैठकों का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा और संगठन अपने अगले आंदोलन की घोषणा करेगा।
उन्होंने NTA के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किए जाने के फैसले पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस कार्रवाई की पूरी जानकारी सामने आने के बाद ही उस पर विस्तृत टिप्पणी की जाएगी। साथ ही उन्होंने दोहराया कि परीक्षा प्रणाली में हुई चूक और NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों की नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री पर है। उनके अनुसार, जवाबदेही तय किए बिना केवल प्रशासनिक कदम पर्याप्त नहीं होंगे और व्यापक शिक्षा सुधारों पर भी गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।