नई दिल्ली: संसद में दिए गए राहुल गांधी के हालिया भाषण को लेकर सियासी माहौल गर्म है, लेकिन केंद्र सरकार ने फिलहाल उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव (प्रिविलेज मोशन) लाने का इरादा छोड़ दिया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार इस मुद्दे को प्रिविलेज कमेटी तक ले जाने के बजाय उनके भाषण के विवादित हिस्सों को सदन की कार्यवाही से हटाने (एक्सपंज) का रास्ता अपनाएगी। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी द्वारा लगाए गए कुछ आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए, इसी आधार पर संबंधित टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने की तैयारी है।
इसी बीच भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर राहुल गांधी के भाषण में प्रयुक्त आपत्तिजनक शब्दों को हटाने की औपचारिक मांग की है। उनका कहना है कि कुछ वक्तव्य संसदीय मर्यादा और परंपराओं के अनुरूप नहीं थे, इसलिए उन्हें रिकॉर्ड में नहीं रखा जाना चाहिए।
निशिकांत दुबे का सख्त रुखहालांकि सरकार ने प्रिविलेज मोशन से दूरी बना ली है, लेकिन भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ अलग से मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने लोकसभा में एक प्रस्ताव पेश करते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी कथित तौर पर बाहरी प्रभावों—जैसे सोरोस—का हवाला देकर देश को गुमराह कर रहे हैं। दुबे ने मांग की कि इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो और यदि आरोप गंभीर पाए जाएं तो राहुल गांधी की संसद सदस्यता समाप्त करने के साथ-साथ उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से भी रोका जाए।
गुरुवार को दुबे ने स्पष्ट किया कि औपचारिक रूप से प्रिविलेज मोशन लाने का प्रस्ताव नहीं है, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि राहुल गांधी को संसद से निलंबित करने के उद्देश्य से एक आवश्यक मोशन उन्होंने सदन में रखा है। इससे सियासी बहस और तेज हो गई है।
प्रधानमंत्री से मिले किरन रिजिजूविवाद के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संसद में उत्पन्न गतिरोध और राहुल गांधी के भाषण से जुड़े विवाद पर उन्होंने प्रधानमंत्री को स्थिति से अवगत कराया। इस मुलाकात के बाद अटकलें और भी बढ़ गई हैं कि आगे सरकार की रणनीति क्या होगी।
जगदंबिका पाल की प्रतिक्रियाराहुल गांधी के संबोधन के दौरान सदन की कार्यवाही का संचालन कर रहे भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति को अपने शब्दों की मर्यादा और भाषा की सीमाओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पाल ने सवाल उठाया कि क्या संसदीय लोकतंत्र में इस प्रकार की अभिव्यक्ति उचित मानी जा सकती है।
व्यापार समझौते पर विपक्ष का विरोध
उधर, अमेरिका के साथ हुए हालिया व्यापार समझौते को लेकर भी लोकसभा में विपक्ष ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बृहस्पतिवार को जैसे ही सदन की बैठक शुरू हुई, विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए आसन के समीप पहुंच गए।
पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने प्रश्नकाल शुरू कराया, लेकिन शोर-शराबे के कारण कार्यवाही सुचारु रूप से आगे नहीं बढ़ सकी। नारेबाजी के बीच कांग्रेस सदस्य प्रभा मल्लिकार्जुन ने पूरक प्रश्न उठाया, जिसका जवाब ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद नाईक ने दिया।
हालांकि, स्थिति नियंत्रित न होने पर सभापति ने विपक्ष से शांत रहने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहने के कारण सदन की कार्यवाही शुरू होने के महज सात मिनट बाद ही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि संसद का मौजूदा सत्र राजनीतिक टकराव और आरोप-प्रत्यारोप से भरा हुआ है। अब देखना होगा कि राहुल गांधी के भाषण को लेकर उठे विवाद का पटाक्षेप किस तरह होता है और सदन में सामान्य कार्यवाही कब तक बहाल हो पाती है।