नई दिल्ली। देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को सरकारी बंगला खाली करने को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने एक दुर्लभ कदम उठाते हुए केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि उन्हें राजधानी के कृष्ण मेनन मार्ग स्थित CJI के आधिकारिक आवास से हटाया जाए। चंद्रचूड़ नवंबर 2024 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन आठ महीने बाद भी वे उसी सरकारी आवास में रह रहे हैं, जो नियमों के अनुरूप नहीं है।
आवास पर अनावश्यक देरी, SC प्रशासन ने जताई चिंतासुप्रीम कोर्ट प्रशासन द्वारा 1 जुलाई 2025 को आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि बंगला संख्या 5, कृष्ण मेनन मार्ग, जो कि मौजूदा मुख्य न्यायाधीश का आधिकारिक आवास है, उसे तत्काल खाली कराया जाए। पत्र में यह भी कहा गया कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश को जिस विशेष परिस्थिति में यह आवास रखने की अनुमति दी गई थी, वह अवधि अब समाप्त हो चुकी है और आगे का कोई विस्तार नहीं दिया गया है।
नियमों की अनदेखी, तय सीमा से अधिक अवधि तक बने रहे CJI बंगले मेंसुप्रीम कोर्ट जज रूल्स, 2022 के तहत, किसी भी सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश को अधिकतम छह महीने तक टाइप VII बंगला रखने की अनुमति होती है। जस्टिस चंद्रचूड़ को इस आधार पर 10 मई 2025 तक ही वहां रहने की छूट थी। इसके बाद 31 मई तक व्यक्तिगत निवेदन पर उन्हें मौखिक अनुमति दी गई, लेकिन अब वह भी समाप्त हो चुकी है।
आवास की अस्थायी मंजूरी भी हो चुकी है खत्मसीजेआई संजीव खन्ना की स्वीकृति के बाद केंद्र ने पूर्व सीजेआई को बंगले में 11 दिसंबर 2024 से 30 अप्रैल 2025 तक रहने की अनुमति दी थी, जिसकी शर्त यह थी कि 5,000 रुपये प्रति माह लाइसेंस शुल्क का भुगतान करना होगा। हालांकि, इसके आगे कोई लिखित विस्तार नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आगे कोई रियायत संभव नहीं है क्योंकि अन्य न्यायाधीशों को अस्थायी आवास की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
निजी कारणों का हवाला, चंद्रचूड़ की तरफ से सफाईएक सूत्र के अनुसार, जस्टिस चंद्रचूड़ ने अदालत प्रशासन को सूचित किया है कि बंगला खाली करने में हो रही देरी का कारण परिवार की जरूरतें हैं। बताया गया है कि उनके परिवार को तुगलक रोड स्थित बंगले में शिफ्ट होना है, लेकिन वह अभी पूरी तरह रहने योग्य नहीं है, खासकर उनकी बेटियों के लिए, जिनका AIIMS में इलाज चल रहा है।
पूर्व CJI खन्ना और गवई ने लिया अलग रुखगौर करने वाली बात यह भी है कि जस्टिस चंद्रचूड़ के बाद कार्यभार संभालने वाले जस्टिस संजीव खन्ना ने अपने छह महीने के कार्यकाल में यह बंगला लेने से इनकार कर दिया था। वहीं मौजूदा CJI बी.आर. गवई भी पूर्व से आवंटित बंगले में ही रहना पसंद कर रहे हैं। ऐसे में चंद्रचूड़ द्वारा तय समय सीमा के बावजूद सरकारी आवास खाली न करना अब एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है।
प्रशासन की सख्ती और न्यायपालिका में अनुशासन की मिसालसुप्रीम कोर्ट प्रशासन का यह पत्र एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है कि न्यायपालिका न सिर्फ दूसरों से जवाबदेही की मांग करती है, बल्कि स्वयं भी संस्थागत अनुशासन को महत्व देती है। यह घटना दुर्लभ है जब शीर्ष अदालत खुद केंद्र से अपने एक भूतपूर्व प्रधान न्यायाधीश के सरकारी निवास को खाली कराने की मांग करती है।
आगे क्या होगा?अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय किस प्रकार की कार्रवाई करता है। चूंकि बंगले की आवश्यकता वर्तमान या आने वाले किसी मुख्य न्यायाधीश के लिए हो सकती है, सरकार पर यह दबाव रहेगा कि वह इस मामले को शीघ्र हल करे।