दिल्ली में एक बड़ी साजिश को समय रहते विफल कर दिया गया है। राजधानी और आसपास के इलाकों में संभावित आतंकी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे दो युवकों को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये दोनों आरोपी पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर और कथित तौर पर आईएसआई से जुड़े शहजाद भट्टी के इशारों पर काम कर रहे थे। आरोपियों का मकसद फायरिंग, ग्रेनेड हमले और टारगेट किलिंग जैसी घटनाओं को अंजाम देना था।
ndtv इंडिया की खबर के अनुसार, गिरफ्तार किए गए युवकों की पहचान 21 वर्षीय राजवीर और 19 वर्षीय विवेक बंजारा के रूप में हुई है। दोनों मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये आरोपी दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में किसी बड़े हमले की योजना बना रहे थे, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया।
खुफिया जानकारी से खुली साजिश की परतेंस्पेशल सेल को पहले ही एक अहम इनपुट मिला था कि पाकिस्तान से संचालित एक नेटवर्क राजधानी क्षेत्र में बड़ी वारदात की तैयारी में जुटा है। इस सूचना के आधार पर 31 मार्च 2026 को मामला दर्ज किया गया और जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूत्रों की मदद से पुलिस ने धीरे-धीरे इस नेटवर्क की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं और आखिरकार आरोपियों तक पहुंच बनाई।
अलग-अलग चरणों में हुई गिरफ्तारीजांच के दौरान सबसे पहले 16 अप्रैल को विवेक बंजारा को ग्वालियर के डबरा क्षेत्र से हिरासत में लिया गया। उससे मिली जानकारी के आधार पर 18 अप्रैल को मुख्य आरोपी राजवीर को दिल्ली के सराय काले खां इलाके से पकड़ा गया। पुलिस का कहना है कि राजवीर सीधे तौर पर पाकिस्तान से निर्देश प्राप्त कर रहा था और दिल्ली-एनसीआर में किसी बड़े होटल को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहा था।
हथियार और डिजिटल साक्ष्य बरामदराजवीर के कब्जे से एक पिस्टल और छह जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। इसके अलावा दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। इन फोन में कई संदिग्ध वीडियो, वॉइस मैसेज और चैट रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे इस पूरे नेटवर्क की गतिविधियों और विदेशी हैंडलरों की भूमिका का खुलासा हुआ है।
सोशल मीडिया के जरिए हुआ संपर्कजांच में यह भी सामने आया कि राजवीर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से ‘राणा भाई’ नाम के व्यक्ति ने अपने जाल में फंसाया था। माना जा रहा है कि यह व्यक्ति शहजाद भट्टी का करीबी सहयोगी है। बाद में राजवीर ने विवेक को भी इस नेटवर्क से जोड़ लिया। मार्च 2026 में भट्टी ने राजवीर को अहमदाबाद से हथियार लाने का निर्देश दिया था, जिसके लिए विवेक को भेजा गया, हालांकि उस समय हथियार नहीं मिल सके।
पंजाब में वारदात की कोशिशइसके बाद 9 अप्रैल को दोनों आरोपी अमृतसर पहुंचे, जहां उन्हें एक पिस्टल, 15-20 कारतूस और करीब 20 हजार रुपये दिए गए। इन हथियारों का इस्तेमाल कर उन्हें पंजाब के जीरकपुर स्थित एक क्लब पर फायरिंग करने का टास्क सौंपा गया था। 11 अप्रैल को राजवीर ने इस वारदात को अंजाम देने की कोशिश भी की, लेकिन पिस्टल में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण हमला असफल हो गया। इस दौरान विवेक ने पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसे पाकिस्तानी हैंडलर को भेजा जाना था।
दिल्ली में बड़े हमले की योजनावारदात विफल होने के बाद राजवीर ने हथियार को रास्ते में कहीं छिपा दिया और उसकी लोकेशन अपने आकाओं को भेज दी। इसके बाद वह कुछ समय दिल्ली में रुका और फिर फरीदकोट पहुंचा, जहां उसे एक और पिस्टल और छह कारतूस दिए गए। इसी हथियार के साथ वह दोबारा दिल्ली लौटा और किसी बड़े होटल को निशाना बनाने की तैयारी में जुट गया। हालांकि, इससे पहले कि वह अपनी योजना को अंजाम दे पाता, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
आगे की जांच जारीदिल्ली पुलिस का कहना है कि समय पर कार्रवाई कर एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया गया है। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों, फंडिंग के स्रोत और संभावित स्लीपर सेल्स की पहचान करने में जुटी हुई है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि पाकिस्तान से संचालित ऐसे कितने और नेटवर्क देश में सक्रिय हैं।