दिल्ली-NCR में सफर करने वालों की परेशानी बढ़ सकती है। राजधानी और आसपास के इलाकों में आज से ऑटो और टैक्सी सेवाओं पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि विभिन्न ऑटो-टैक्सी यूनियनों ने तीन दिन की हड़ताल का ऐलान कर दिया है। 21 मई से शुरू हुई यह हड़ताल 23 मई तक जारी रहने वाली है। ऐसे में दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, छात्र और रोजाना सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहने वाले लाखों लोगों को आने वाले दिनों में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
यूनियनों का कहना है कि लंबे समय से किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि ईंधन और वाहन संचालन से जुड़ी लागत लगातार बढ़ती जा रही है। उनका आरोप है कि सरकार ने बीते करीब 15 वर्षों से ऑटो और टैक्सी किराए में कोई बड़ा संशोधन नहीं किया, जिसकी वजह से ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती चली गई है। यही वजह है कि अब यूनियनें सड़कों पर उतरने को मजबूर हुई हैं।
ऑटो-टैक्सी संगठनों का कहना है कि CNG, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा हुआ है, लेकिन किराया पुराने स्तर पर ही बना हुआ है। उनका दावा है कि मौजूदा दरों पर गाड़ी चलाना घाटे का सौदा बन चुका है। ड्राइवरों का कहना है कि रोजाना की कमाई से गाड़ी का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। इसी मांग को लेकर यूनियनों ने दिल्ली-NCR में सामूहिक हड़ताल का फैसला लिया है।
हड़ताल में शामिल टैक्सी चालक नरेंद्र तिवारी ने कहा कि मौजूदा समय में ड्राइवरों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। उनके मुताबिक, कुछ समय पहले तक राइड बुकिंग कंपनियां प्रति किलोमीटर बेहतर भुगतान कर रही थीं, लेकिन अब किराए में भारी कटौती कर दी गई है। उन्होंने बताया कि पहले जहां प्रति किलोमीटर 30 रुपये तक मिल रहे थे, वहीं अब यह घटकर करीब 15 से 16 रुपये रह गया है। उनका कहना है कि इसी कारण 21 से 23 मई तक विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है और अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।
एक अन्य टैक्सी चालक दिनेश कुमार ने भी आर्थिक तंगी की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि बाजार में किराए का कोई संतुलन नहीं बचा है और सवारियां भी पहले की तुलना में कम मिल रही हैं। दिनेश के अनुसार, ड्राइवर लगातार बढ़ते खर्च और घटती आमदनी के बीच संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि टैक्सी और ऑटो किराए की समीक्षा कर ड्राइवरों को राहत दी जाए।
इस हड़ताल का असर दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे इलाकों में ज्यादा देखने को मिल सकता है। अगर बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सी चालक हड़ताल में शामिल होते हैं, तो मेट्रो स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों और प्रमुख बाजारों के आसपास यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। आने वाले तीन दिन दिल्ली-NCR के लोगों के लिए ट्रैफिक और परिवहन व्यवस्था के लिहाज से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।