दिल्ली-एनसीआर के लोगों पर महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ गया है। शुक्रवार सुबह पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी के बाद अब CNG उपभोक्ताओं को भी झटका लगा है। ताजा बदलाव के तहत सीएनजी की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है, जिससे आम जनता का मासिक बजट और अधिक प्रभावित होने की आशंका है।
दिल्ली-NCR में लागू हुए नए CNG रेटनए रेट लागू होने के बाद दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और आसपास के पूरे एनसीआर क्षेत्र में सीएनजी अब पहले से महंगी हो गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो ऑटो, कैब या निजी वाहनों का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि परिवहन लागत में इजाफा होना तय माना जा रहा है।
प्रमुख शहरों में CNG के नए दामदिल्ली-NCR और आसपास के इलाकों में सीएनजी की संशोधित कीमतें इस प्रकार हैं:
दिल्ली (NCT) – ₹79.09 प्रति किलो
नोएडा – ₹87.70 प्रति किलो
गाजियाबाद – ₹87.70 प्रति किलो
मुजफ्फरनगर – ₹87.58 प्रति किलो
मेरठ – ₹87.58 प्रति किलो
शामली – ₹87.58 प्रति किलो
गुरुग्राम – ₹84.12 प्रति किलो
रेवाड़ी – ₹83.70 प्रति किलो
करनाल – ₹83.43 प्रति किलो
गैस कंपनियों की सफाईगैस वितरण कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी को मजबूरी बताते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के कारण यह कदम उठाना पड़ा है। भारत अपनी जरूरत का 50 प्रतिशत से अधिक प्राकृतिक गैस आयात करता है, और वैश्विक स्तर पर मांग बढ़ने व आपूर्ति में कमी के चलते दामों पर दबाव बढ़ा है।
इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL), जो दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी आपूर्ति करती है, का कहना है कि बढ़ती लागत को लंबे समय तक वहन करना संभव नहीं था, इसलिए आंशिक बोझ उपभोक्ताओं पर डालना पड़ा।
मुंबई में पहले ही बढ़ चुके थे दामइससे पहले महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने मुंबई, ठाणे और आसपास के क्षेत्रों में सीएनजी की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद वहां रेट ₹84 प्रति किलो तक पहुंच गए थे। मुंबई में हुई इस बढ़ोतरी के बाद पहले से ही अनुमान लगाया जा रहा था कि दिल्ली-NCR में भी जल्द कीमतें बढ़ सकती हैं, जो अब सही साबित हुआ।
वैश्विक कारण भी बने बड़ी वजहविशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका-ईरान संबंधों में खटास और होर्मुज स्ट्रेट में बाधाएं, वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर रही हैं। इस मार्ग से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति होती है, इसलिए यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ता है।
भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर इसका असर और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जहां ऊर्जा लागत तेजी से बढ़ रही है।
सरकार का पक्षहालांकि सरकार की ओर से दावा किया गया है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। साथ ही यह भी कहा गया है कि घरेलू जरूरतों, खासकर एलपीजी की आपूर्ति फिलहाल पूरी तरह स्थिर और नियंत्रित स्थिति में है।
आम जनता पर संभावित असर
ऑटो और टैक्सी किराए में बढ़ोतरी संभव
ट्रांसपोर्ट और डिलीवरी खर्च बढ़ेगा
रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर दबाव
कुल मिलाकर आम लोगों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ