केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच बुधवार को एक बार फिर बातचीत का दौर शुरू होने जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ देर रात हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद सरकारी सूत्रों ने उम्मीद जताई है कि लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद को बातचीत के जरिए जल्द खत्म किया जा सकता है।
जंतर-मंतर पर छात्रों और समर्थकों की लगातार बढ़ती भीड़ के बीच सरकार पर आंदोलन को लेकर दबाव जरूर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या सरकार 'कॉकरोचों' के सामने झुकने को मजबूर होगी। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से अब तक यह संकेत दिए गए हैं कि वह किसी दबाव में आकर निर्णय नहीं लेगी और हर कदम सोच-समझकर उठाया जाएगा।
यही वजह है कि पिछले 24 घंटों में सरकार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को आगे कर विपक्ष और प्रदर्शनकारियों के आरोपों का जवाब देने की रणनीति अपनाई है। बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल है।
बुधवार को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह CJP के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब इससे कुछ घंटे पहले ही डॉ. जितेंद्र सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की थी। वांगचुक अपनी लंबी भूख हड़ताल के बाद फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं।
संसद में चर्चा की मांग पर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सहमति के संकेतन्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी सूत्रों ने बताया कि आधी रात को हुई बैठक में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा सोनम वांगचुक की वह मांग थी, जिसमें उन्होंने छात्र आंदोलन से जुड़े विषयों पर संसद में चर्चा कराने की अपील की थी।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हो सकती है। इसे आंदोलन और सरकार के बीच जारी गतिरोध को खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
सरकारी पक्ष का कहना है कि बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की पूरी कोशिश की जा रही है और सरकार की ओर से संवाद के रास्ते बंद नहीं किए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि चर्चा और आपसी सहमति के जरिए इस पूरे मामले का शांतिपूर्ण समाधान संभव है।
विपक्ष के प्रदर्शन से बढ़ा सियासी तापमानदिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मंगलवार को राजनीतिक हलचल भी तेज रही। विपक्षी दलों ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेता छात्रों के समर्थन में सड़क पर उतरे।
विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास की ओर मार्च करने की कोशिश की।
दिल्ली पुलिस ने मार्च को बीच रास्ते में रोक दिया और राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
संसद के मानसून सत्र में भी इस मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है और सदन में चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ है।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार छात्रों की समस्याओं और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। वहीं सरकार का कहना है कि हर विषय पर उचित प्रक्रिया के तहत बातचीत की जा रही है।
सरकार ने बातचीत के रास्ते पर बढ़ाया कदमकई दिनों से प्रशासन और छात्रों के बीच जारी तनाव के बाद सरकार की ओर से शुरू की गई बातचीत की पहल को बड़ा राजनीतिक कदम माना जा रहा है। इससे पहले सोमवार को भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने CJP प्रतिनिधियों के एक समूह से मुलाकात की थी।
उस बैठक के दौरान छात्रों की ओर से भी सरकार के साथ बातचीत करने की इच्छा जाहिर की गई थी। अब बुधवार को होने वाली बैठक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि यह वार्ता आंदोलन और सरकार के बीच जारी विवाद को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों की नजर में यह बैठक सरकार और आंदोलनकारियों के बीच भरोसा बहाल करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। हालांकि अंतिम समाधान बैठक में होने वाली बातचीत और दोनों पक्षों की सहमति पर निर्भर करेगा।
पश्चिम बंगाल से सीआरपीएफ की 20 अतिरिक्त कंपनियां दिल्ली पहुंचाई जा रहींकॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन और विभिन्न राजनीतिक दलों के विरोध कार्यक्रमों को देखते हुए केंद्र सरकार ने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने का फैसला लिया है। इसके तहत केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 20 अतिरिक्त कंपनियों को राष्ट्रीय राजधानी में तैनात करने का आदेश दिया गया है।
अधिकारियों ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि गृह मंत्रालय ने मंगलवार रात इन अतिरिक्त कंपनियों को दिल्ली भेजने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सीआरपीएफ की इन सभी कंपनियों को पश्चिम बंगाल से विशेष विमानों के माध्यम से दिल्ली लाया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, राजधानी में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की जा रही है। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।