सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया। इसमें उन्होंने सौरव और आशुतोष को खुद से बेहतर ही नहीं, बल्कि उनसे कहीं बड़ा नेता बताया। दोनों नेताओं को सात दिनों की न्यायिक हिरासत के बाद बुधवार को रिहा किया गया। रिहाई से पहले उन्होंने नई दिल्ली स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत में जंतर-मंतर पर किसी भी तरह का प्रदर्शन आयोजित नहीं करने का वचन दिया। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने दोनों को 50-50 हजार रुपये के पर्सनल बॉन्ड और श्योरिटी बॉन्ड भरने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ मामले की जांच जारी रहेगी और अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।
अभिजीत दिपके ने पोस्ट में क्या कहा?सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के बाद अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर दोनों नेताओं की तारीफ की। उन्होंने कहा, “सौरव और आशु न सिर्फ मुझसे बेहतर बल्कि बहुत बड़े नेता हैं। मेरे नेताओं, आपके आदेशों का पालन करने में खुशी हो रही है। जान हाजिर है! लेकिन इसके बाद मेरे बिना गार्डन में कोई अकेला नहीं घूमेगा!!!” इस पोस्ट में अभिजीत दिपके ने सौरव और आशुतोष को अपने से बड़ा नेता बताते हुए उनके प्रति सम्मान जताया। साथ ही, उन्होंने उनके निर्देशों का पालन करने की बात भी कही। पोस्ट के आखिर में गार्डन में उनके बिना किसी के अकेले नहीं घूमने वाली बात भी लिखी, जिससे उनके संदेश का अंदाज अलग नजर आया।
सौरव दास और आशुतोष रांका ने अदालत में क्या वचन दिया?जमानत और रिहाई की प्रक्रिया के दौरान सौरव दास और आशुतोष रांका ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने का आश्वासन दिया। दोनों ने स्पष्ट किया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और उन्हें न्यायपालिका तथा उसकी सभी व्यवस्थाओं पर पूरा भरोसा है। इसमें SEM अदालत भी शामिल है। दोनों नेताओं ने अपने वचन में कहा कि वे शांति, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक अमन-चैन बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराते हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जब तक कानून के मुताबिक जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया जाता, तब तक वहां कोई प्रदर्शन आयोजित नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई प्रदर्शन किया जाता है, तो वह पूरी तरह संविधान के दायरे में रहकर ही किया जाएगा। इस तरह अदालत के सामने दोनों नेताओं ने सार्वजनिक शांति बनाए रखने, कानूनी व्यवस्था का पालन करने और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर निर्धारित शर्तों का सम्मान करने का वादा किया।
50-50 हजार रुपये के बॉन्ड भरने के बाद मिली रिहाईसौरव दास और आशुतोष रांका सात दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद बुधवार को तिहाड़ जेल से बाहर आए। उनकी रिहाई का आदेश विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दिया। अदालत ने दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के पर्सनल बॉन्ड और श्योरिटी बॉन्ड भरने का निर्देश दिया था। निर्धारित बॉन्ड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। हालांकि, रिहाई के साथ ही मामले की जांच समाप्त नहीं हुई है। अदालत ने साफ किया कि दोनों नेताओं के खिलाफ जांच जारी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित की गई है।
सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल क्यों भेजा गया था?सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका 14 अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में थे। इससे पहले 13 अक्टूबर को दोनों ने जंतर-मंतर के बंद गेट को फांदकर वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। यह कदम जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाए जाने के विरोध में उठाया गया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा था कि दोनों नेताओं की इस कार्रवाई से उस पीस बॉन्ड का उल्लंघन हुआ, जिस पर उन्होंने 10 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद हस्ताक्षर किए थे। दोनों ने चुनावी धांधली के खिलाफ प्रदर्शन आयोजित किया था। इसी मामले में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अब रिहाई के बाद दोनों नेताओं ने अदालत के सामने शांति बनाए रखने और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं करने का आश्वासन दिया है। उनके खिलाफ जांच जारी है और मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।