कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 5 सितंबर को प्रस्तावित आंदोलन से पहले सरकार और संगठन के बीच बातचीत तेज होने का दावा किया गया है। CJP के सह संयोजक सौरभ दास के मुताबिक, सरकार की ओर से एक उच्च स्तरीय कमिटी लगातार उनके संपर्क में है। उन्होंने बताया कि यह कमिटी उनसे बातचीत करने के लिए पुडुचेरी तक पहुंची, जहां वह अपने घर गए थे।
सौरभ दास के अनुसार, उनके और कमिटी के बीच मुकदमों को वापस लेने तथा मुआवजे के मुद्दे पर तीन बार बातचीत हो चुकी है। उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से हाल में उठाए गए कदमों को सकारात्मक बताया और संकेत दिया कि दोनों पक्षों के बीच समझौते की एक रूपरेखा तैयार हो चुकी है।
5 सितंबर को प्रदर्शन का ऐलानCJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में एक नए आंदोलन की घोषणा की है। संगठन ने इंडिया गेट से पुलिस हेडक्वॉर्टर तक प्रोटेस्ट मार्च निकालने की बात कही है।
इससे पहले CJP ने जंतर-मंतर पर करीब एक महीने तक आंदोलन किया था। संदर्भ सामग्री के मुताबिक, इस आंदोलन के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बना था।
अब संगठन की अगली मांगों में जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेना और NEET PG पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले बच्चों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देना शामिल है।
मुकदमों पर सुप्रीम कोर्ट में सरकार की याचिकामुकदमों को वापस लेने के मुद्दे पर सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। संदर्भ सामग्री के अनुसार, यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रही कुछ सुनवाइयों के बीच अटका हुआ था। अब सरकार ने इसे जल्द निपटाने के लिए सर्वोच्च अदालत से आग्रह किया है।
CJP की ओर से कहा गया है कि सरकार इन दोनों मांगों को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर चुकी है, हालांकि औपचारिक घोषणा अभी बाकी है।
पुडुचेरी तक पहुंची कमिटीसौरभ दास ने सरकार की बातचीत की कोशिशों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उनके मुताबिक, सरकार की उच्च स्तरीय कमिटी लगातार CJP से संपर्क में है। दास ने बताया कि जब वह पुडुचेरी स्थित अपने घर चले गए, तब भी कमिटी वहां पहुंची और दोनों पक्षों के बीच तीन दौर की बातचीत हुई।
इन बैठकों में दर्ज मामलों को वापस लेने और मुआवजे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। दास के बयान से संकेत मिलता है कि सरकार और CJP के बीच किसी समझौते तक पहुंचने की कोशिश चल रही है।
BRICS सम्मेलन के बीच आंदोलन से बचना चाहती है सरकार?5 सितंबर के आंदोलन की तारीख दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन की तैयारियों के बीच पड़ रही है। संदर्भ सामग्री के अनुसार, सम्मेलन में रूस, चीन समेत करीब 20 देशों के प्रतिनिधियों और राष्ट्राध्यक्षों के दिल्ली आने की बात कही गई है।
ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार नहीं चाहती कि सम्मेलन से पहले राजधानी की सड़कों पर किसी तरह का आंदोलन या अशांति दिखाई दे। हालांकि, सरकार की ओर से इस संबंध में ऐसा कोई प्रत्यक्ष बयान संदर्भ सामग्री में नहीं दिया गया है।
इसी वजह से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या CJP एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने में सफल रही है। संभावित घटनाक्रम के तौर पर यह माना जा रहा है कि मुकदमों के मामले में राहत मिलने के बाद मुआवजे को लेकर भी जल्द घोषणा हो सकती है और इसके बदले CJP से 5 सितंबर के प्रदर्शन को वापस लेने की अपील की जा सकती है।
फिलहाल, औपचारिक घोषणा और CJP की ओर से आंदोलन वापस लेने की पुष्टि सामने नहीं आई है।