12वीं री-इवैल्यूएशन पर CBSE का बड़ा बयान, OSM मार्किंग विवाद के बीच नंबर बढ़ने पर छात्रों को मिलेगा रिफंड

CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों और विवादों के बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान बोर्ड ने स्पष्ट किया कि OSM (On Screen Marking) कोई नई प्रणाली नहीं है, बल्कि इसे पहले भी विभिन्न स्तरों पर लागू किया जा चुका है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने कहा कि छात्रों के बीच इस सिस्टम को लेकर कुछ भ्रम और आशंकाएं पैदा हुई हैं, जिन्हें दूर करना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि कई छात्रों को यह लग रहा है कि उन्हें अपेक्षा से कम अंक दिए गए हैं, जबकि वास्तविकता में मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए यह बदलाव किया गया है। संजय कुमार ने कहा कि इस वर्ष से इसे व्यापक स्तर पर लागू किया गया है और यह प्रणाली पहले से ही दुनिया के कई देशों में उपयोग में लाई जा रही है। उन्होंने यह भी दोहराया कि छात्रों के हित सर्वोपरि हैं और उनकी किसी भी प्रकार की शैक्षणिक हानि न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

CBSE ने इस दौरान री-इवैल्युएशन प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। बोर्ड ने बताया कि यदि किसी छात्र को अपने अंकों पर संदेह है या लगता है कि कॉपी का मूल्यांकन सही तरीके से नहीं हुआ है, तो वह अब पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए फीस संरचना में भी बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब प्रति कॉपी केवल 100 रुपये शुल्क लिया जाएगा, जबकि पहले यह शुल्क 700 रुपये था। इसके अलावा प्रति प्रश्न जांच के लिए अब 25 रुपये निर्धारित किए गए हैं।
बोर्ड अधिकारियों ने यह भी बताया कि OSM प्रणाली के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप से स्कैन कर तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था में रखा जाता है। इस तकनीक के कारण मूल्यांकन प्रक्रिया को अब क्षेत्रीय कार्यालयों के बाहर भी सुरक्षित तरीके से कराया जा सकता है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में सुधार हुआ है। पहले जिस तरह टोटलिंग में मानवीय त्रुटियों की संभावना रहती थी, इस प्रणाली से उन गलतियों में काफी कमी आई है।

CBSE ने जानकारी दी कि इस नई व्यवस्था की शुरुआत 17 मार्च से की गई थी और इसके लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। इस बार लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया गया, हालांकि इनमें से करीब 13 हजार आंसर शीट ऐसी थीं जो तकनीकी कारणों से सही तरह से स्कैन नहीं हो सकीं। इन सभी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन बाद में मैन्युअल रूप से किया गया ताकि किसी भी छात्र के परिणाम पर असर न पड़े।

बोर्ड ने दोहराया कि मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और सटीक बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है और आगे भी इसमें सुधार जारी रहेगा। CBSE का कहना है कि यदि री-इवैल्यूएशन में किसी छात्र के अंक बढ़ते हैं, तो अतिरिक्त ली गई फीस वापस करने की भी व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे छात्रों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जा सके।