बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात, कैबिनेट विस्तार पर तेज हुई चर्चाएं

बिहार के नव-नियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद यह उनकी राजधानी दिल्ली की पहली आधिकारिक यात्रा मानी जा रही है। इसे औपचारिक रूप से शिष्टाचार भेंट बताया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस दौरान बिहार की नई सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर भी अहम संकेत मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, सम्राट चौधरी की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की संभावना जताई जा रही है, जिससे सियासी गतिविधियां और तेज हो गई हैं।

अधूरी कैबिनेट से बढ़ी प्रशासनिक चुनौती, विस्तार पर टिकी नजरें

वर्तमान में बिहार सरकार में केवल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और दो उपमुख्यमंत्री ही शपथ ले पाए हैं। जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कोटे से अभी तक किसी भी विधायक को मंत्री पद नहीं मिला है। इस वजह से मंत्रिमंडल लगभग अधूरा पड़ा हुआ है, जिससे प्रशासनिक कामकाज की रफ्तार पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

राज्य में कुल 33 मंत्रियों की व्यवस्था का प्रावधान है, लेकिन अब तक पूर्ण कैबिनेट का गठन नहीं हो सका है। ऐसे में नई सरकार के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता जल्द से जल्द मंत्रिमंडल का विस्तार कर शासन व्यवस्था को सुचारू और प्रभावी बनाना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से हुई मुलाकातों के बाद कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया को गति मिल सकती है और सरकार का कामकाज अधिक स्थिर रूप ले सकता है।
24 अप्रैल को होगा विशेष विधानसभा सत्र, विश्वास मत की परीक्षा

गौरतलब है कि 24 अप्रैल को बिहार विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया गया है। इस सत्र में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सदन में विश्वास मत पेश करेंगे और अपनी सरकार के बहुमत को साबित करने की प्रक्रिया पूरी करेंगे। वर्तमान में बिहार में एनडीए की सरकार सत्ता में है, लेकिन इस बार राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के दो उपमुख्यमंत्री बनाए गए हैं।

इससे पहले एनडीए सरकार में मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी नीतीश कुमार संभालते रहे हैं, जबकि भाजपा कोटे से उपमुख्यमंत्री का पद दिया जाता रहा है। लेकिन मौजूदा राजनीतिक बदलाव ने बिहार की सत्ता संरचना को एक नए स्वरूप में बदल दिया है, जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं।