कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों से कुछ समय के लिए आंदोलन रोककर परिवार के साथ वक्त बिताने की अपील की है। बीते पांच महीने से लगातार सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने की रणनीति अपनाने वाली पार्टी के इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर करीब 16 मिनट का वीडियो संदेश जारी कर समर्थकों से आने वाले त्योहारों के दौरान घर पर रहने और अपनों के साथ समय बिताने को कहा। हालांकि, उनके इस संदेश के पीछे क्या वजह है, इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा हो रही है।
खास बात यह है कि बीते सप्ताह तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने पर जोर देने वाले अभिजीत दीपके ने अचानक अपनी रणनीति में बदलाव क्यों किया? क्या पार्टी के दो प्रमुख नेताओं आशुतोष रांका और सौरभ दास के जेल में होने से आंदोलन कमजोर पड़ गया है, या फिर CJP के विरोध प्रदर्शनों की तुलना फ्रांस और अल्बानिया जैसे देशों में हुए आंदोलनों से किए जाने और बांग्लादेश से जुड़ी राजनीतिक बयानबाजी ने पार्टी को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है? इसके अलावा, क्या पार्टी नेतृत्व दिवाली तक अपने दोनों नेताओं को जमानत मिलने की उम्मीद में आगे की योजना बनाने के लिए समय चाहता है? इन सभी पहलुओं को दीपके के संदेश और पार्टी की हालिया गतिविधियों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
मई से लगातार सक्रिय थी CJP, नीट पेपर लीक से शुरू हुआ था आंदोलनअभिजीत दीपके के नेतृत्व में कॉकरोच जनता पार्टी मई महीने के बाद से लगातार प्रदर्शन कर रही है। पार्टी ने अपने शुरुआती बड़े आंदोलनों में नीट पेपर लीक का मुद्दा उठाया था। इस मामले को लेकर जंतर-मंतर पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया गया। पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन चलाया। स्रोत में दिए गए घटनाक्रम के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही यह आंदोलन समाप्त हुआ। CJP ने इसे अपनी बड़ी जीत के रूप में देखा, जिससे अभिजीत दीपके और उनके साथियों का उत्साह बढ़ा।
इस प्रदर्शन के बाद भी पार्टी की सक्रियता कम नहीं हुई। CJP ने अलग-अलग मुद्दों पर अभियान शुरू किए और उनके जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इनमें स्कूल ठीक करो अभियान और आदिवासी स्कूल ठीक करो अभियान प्रमुख रहे। इन अभियानों के माध्यम से पार्टी ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाया और लगातार चर्चा में बनी रही।
इसके बाद पिछले महीने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट सामने आई। इस रिपोर्ट के बाद दीपके की टीम ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया। पार्टी की योजना केवल दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन सीमित रखने की नहीं थी, बल्कि पूरे देश में प्रदर्शन करके सरकार पर दबाव बनाने की थी। हालांकि, इस बार पार्टी की रणनीति अपेक्षित रूप से आगे नहीं बढ़ सकी और आंदोलन को लेकर बनाई गई योजना सफल नहीं हो पाई।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली, जेल पहुंचे आशुतोष रांका और सौरभ दासCJP के हालिया आंदोलन में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरभ दास की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत से जुड़ा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं मिलने के बाद दोनों नेताओं ने परिसर में जबरन प्रवेश करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
दोनों नेताओं को पहले पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था। बाद में उनकी हिरासत की अवधि तीन दिन और बढ़ा दी गई। इस घटनाक्रम ने CJP के आंदोलन को प्रभावित किया है, क्योंकि आशुतोष रांका और सौरभ दास पार्टी की गतिविधियों और प्रदर्शन की रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। दोनों नेताओं के जेल में होने के बीच अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों को आंदोलन से कुछ समय के लिए विराम लेने की सलाह दी है। पार्टी के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि जिस आंदोलन को देशभर में फैलाने की योजना बनाई गई थी, उसी दौरान उसके दो प्रमुख नेता न्यायिक हिरासत में पहुंच गए। ऐसे में पार्टी की आगे की गतिविधियों और नेतृत्व की रणनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
16 मिनट के वीडियो में भावुक हुए दीपके, बोले- सौरव और आशुतोष को भी याद रखेंअभिजीत दीपके ने अपने 16 मिनट के वीडियो संदेश में आशुतोष रांका और सौरभ दास की गैरमौजूदगी का जिक्र करते हुए भावुक अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने समर्थकों से कहा कि आने वाले कुछ दिन अपने परिवार के साथ बिताएं, क्योंकि त्योहारों का समय है और हाल की घटनाओं के बाद परिवारों की चिंता भी बढ़ी होगी।
दीपके ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में समर्थकों का अपने परिजनों के साथ रहना उचित होगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि त्योहार मनाते समय उन दोनों नेताओं को न भूलें, जो इस समय अपने परिवारों के पास नहीं जा सकते। उन्होंने अपने संदेश में कहा, “मैं चाहता हूं कि आप त्योहारों पर अपनों के साथ रहें, लेकिन सौरव और आशुतोष को भी याद रखें, क्योंकि वे अपने परिवार के पास नहीं जा सकते। अब वे ही हमारा परिवार हैं।” दीपके के इस बयान में एक तरफ समर्थकों से त्योहारों के दौरान परिवार के साथ रहने की अपील थी, तो दूसरी तरफ जेल में बंद दोनों नेताओं के प्रति एकजुटता का संदेश भी था। उन्होंने हालिया घटनाओं के बाद समर्थकों और उनके परिजनों की चिंताओं का उल्लेख करते हुए कुछ समय के लिए आंदोलन से दूर रहने की बात कही। उनके संदेश को पार्टी की मौजूदा परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, वीडियो में की गई अपील अपने आप में आंदोलन स्थगित करने के पीछे की सभी वजहों की पुष्टि नहीं करती। इसके बावजूद, रांका और दास की हिरासत तथा पार्टी की हालिया गतिविधियों को देखते हुए इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आखिर क्यों आंदोलन रोकने पर विचार कर रही है CJP?अभिजीत दीपके के संदेश का विश्लेषण करने पर संकेत मिलता है कि कॉकरोच जनता पार्टी दिवाली तक अपने आंदोलनों को रोक सकती है। इसके पीछे कई संभावित वजहों की चर्चा है। इनमें सबसे प्रमुख कारण आशुतोष रांका और सौरभ दास का जेल में होना माना जा रहा है।
दीपके ने खुद एक बयान में बताया है कि CJP के आंदोलनों की रूपरेखा तैयार करने का काम आशुतोष रांका और सौरभ दास ही करते थे। ऐसे में दोनों की गैरमौजूदगी पार्टी की संगठनात्मक और आंदोलन संबंधी गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। पार्टी के लिए विरोध प्रदर्शन की योजना बनाना और उसे जमीन पर लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वाले दोनों नेता फिलहाल जेल में हैं। इससे पहले 16 अक्टूबर को CJP ने तिरंगा मार्च भी निकाला था, लेकिन यह मार्च प्रभावी साबित नहीं हुआ। पार्टी के हालिया घटनाक्रम में इसे भी एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। लगातार आंदोलनों के बाद तिरंगा मार्च से अपेक्षित असर नहीं दिखने और दो प्रमुख नेताओं के जेल में होने के बीच दीपके की ओर से समर्थकों को विराम लेने की सलाह दी गई है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि आंदोलन रोकने का फैसला केवल इन घटनाओं के कारण लिया गया है। पार्टी की ओर से वीडियो संदेश में त्योहारों और परिवारों के साथ समय बिताने पर जोर दिया गया है, जबकि आंदोलन की रणनीति में बदलाव के पीछे अन्य संभावित कारणों पर भी चर्चा हो रही है।
फ्रांस और अल्बानिया के आंदोलनों से तुलना, क्या बांग्लादेश का मुद्दा भी वजह है?
CJP के आंदोलन को लेकर दूसरी संभावित वजह इसकी तुलना फ्रांस और अल्बानिया जैसे देशों में हुए विरोध प्रदर्शनों से किए जाने को माना जा रहा है। पार्टी के आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रमों के बीच 'रिजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन जैसे शब्दों को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी हुई है। भाजपा की ओर से लगातार हमले किए जाने के बाद मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भी एक बयान दिया। इसमें उन्होंने कहा कि भारत में नेपाल और बांग्लादेश की तरह सत्ता परिवर्तन की साजिश रची जा रही है। इस बयान के बाद CJP के आंदोलन और सत्ता परिवर्तन से जुड़ी राजनीतिक चर्चाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, CJP खुद को इस तरह के आरोपों या तमगे से दूर रखना चाहती है। हालांकि, यह पार्टी की आधिकारिक तौर पर बताई गई वजह नहीं है, बल्कि आंदोलन स्थगित करने के पीछे एक संभावित कारण के रूप में चर्चा में है। उपलब्ध सामग्री में ऐसा कोई स्पष्ट बयान नहीं है जिसमें दीपके ने सीधे तौर पर कहा हो कि बांग्लादेश से तुलना या सत्ता परिवर्तन की साजिश से जुड़े आरोपों के कारण आंदोलन रोका जा रहा है। इसलिए इस पहलू को एक संभावना के रूप में ही देखा जा सकता है। एक ओर पार्टी के दो प्रमुख नेता जेल में हैं, दूसरी ओर आंदोलन के स्वरूप और उससे जुड़ी राजनीतिक बयानबाजी को लेकर विवाद हो रहा है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना चाहता है या नहीं, यह आने वाले घटनाक्रमों से ही स्पष्ट हो सकेगा।
क्या दिवाली तक रांका और दास को जमानत मिलने की उम्मीद है?आंदोलन से विराम लेने के पीछे एक और संभावित वजह पार्टी नेतृत्व की ओर से समय हासिल करने की रणनीति हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, CJP को उम्मीद है कि दिवाली तक आशुतोष रांका और सौरभ दास को जमानत मिल सकती है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व इस अवधि का इस्तेमाल आगे के आंदोलनों की रूपरेखा तैयार करने और अपनी रणनीति पर विचार करने के लिए करना चाहता हो सकता है।
दोनों नेताओं के जेल में होने के कारण पार्टी को अपनी गतिविधियां संचालित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। यदि उन्हें जमानत मिलती है, तो वे फिर से पार्टी की गतिविधियों और आंदोलनों की योजना बनाने में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, दिवाली तक जमानत मिलने की संभावना को लेकर दी गई जानकारी एक उम्मीद के रूप में है, किसी अदालत के फैसले या निश्चित समयसीमा की पुष्टि के रूप में नहीं। फिलहाल, अभिजीत दीपके ने समर्थकों को त्योहारों के दौरान परिवार के साथ रहने और आशुतोष रांका तथा सौरभ दास को याद रखने का संदेश दिया है। मई से लगातार सक्रिय रही CJP के लिए यह विराम संगठनात्मक परिस्थितियों, जेल में बंद नेताओं की अनुपस्थिति और आंदोलन से जुड़ी राजनीतिक बहसों के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। लेकिन आंदोलन रोकने के पीछे कौन-सी वजह निर्णायक रही, इस पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए पार्टी की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी होगा।