बिहार बंद के दौरान सीवान में हुए छात्र आंदोलन के बीच AK-47 से हवाई फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मी के खिलाफ आखिरकार विभागीय कार्रवाई कर दी गई है। सीवान के पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने पुष्टि की है कि छात्र प्रदर्शन के दौरान फायरिंग करने वाले जवान को निलंबित कर दिया गया है। जांच में उसकी पहचान अभिषेक पटेल के रूप में हुई है, जो विशेष जांच दल (SIT) में तैनात था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया था। इस मुद्दे पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार से जवाब मांगा था। हालांकि उस समय भाजपा सांसद संबित पात्रा ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया था। अब संबंधित पुलिसकर्मी के निलंबन के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ा विवादसोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा गया कि बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान अभिषेक पटेल हाथ में AK-47 लेकर मौके पर दिखाई दिए और कुछ ही क्षण बाद उन्होंने हवाई फायरिंग कर दी। वीडियो में वह हथियार के साथ प्रदर्शनकारियों की ओर तेजी से बढ़ते हुए भी नजर आए। इस घटना के वायरल होने के बाद विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
राहुल गांधी ने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा था कि छात्रों के खिलाफ पूरे तंत्र का रवैया बेहद कठोर हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर AK-47 से गोलियां चलाई गईं और बड़ी संख्या में छात्रों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया था।
तेजस्वी यादव ने भी सरकार को घेराबिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस घटना का वीडियो अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर साझा किया था। वीडियो पोस्ट करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर सीधी फायरिंग की और AK-47 का भी इस्तेमाल किया गया।
तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में लिखा कि जब राज्य का नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथ में हो जिन पर गंभीर आरोप रहे हों, तब लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ इसी तरह का व्यवहार देखने को मिलता है। उन्होंने पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की थी।
संबित पात्रा ने राहुल गांधी के आरोपों को बताया था गलतजब राहुल गांधी ने सार्वजनिक तौर पर यह मुद्दा उठाया था, तब भाजपा सांसद संबित पात्रा ने उनके आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि नेता प्रतिपक्ष का इस तरह का बयान गैर-जिम्मेदाराना है और संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को बिना तथ्यों के ऐसे आरोप नहीं लगाने चाहिए।
संबित पात्रा ने कहा था कि यह दावा पूरी तरह झूठा है कि पुलिस ने छात्र आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए AK-47 का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी जानबूझकर भ्रम और अव्यवस्था फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा सांसद ने यह भी कहा था कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ AK-47 का प्रयोग नहीं किया और राहुल गांधी को इस तरह की गलत जानकारी फैलाने के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। हालांकि अब छात्र आंदोलन के दौरान AK-47 से फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मी अभिषेक पटेल के निलंबन के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय बन गया है।