मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी ने पहले ही दिन सक्रियता दिखाते हुए प्रशासनिक मोर्चे पर कड़े संकेत दे दिए। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद वे मुख्य सचिवालय पहुंचे, जहां मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता तेज, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी कामकाज होगी।
उन्होंने अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि वे पहले भी विभिन्न विभागों में मंत्री के रूप में उनके साथ काम कर चुके हैं, जिससे कार्यशैली और व्यवस्था की उन्हें अच्छी समझ है। वित्त मंत्री के तौर पर उन्होंने राज्य की आर्थिक स्थिति को करीब से देखा है, इसलिए अब अपेक्षा है कि सभी विभाग मिलकर कार्यों को और गति दें।
काम की रफ्तार बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर सख्ती के निर्देशमुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य में चल रहे विकास कार्यों को और तेज किया जाए। उनका जोर था कि यदि काम की गति दोगुनी होगी तो समस्याओं का समाधान भी तेजी से संभव होगा। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी की प्रवृत्ति खत्म होनी चाहिए। केवल फाइल आगे बढ़ाने या औपचारिक पत्राचार तक सीमित रहने की बजाय वास्तविक काम जमीन पर दिखना चाहिए। हर योजना का समय पर निष्पादन सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि जनता को उसका लाभ मिल सके।
जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान पर जोरमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता आम लोगों की समस्याओं का तेजी से समाधान होना चाहिए। किसी भी विभाग में यदि जनता से जुड़ा कोई मुद्दा आता है तो उस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। विशेष रूप से भूमि विवादों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में अधिकांश झगड़े इसी कारण होते हैं, इसलिए इन मामलों को सरल और त्वरित तरीके से निपटाना जरूरी है।
उन्होंने निर्देश दिया कि प्रखंड, अंचल और थाने स्तर पर आम लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलें और उनकी शिकायतों का समय पर समाधान हो। जनता को परेशान होने के बजाय राहत महसूस हो, इस सोच के साथ काम करना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
पिछली योजनाओं को आगे बढ़ाने और नए लक्ष्यों पर फोकससम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य में कई महत्वपूर्ण विकास कार्य हुए हैं। सात निश्चय-1 और सात निश्चय-2 जैसी योजनाओं से बिहार को गति मिली है, जिसे आगे बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि प्रगति यात्रा के दौरान घोषित 430 योजनाओं पर काम जारी है और 2025 में लागू सात निश्चय-3 पर भी तेजी से अमल किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विभिन्न यात्राओं के दौरान उन्होंने जमीनी समस्याओं को करीब से समझा है, इसलिए अब उन मुद्दों के समाधान पर विशेष ध्यान देना होगा।
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने कार्यों की अद्यतन स्थिति और प्रगति रिपोर्ट तैयार करें, जिसकी विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
विकसित बिहार के लक्ष्य पर जोरबैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जनता की समस्याओं का वास्तविक समाधान करना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने की बात दोहराते हुए कहा कि बिहार को विकसित और समृद्ध राज्य बनाने के लिए सभी को मिलकर अनुशासन, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ काम करना होगा।
इस बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।