दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव नतीजे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा झटका दिया है। यहां राष्ट्रीय जनता दल (RJD) समर्थित उम्मीदवार अनिल कुमार झा ने भाजपा के निवर्तमान एमएलसी सर्वेश कुमार को हराकर जीत दर्ज की। हालांकि, इस नतीजे ने राजद नेता तेजस्वी यादव के सामने भी कुछ राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव के दौरान ब्राह्मण मतदाताओं का अनिल झा के पक्ष में खुलकर आना चर्चा में रहा, लेकिन प्रथम वरीयता के वोटों में राजद प्रत्याशी पीछे रहे। दूसरी ओर, मुस्लिम और यादव समुदाय से जुड़े उम्मीदवारों को भी अच्छी संख्या में वोट मिले। इसी वजह से दरभंगा का चुनाव परिणाम राजद के पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
ब्राह्मण मतदाताओं का समर्थन, फिर भी पहली वरीयता में पीछे रहे अनिल झामिथिलांचल के दरभंगा में ब्राह्मण मतदाताओं को लंबे समय से भाजपा का मजबूत समर्थक माना जाता रहा है। इस चुनाव में राजद ने अनिल कुमार झा को उम्मीदवार बनाया तो पार्टी कार्यकर्ताओं ने ब्राह्मण मतदाताओं के बीच यूजीसी बिल के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे पर लगातार बातचीत हुई और अनिल झा के समर्थन में ब्राह्मण मतदाताओं की सक्रियता दिखाई दी। हालांकि, मतगणना के शुरुआती चरण में इसका असर सीधे जीत के रूप में नहीं दिखा। प्रथम वरीयता के मतों की गिनती पूरी होने पर भाजपा के सर्वेश कुमार को 16,115 वोट मिले थे, जबकि अनिल झा के खाते में 14,615 वोट आए। इस तरह पहली वरीयता में भाजपा प्रत्याशी 1,500 मतों से आगे थे। जनसुराज के मोहम्मद इम्तियाज नूरानी 10,227 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए जरूरी मत नहीं मिले, इसलिए आगे की वरीयताओं के आधार पर मतगणना हुई।
जनसुराज के मुस्लिम उम्मीदवार को मिले 10 हजार से ज्यादा प्रथम वरीयता के वोटप्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने दरभंगा स्नातक सीट से मोहम्मद इम्तियाज नूरानी को उम्मीदवार बनाया था। उन्हें प्रथम वरीयता में 10,227 वोट मिले। इस तरह वह शुरुआती मतगणना में तीसरे स्थान पर रहे। चुनावी चर्चा में इसे मुस्लिम मतदाताओं के एक हिस्से के जनसुराज उम्मीदवार की ओर जाने के संकेत के तौर पर देखा गया। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि चुनाव के आधिकारिक नतीजों में जाति या धर्म के आधार पर मतदाताओं का अलग-अलग आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसलिए केवल उम्मीदवारों को मिले वोटों के आधार पर पूरे मुस्लिम समुदाय के मतदान व्यवहार के बारे में निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इस चुनाव में दूसरी वरीयता के मतों ने भी अहम भूमिका निभाई। कम वोट पाने वाले उम्मीदवारों के बाहर होने के बाद उनके मतपत्रों पर दर्ज अगली पसंद के अनुसार वोट आगे के उम्मीदवारों को स्थानांतरित हुए। जनसुराज उम्मीदवार के मतपत्रों से अनिल झा को मिले दूसरी वरीयता के वोटों ने अंतिम मुकाबले में उन्हें बढ़त दिलाने में मदद की।
यादव वोटों में भी दिखी बिखराव की तस्वीर?दरभंगा चुनाव में यादव समुदाय से आने वाले छात्र नेता दिलीप कुमार भी मैदान में थे। उन्हें प्रथम वरीयता में करीब 6 हजार वोट मिलने की बात सामने आई। इस वजह से चुनावी विश्लेषण में यादव मतों के संभावित बंटवारे की चर्चा हो रही है। राजद का पारंपरिक MY यानी मुस्लिम-यादव समीकरण बिहार की राजनीति में पार्टी की सबसे अहम ताकतों में गिना जाता है। लालू प्रसाद यादव के दौर से ही इन दोनों समुदायों का समर्थन राजद के लिए महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में दरभंगा में मुस्लिम और यादव पृष्ठभूमि वाले अलग-अलग उम्मीदवारों को मिले वोटों को पार्टी के लिए राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, दिलीप कुमार को मिले वोटों को सीधे यादव समुदाय का वोट मानना भी सही नहीं होगा। चुनाव में मतदाताओं ने किन कारणों से किसी उम्मीदवार को प्राथमिकता दी, इसका पूरा आकलन केवल जातिगत पहचान के आधार पर नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस के अलग उम्मीदवार ने भी बढ़ाई राजद की मुश्किलइस चुनाव में कांग्रेस ने भी अलग से उम्मीदवार उतारा था। पार्टी की ओर से ब्राह्मण उम्मीदवार रजनीकांत पाठक मैदान में थे। उन्हें प्रथम वरीयता में करीब 4 हजार वोट मिले। इस तरह ब्राह्मण मतदाताओं के बीच राजद और कांग्रेस के उम्मीदवारों के बीच भी वोटों का बंटवारा हुआ। राजद के नजरिये से यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस बिहार में उसकी प्रमुख सहयोगी पार्टी है। दोनों दलों के अलग-अलग चुनाव लड़ने से विपक्षी वोटों के बंटने की संभावना बनी। अगर कांग्रेस और राजद साथ मिलकर चुनाव लड़ते तो नतीजे पर क्या असर पड़ता, यह कहना मुश्किल है, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार को मिले वोटों ने मुकाबले में अलग भूमिका जरूर निभाई।
4,010 वोटों से जीते अनिल झा, दूसरी वरीयता ने पलटा परिणामदरभंगा स्नातक सीट पर मतगणना करीब 60 घंटे तक चली। प्रथम वरीयता के मतों में भाजपा के सर्वेश कुमार आगे थे, लेकिन बाद के चरणों में वरीयता के आधार पर हुए मतों के हस्तांतरण से मुकाबला बदल गया। अंतिम घोषित आंकड़ों के मुताबिक, अनिल कुमार झा को 25,406 और सर्वेश कुमार को 21,396 वोट मिले। इस तरह अनिल झा ने 4,010 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। दरभंगा की यह जीत राजद के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन चुनाव के दौरान सामने आए वोटों के बंटवारे ने तेजस्वी यादव के सामने गठबंधन और सामाजिक समीकरण को लेकर चुनौती भी रखी है। पार्टी के लिए एक ओर कांग्रेस जैसे सहयोगियों के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम और यादव मतदाताओं के समर्थन को एकजुट रखने पर भी ध्यान देना होगा। हालांकि, इस एक चुनाव के नतीजे से पूरे बिहार में MY समीकरण के कमजोर होने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।