बिहार चुनाव नतीजों से निराश दिखे पप्पू यादव, बोले— जनता से क्या कहूं…

बिहार की राजनीतिक हवा एक बार फिर NDA के पक्ष में चलती दिखाई दे रही है। जैसे-जैसे रुझानों की तस्वीर साफ होती जा रही है, राज्य की राजनीति का पूरा परिदृश्य बदलता नज़र आ रहा है। शुरुआती रुझानों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को भारी बढ़त मिलते ही भाजपा और उसके सहयोगी दलों के दफ्तरों में उत्साह का माहौल बन गया है। ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ कार्यकर्ता जश्न मनाने लगे हैं। इसके विपरीत, महागठबंधन का खेमा़ गहरे सदमे और निराशा में डूबा हुआ है। इसी निराशा के बीच पूर्व सांसद और जन अधिकार पार्टी के मुखिया पप्पू यादव भी भावुक नज़र आए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ये नतीजे बिहार के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।

“नतीजों को मानना होगा, लेकिन ये राज्य के लिए दुखद हैं” — पप्पू यादव


जब रुझानों ने लगभग अंतिम रूप लेना शुरू किया, तो मीडिया से बातचीत में पप्पू यादव ने अपनी पीड़ा और असहमति जाहिर की। उन्होंने कहा, “जो परिणाम आ रहे हैं, उन्हें स्वीकार करना ही पड़ेगा, लेकिन यह सच है कि बिहार के लिए यह स्थिति कष्टदायक होगी।”

उन्होंने आगे कहा, “जनता से तो मैं कुछ नहीं कह सकता, उनका फैसला सर्वोपरि है… पर एक बिहारी होने के नाते यह सूरत-ए-हाल दुखद लगती है।”

NDA को मिलती दिख रही है ऐतिहासिक बढ़त

244 विधानसभा सीटों वाले बिहार में NDA अभूतपूर्व बढ़त के साथ आगे बढ़ रहा है। दोपहर तक मिली रिपोर्टों में यह गठबंधन 180 से अधिक सीटों पर आगे था, जो उसे स्पष्ट और आरामदायक बहुमत की स्थिति में पहुंचाता है। चुनाव आयोग के उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भाजपा 101 में से 80 से ज्यादा सीटों पर लीड बनाए हुए है और चुनाव की सबसे बड़ी पार्टी बनने की ओर तेज़ी से बढ़ रही है। इतने मजबूत प्रदर्शन से भाजपा न केवल अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करेगी, बल्कि पिछले लोकसभा चुनाव में मिले झटके को भी काफी हद तक संतुलित कर लेगी।

वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की JDU भी इस बार दमदार वापसी करती दिखाई दे रही है। 2020 में जहां JDU मात्र 43 सीटों पर सिमट गई थी, वहीं इस बार पार्टी 70 से अधिक सीटों पर आगे चल रही है। इसके साथ ही चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 20 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाकर चुनावी मैदान में अपनी मजबूती दिखा रही है।

महागठबंधन को लगा करारा झटका


दूसरी तरफ, महागठबंधन की हालत बेहद चिंताजनक है। पिछली बार सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने वाली राष्ट्रीय जनता दल (राजद) इस बार 40 से कम सीटों पर सिमटती दिख रही है — जबकि उसने 140 से अधिक सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। कांग्रेस की स्थिति तो इससे भी दयनीय है। 61 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी दहाई का आंकड़ा भी पार करती नहीं दिख रही। महागठबंधन के दोनों प्रमुख दलों की यह गिरती स्थिति उनके लिए बड़ा राजनीतिक झटका है।