भारत और इंग्लैंड के बीच चल रही पांच मैचों की टेस्ट श्रृंखला निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुकी है। तीन मैचों के बाद इंग्लैंड 2-1 से आगे है और 23 जुलाई से मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में शुरू होने वाला चौथा टेस्ट भारत के लिए करो या मरो जैसा है। इसी पृष्ठभूमि में पूर्व इंग्लैंड तेज़ गेंदबाज़ स्टीव हार्मिसन ने कुलदीप यादव को शामिल करने पर चर्चा छेड़ दी है—लेकिन उनका साफ कहना है कि न तो रवींद्र जडेजा को आप बाहर कर सकते हैं और न ही वॉशिंगटन सुंदर को; असली पेच टीम संयोजन का है। कुलदीप की कलाई स्पिन से मैच पलट सकता है, पर उन्हें फिट करने के लिए किसे जगह छोड़नी होगी—यही बड़ी चयनात्मक पहेली बन गई है।
श्रृंखला की स्थिति: भारत पिछड़ रहा, मौका अभी बाकीलॉर्ड्स में रोमांचक तीसरे टेस्ट में 22 रन से हार के बाद भारत श्रृंखला में 1-2 से पीछे चला गया। जडेजा ने वहां जुझारू नाबाद अर्धशतक खेलकर मुकाबले को आख़िरी पलों तक जिंदा रखा, लेकिन इंग्लैंड ने दबाव झेलते हुए जीत दर्ज की और बढ़त बना ली। अब मैनचेस्टर का टेस्ट भारत के लिए श्रृंखला बचाने का अनिवार्य मौका है; जीत से स्कोर 2-2 पर आ सकता है और ओवल में फ़ाइनल जैसा निर्णायक मुकाबला तैयार होगा।
टीम इंडिया की चोटें और चयन संकटभारतीय खेमे को चोटों और फिटनेस समस्याओं ने लगातार परेशान रखा है, जिससे टीम संयोजन हर टेस्ट से पहले बदलने को मजबूर हुआ है। चौथे टेस्ट से पहले भी कुछ खिलाड़ियों की उपलब्धता पर सवाल हैं, जिसने चयन को और पेचीदा बना दिया है—इसी संदर्भ में हार्मिसन ने कहा कि भारत को बदलाव करने ही पड़ सकते हैं और कुलदीप एक आकर्षक, विकेट लेने वाला विकल्प हो सकते हैं।
कुलदीप यादव: ‘एक्स-फ़ैक्टर’ लेकिन कहाँ फिट हों?हार्मिसन का तर्क है कि कुलदीप की wrist-spin इंग्लैंड के आक्रामक बल्लेबाज़ों के विरुद्ध घातक साबित हो सकती है। पर समस्या यह है कि उन्हें लाने के लिए किसी स्थापित खिलाड़ी को बाहर करना होगा—और वे यह कठोर निर्णय लेना नहीं चाहेंगे। उन्होंने विशेष रूप से कहा: आप जडेजा को नहीं छोड़ सकते, आप सुंदर को भी नहीं छोड़ सकते; तीन स्पिनरों के साथ उतरना बड़ा कदम होगा। अगर भारत अतिरिक्त बल्लेबाज़ घटाए—जैसा पहली टेस्ट में हुआ था—तो शायद रास्ता निकले, लेकिन यह एक जोखिम भरा कॉल है।
तुलना बनाम आक्रामकताESPNcricinfo के कार्यक्रम पर चर्चा करते हुए हार्मिसन ने इंगित किया कि वर्तमान परिस्थितियों में भारतीय टीम अपेक्षाकृत संतुलित दिखती है; ऐसे में कुलदीप को जोड़ना उस संतुलन को बदल सकता है। यदि भारत अतिरिक्त स्पिन आक्रमण से विकेटों की संभावनाएँ बढ़ाना चाहता है, तो बल्लेबाज़ी गहराई या सीम गेंदबाज़ी कवरेज में समझौता करना पड़ सकता है। यही वह समीकरण है जिस पर टीम प्रबंधन को संजीदगी से विचार करना होगा।
ओल्ड ट्रैफर्ड की पिच: स्पिन की संभावना, उछाल कममैनचेस्टर की सतह को लेकर हार्मिसन का आकलन है कि मैच आगे बढ़ने के साथ स्पिनरों की भूमिका बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि गेंद बहुत उछलेगी नहीं, पर घूमने की पूरी संभावना है—विशेषकर जैसे-जैसे टेस्ट पाँचवें दिन की ओर बढ़े। हाल के वर्षों में ओल्ड ट्रैफर्ड ने अपना पारंपरिक तेज़ उछाल कुछ हद तक खोया है और अब यह अपेक्षाकृत धीमी, सपाट हो सकती है, जिससे स्पिनरों को मदद मिलती है यदि वे धैर्य और कोण का इस्तेमाल करें।
तीन स्पिनरों की बहस: एथरटन का सुझावपूर्व इंग्लैंड कप्तान माइकल एथरटन ने भी भारत को चौथे टेस्ट में तीन स्पिनरों—संकेततः कुलदीप सहित—पर विचार करने की सलाह दी है। उनका मानना है कि ओल्ड ट्रैफर्ड की पारंपरिक परिस्थितियाँ लंबे मैच में घूमती पिच तैयार कर सकती हैं, और भारत को श्रृंखला बराबर करने के लिए आक्रामक चयन करना पड़ सकता है। यह राय हार्मिसन की सतही स्पिन-अनुकूलता वाली टिप्पणियों के साथ दिलचस्प रूप से मेल खाती है, भले दोनों चयन संतुलन पर सावधानी बरतने को कह रहे हों।
जडेजा और सुंदर: क्यों इन्हें बाहर करना मुश्किल
रवींद्र जडेजा ने श्रृंखला में महत्वपूर्ण ऑलराउंड योगदान दिया है—लॉर्ड्स में उनका धैर्यपूर्ण नाबाद 61 रन भारत को हार के कगार से वापस लड़ाता रहा। सुंदर ने बल्ले और गेंद दोनों से उपयोगी योगदान देकर टीम की गहराई बनाए रखी है; निचले क्रम में रन जोड़ना और लंबी स्पेल डालना, दोनों ही पहलुओं में उनका रोल अहम रहा है। यही कारण है कि हार्मिसन ने ज़ोर देकर कहा कि इन दोनों को हटाना व्यावहारिक नहीं दिखता।
कुलदीप का विदेशी टेस्ट अनुभव सीमितरिपोर्टों के अनुसार कुलदीप ने विदेश की परिस्थितियों में अभी तक बहुत ज़्यादा टेस्ट नहीं खेले—सिडनी और लंदन जैसे सीमित अनुभव ही उनके पास हैं। छोटे सैंपल में भी उनकी कलाई-spin की विविधता जानी जाती है, पर लंबे फ़ॉर्मेट में निरंतरता और match-time का प्रश्न बना हुआ है। टीम प्रबंधन यह तौलेगा कि एक निर्णायक टेस्ट में ऐसे स्पिनर को मौका देना रणनीतिक लाभ होगा या अनावश्यक जोखिम।
भारत के विकल्प
जस का तस संयोजन: जडेजा + सुंदर के साथ दो स्पिन, तेज़ आक्रमण यथावत—कुलदीप बाहर। जोखिम: विकेट न मिलने पर मैच हाथ से निकल सकता है। लाभ: बल्लेबाज़ी गहराई बरकरार।
सुंदर की जगह कुलदीप: अतिरिक्त आक्रमण लेकिन बैटिंग लंबाई घटेगी; सुंदर की उपयोगी निचले क्रम बल्लेबाज़ी का नुकसान।
तीन स्पिनरों का दाँव: जडेजा + सुंदर + कुलदीप; इसके लिए या तो एक बल्लेबाज़ या एक सीमर कम करना होगा। ओल्ड ट्रैफर्ड लंबा टेस्ट खेलने लायक है; यदि पिच टूटती है तो यह मैच-विजेता चाल बन सकती है। किंतु अगर शुरुआती दिनों में सीम सहायता रही और भारत ने तेज़ गेंदबाज़ घटा दिया तो उल्टा पड़ सकता है।
जसप्रीत बुमराह के कार्यभार पर नज़रएथरटन की टिप्पणी में बुमराह के कार्यभार प्रबंधन को चयन समीकरण का हिस्सा बताया गया—यदि भारत तेज़ विभाग में रोटेशन करना चाहे तो अतिरिक्त स्पिनर (कुलदीप) लाने का तर्क मज़बूत हो सकता है। लम्बी श्रृंखला में प्रमुख स्ट्राइक बॉलर की फिटनेस बचाना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना सही संयोजन चुनना।