भारत और इंग्लैंड के बीच मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेला गया एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी का चौथा टेस्ट मुकाबला रोमांचक ड्रॉ पर समाप्त हुआ। भारतीय टीम पर जहां हार का खतरा मंडरा रहा था, वहीं रवींद्र जडेजा और वाशिंगटन सुंदर की शतकीय पारियों ने टीम को सुरक्षित किनारे पर पहुंचा दिया।
गिल-राहुल के आउट होने के बाद पारी को संभालने का जिम्मा लिया वाशिंगटन सुंदर और रवींद्र जडेजा ने। भारत ने दूसरी पारी में 4 विकेट पर 425 रन बनाए, जिसमें जडेजा 107 (185 गेंद, 13 चौके, 1 छक्का)* और सुंदर 101 (206 गेंद, 9 चौके, 1 छक्का)* बनाकर नाबाद लौटे। दोनों ने मिलकर 203 रन की नाबाद साझेदारी की और इंग्लैंड को जीत का कोई मौका नहीं दिया। सुंदर ने अपने टेस्ट करियर का पहला शतक (101 रन, 206 गेंद) जड़ा, तो जडेजा ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए 107 रन (185 गेंद) बनाए। दोनों ने मिलकर इंग्लैंड को जीत से दूर रखा।
गिल, राहुल की नींवदूसरी पारी में शुरुआत लड़खड़ाने के बाद, शुभमन गिल (103) और केएल राहुल (90) ने तीसरे विकेट के लिए 166 रनों की साझेदारी की। ये साझेदारी टीम को स्थिरता देने के साथ-साथ मैच को संतुलन में लाने की दिशा में निर्णायक रही।
पांचवें दिन की शुरुआत भारत ने 2 विकेट पर 174 रनों से की थी। पहले ही सत्र में केएल राहुल और कप्तान शुभमन गिल का विकेट गिर गया। राहुल 90 और गिल 103 रन बनाकर आउट हुए। भारत अपने 4 विकेट 222 के स्कोर पर खो चुका था। यहां भारत पर हार का खतरा था। दिन के पूरे दो सेशन बचे हुए थे।
रवींद्र जडेजा और वाशिंगटन सुंदर ने शानदार और यादगार बल्लेबाजी की। उन्होंने क्रीज पर पहले नजर जमाई और फिर तेजी से रन बनाए। उन्होंने इंग्लैंड को एक भी मौका नहीं दिया। 55.2 ओवरों में दोनों ने नाबाद 203 रन की साझेदारी की और मैच ड्रॉ कराया।
जडेजा 185 गेंद में 1 छक्का और 13 चौके की मदद से 107 पर नाबाद लौटे, यह उनका पांचवां टेस्ट शतक था। वहीं, सुंदर ने 206 गेंद में नाबाद 101 रन बनाए। यह उनका पहला शतक था। भारत जब 4 विकेट पर 425 पर था, तब दोनों कप्तानों की सहमति से अंपायर्स ने मैच को ड्रॉ घोषित किया।
इससे पहले इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी में 669 रन बनाकर भारत पर 311 रन की बड़ी लीड ली थी। इंग्लैंड के लिए जो रूट ने 150, कप्तान स्टोक्स ने 141, बेन डकेट ने 94 और जैक क्रॉले ने 84 रन बनाए। जडेजा ने 4 विकेट लिए थे। जबकि, भारत ने अपनी पहली पारी में 358 रन बनाए थे।
अब सीरीज का निर्णायक मुकाबलाभारत अब भी 5 मैचों की सीरीज में 2-1 से पीछे है। 31 जुलाई से होने वाले पांचवें और अंतिम टेस्ट में भारत के पास मौका होगा सीरीज को 2-2 से बराबर करने का। यह मुकाबला अब एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के विजेता का फैसला करेगा।
चौथे टेस्ट में भारतीय बल्लेबाज़ों ने साबित किया कि बड़ी बढ़त और दबाव के बावजूद वे हार मानने वाले नहीं हैं। शुभमन गिल, वाशिंगटन सुंदर और रविंद्र जडेजा की जुझारू पारियों ने सिर्फ मैच नहीं बचाया, बल्कि आत्मविश्वास भी लौटाया। सीरीज अब रोमांचक मोड़ पर है, और 31 जुलाई से शुरू होने वाला अंतिम टेस्ट निर्णायक साबित होगा।