ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 भारतीय पैरा खिलाड़ियों के लिए ऐतिहासिक साबित हुए। भारत ने इस बार अपने अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ कुल सात पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। भारतीय दल ने तीन स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक अपने नाम किए। यह उपलब्धि वर्ष 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों की तुलना में कहीं अधिक बड़ी है, जब भारतीय पैरा दल केवल तीन पदक ही जीत सका था। इस बार खिलाड़ियों ने न केवल पदकों की संख्या बढ़ाई, बल्कि अपने संघर्ष, दृढ़ संकल्प और शानदार प्रदर्शन से पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
एथलेटिक्स में भारत का दबदबाभारतीय पैरा एथलेटिक्स टीम ने प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए सात में से छह पदक अपने नाम किए। अंतिम दिन पुरुष गोला फेंक एफ-57 स्पर्धा में भारत ने स्वर्ण और रजत दोनों पदक जीतकर प्रतियोगिता का शानदार समापन किया। भारतीय सेना से जुड़े सोमन राणा ने 13.40 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर स्वर्ण पदक जीता, जबकि शुभम जुयाल ने 13.28 मीटर के साथ रजत पदक हासिल किया। इस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने पहला और दूसरा स्थान हासिल कर अपनी श्रेष्ठता साबित कर दी।
बीस वर्ष बाद टूटा बड़ा सूखाभारतीय पैरा एथलेटिक्स दल ने प्रतियोगिता की शुरुआत में ही बीस वर्षों से चला आ रहा पदकों का इंतजार समाप्त किया। इसके बाद खिलाड़ियों का आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया और उन्होंने एक के बाद एक शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की झोली में पदकों की बारिश कर दी। इस प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि भारतीय पैरा खिलाड़ी अब विश्व स्तर पर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
संघर्ष से शिखर तक पहुंचे झंडू कुमारभारत के लिए प्रतियोगिता का पहला पदक पैरा पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार ने दिलाया। उन्होंने पुरुष हैवीवेट वर्ग में कांस्य पदक जीतकर देश का खाता खोला। उनका जीवन संघर्ष की मिसाल रहा है। बचपन में पोलियो से प्रभावित होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। प्रशिक्षण और पौष्टिक भोजन का खर्च उठाने के लिए उन्होंने बिहार में ई-रिक्शा चलाया और सब्जियां बेचकर अपनी तैयारी जारी रखी। वर्षों की मेहनत का परिणाम उन्हें राष्ट्रमंडल खेलों में पदक के रूप में मिला।
शर्मिला धनकर की प्रेरणादायक सफलतामहिला गोला फेंक एफ-57 स्पर्धा में 40 वर्षीय शर्मिला धनकर ने 9.81 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास करते हुए स्वर्ण पदक जीता। उनका जीवन भी कठिन संघर्षों से भरा रहा है। घरेलू हिंसा का सामना करने के बाद वह अपनी दो बेटियों के साथ बेघर हो गई थीं। इसके बावजूद उन्होंने 34 वर्ष की उम्र में खेलों की शुरुआत की और कुछ ही वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर नई प्रेरणा बन गईं। इसी स्पर्धा में शिल्पा शायला ने कांस्य पदक जीतकर भारत को दोहरा सम्मान दिलाया।
दिलीप गावित ने बनाया नया खेल रिकॉर्डपुरुष 100 मीटर टी-47 स्पर्धा में दिलीप महादू गावित ने 10.71 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीत लिया। इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों का नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। इसी स्पर्धा में भारत के मोहम्मद बासिल मोरसिंगनकथ ने रजत पदक जीतकर भारत को एक और दोहरा सम्मान दिलाया। प्रतियोगिता के दौरान यह तीसरा अवसर था जब किसी स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने एक साथ दो पदक जीते।
भारत के सात पदक विजेताभारत के लिए सोमन राणा ने पुरुष गोला
फेंक एफ-57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। महिला गोला फेंक एफ-57 में
शर्मिला धनकर ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पुरुष 100 मीटर टी-47 स्पर्धा
में दिलीप महादू गावित ने स्वर्ण पदक जीतते हुए नया खेल रिकॉर्ड बनाया।
पुरुष गोला फेंक एफ-57 में शुभम जुयाल ने रजत पदक हासिल किया। पुरुष 100
मीटर टी-47 में मोहम्मद बासिल मोरसिंगनकथ ने रजत पदक जीता। महिला गोला फेंक
एफ-57 में शिल्पा शायला ने कांस्य पदक अपने नाम किया, जबकि पुरुष हैवीवेट
पैरा पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार ने कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला।
भारतीय पैरा खेलों के लिए नई उम्मीदग्लासगो
राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय पैरा खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन केवल पदकों
तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में पैरा खेलों की बढ़ती ताकत और
खिलाड़ियों की मेहनत का प्रमाण भी है। कठिन परिस्थितियों से निकलकर
अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल करने वाले इन खिलाड़ियों ने यह संदेश
दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर परिश्रम के बल पर किसी भी लक्ष्य को
हासिल किया जा सकता है। सात पदकों के साथ भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों के
इतिहास में अपना सर्वश्रेष्ठ पैरा प्रदर्शन दर्ज कर भविष्य की
प्रतियोगिताओं के लिए भी मजबूत उम्मीदें जगा दी हैं।