कॉमनवेल्थ खेल 2026 के नौवें दिन भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए छह पदक अपने नाम किए और पदक तालिका में अपनी स्थिति को और मजबूत बनाया। शुक्रवार भारत के लिए अब तक का सबसे सफल दिन साबित हुआ, जब जूडो और एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों ने दो स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इन सफलताओं के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। भारतीय दल अब तक पांच स्वर्ण, 12 रजत और छह कांस्य पदक जीत चुका है। हालांकि पदक तालिका में भारत अभी भी 10वें स्थान पर बना हुआ है, जबकि वेल्स 24 पदकों के साथ नौवें स्थान पर है।
जूडो और एथलेटिक्स में चमका भारतनौवें दिन भारत की सबसे बड़ी सफलता जूडो और एथलेटिक्स से आई। भारतीय खिलाड़ियों ने इन दोनों खेलों में दमदार प्रदर्शन करते हुए कई यादगार उपलब्धियां हासिल कीं। जूडो में जहां दो स्वर्ण और एक रजत पदक मिला, वहीं एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत और कांस्य पदकों पर कब्जा जमाया।
अस्मिता डे ने बनाया नया इतिहासमहिलाओं के 48 किलोग्राम जूडो वर्ग में अस्मिता डे ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह इस स्पर्धा में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं। पूरे मुकाबले के दौरान उन्होंने बेहतरीन तकनीक और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय दल की सबसे बड़ी सफलताओं में गिना जा रहा है।
हर्ष सिंह ने भी दिलाया स्वर्णपुरुषों के 60 किलोग्राम जूडो वर्ग में हर्ष सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल मुकाबला एकतरफा अंदाज में जीता। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 10-0 से हराकर भारत की झोली में दूसरा स्वर्ण पदक डाला और जूडो में भारत का दबदबा साबित किया।
नीरज चोपड़ा को रजत से करना पड़ा संतोषभारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा से स्वर्ण पदक की सबसे अधिक उम्मीद थी, लेकिन इस बार उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। नीरज ने 85.83 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया, जो स्वर्ण पदक के लिए पर्याप्त नहीं रहा। हालांकि उन्होंने भारत के लिए एक और महत्वपूर्ण पदक जरूर जोड़ा।
यशवीर सिंह ने किया सबको चौंकायापुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में यशवीर सिंह ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 85.41 मीटर दूर भाला फेंका और कांस्य पदक जीत लिया। उनके इस प्रदर्शन ने सभी को प्रभावित किया और भारत को एक अतिरिक्त पदक दिलाया।
तेजस्विन शंकर ने रचा नया अध्यायडेकाथलॉन स्पर्धा में तेजस्विन शंकर ने कांस्य पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। वह कॉमनवेल्थ खेलों की इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। उनकी यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुक्केबाजी में भारत की शानदार शुरुआतमुक्केबाजी में भी भारत का दबदबा देखने को मिला। भारतीय दल के सभी 10 मुक्केबाजों ने अपने-अपने सेमीफाइनल मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बना ली है। इसके साथ ही भारत के लिए कम से कम 10 रजत पदक सुनिश्चित हो गए हैं। अब फाइनल मुकाबलों में भारतीय मुक्केबाजों के पास इन रजत पदकों को स्वर्ण में बदलने का सुनहरा अवसर होगा।
भारत के स्वर्ण पदक विजेताभारत के लिए अब तक पांच खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीते हैं। इनमें मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम भारोत्तोलन वर्ग में, शर्मिला धनकड़ ने महिलाओं की गोला फेंक एफ-57 स्पर्धा में, दिलीप गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी-47 दौड़ में, अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम जूडो वर्ग में तथा हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम जूडो वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया।
रजत पदकों की संख्या पहुंची 12भारत के रजत पदक विजेताओं में ऋषिकांत सिंह, मुथुपांडी राजा, ज्ञानेश्वरी यादव, सर्वेश कुशारे, अजय बाबू वल्लुरी, हरजिंदर कौर, गुलवीर सिंह, मुरली श्रीशंकर, मोहम्मद बासिल, लवप्रीत सिंह, यामिनी मौर्य और नीरज चोपड़ा शामिल हैं। इन खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन ने भारत की पदक संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
कांस्य पदक विजेताओं ने भी बढ़ाया मानभारत के लिए झंडू
कुमार, बिंद्यारानी देवी, शिल्पा शायला, सीमा कालीरामना, तेजस्विन शंकर और
यशवीर सिंह ने कांस्य पदक जीतकर देश का सम्मान बढ़ाया। इन खिलाड़ियों के
प्रदर्शन ने साबित किया कि भारतीय दल इस बार विभिन्न खेलों में मजबूत
चुनौती पेश कर रहा है।
आगे और बढ़ सकती है भारत की पदक संख्यामुक्केबाजी
के सभी खिलाड़ियों के फाइनल में पहुंचने के बाद भारत के पदकों की संख्या
में और इजाफा होना लगभग तय माना जा रहा है। यदि भारतीय मुक्केबाज अपने
फाइनल मुकाबले जीतने में सफल रहते हैं तो भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या
में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में कॉमनवेल्थ खेल 2026 के शेष
मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों से देश को कई और पदकों की उम्मीद रहेगी।