राजस्थान में कोरोना का खतरा बढ़ता ही जा रहा हैं जिसे देखते हुए राज्य सरकार ने सख्ती से गाइडलाइन बनाई हैं। इस सख्ती में सरकार ने एक फैसला यह लिया था कि इमरजेंसी को छोड़ निजी वाहन से एक जिले से दूसरे जिले में आवाजाही बंद कर दी गई है। सभी जिलों की सीमाओं पर बॉर्डर सील कर दिए हैं। सार्वजनिक परिवहन के अलावा निजी वाहनों को जिले से बाहर जाने पर रोक है। अब इस फैसले पर सवाल खड़े होने लगे हैं। क्योंकि एक्सपर्ट्स की राय हैं कि इस कोरोनाकाल में सार्वजनिक परिवहन में ज्यादा खतरा है जबकि निजी वाहन से जाना ज्यादा सुरक्षित हैं। डाॅक्टर्स का भी यही कहना है कि बस की अपेक्षा निजी वाहन अधिक सेफ है। जनता सरकार से सवाल पूछ रही है, आखिर हम ज्यादा सुरक्षित अपने निजी वाहन में हैं या बसों में।
सार्वजनिक परिवहन की बसों में 52 सीट होती हैं। ऐसे में 26 लोग एक साथ यात्रा कर सकते हैं। निजी वाहन में नई गाइडलाइन के मुताबिक, आधी सीटों पर लोगों के बैठने की अनुमति है, ड्राइवर सहित तीन लोग बैठ सकते हैं। यह इमरजेंसी सेवा के लिए है। गृह विभाग की इसी नई गाइडलाइन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक्सपर्ट का कहना हैं कि जहां ज्यादा लोग होंगे वहां संक्रमण का खतरा ज्यादा होगा। बसों में एक साथ 25 या उससे ज्यादा व्यक्ति बैठकर अगर सफर करते हैं तो उससे ज्यादा अच्छा अपने निजी वाहन में सफर करने में है।बड़े औद्योगिक क्षेत्रों और कंपनियों में काम करने वालों को भारी परेशानी
नई गाइडलाइन से कामकाजी लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अलवर के भिवाड़ी, खुशखेड़ा, नीमराना और आसपास के इंडस्ट्रियल एरिया में बड़ी संख्या में उद्यमी,अफसर और कर्मचारी रोज हरियाणा दिल्ली से निजी वाहनों से अपडाउन करते हैं। लेकिन, नई गाइडलाइन से उन उद्यमियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अलवर के एक व्यापारी ने बताया कि इस नियम से व्यापार प्रभावित हो रहा है। कोई भी सामान हम बिना देखें कैसे खरीद सकते हैं। निजी वाहन से जाना ज्यादा सेफ है। जबकि सार्वजनिक वाहन से खतरा है। ज्यादा भीड़ होगी तो संक्रमण का भी डर रहेगा।