सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर आज सुप्रीम कोर्ट लेगी फैसला

अयोध्या मामले में फैसला सुनाने के बाद अब देश की सर्वोच्च अदालत गुरुवार को केरल के 800 साल पुराने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश दिए जाने पर अपना अंतिम फैसला सुनाएगी। अदालत ने 28 सितंबर 2018 को 4:1 के बहुमत से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी दी थी। इसके बाद केरल के कई जिलों में फैसले के विरोध में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई थी। इसके अलावा 64 अन्य याचिकाएं भी दाखिल की गई थीं। इन पर 6 फरवरी को सबरीमाला मामले में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच न्यायमूर्तियों की संविधान पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था, जिसको अब सार्वजनिक किया जाएगा। अब सुप्रीम कोर्ट की बेंच गुरुवार सुबह 10:30 बजे अपना फैसला सुनाएगी। आपको बता दें कि 17 नवंबर को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई रिटायर हो रहे हैं। लिहाजा जिन मामलों की उन्होंने सुनवाई की है, उनमें फैसला 17 नवंबर से पहले ही सुनाया जा रहा है।

इस फैसले के बाद साफ हो जाएगा कि महिलाओं पर प्राचीन काल से जारी पाबंदी फिर से बहाल होगी या नई व्यवस्था बरकरार रहेगी? वैसे अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ के फैसले में उस बात पर लोगों की उम्मीद टिकी है, जिसमें कोर्ट ने कहा है कि अदालत को धार्मिक अधिकारों में दखल नहीं देना चाहिए।
क्या है सबरीमाला मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी हटा दी थी। साथ ही कहा था कि महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश पर पाबंदी असंवैधानिक है। इस फैसले का भगवान अयप्पा के अनुयायी भारी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि मंदिर के भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं और 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश से मंदिर की प्रकृति बदल जाएगी।

इसको लेकर जब जस्टिस नरीमन ने सवाल किया कि अगर 10 से 50 वर्ष की अनुसूचित जाति की महिला को प्रवेश से रोका जाता है, तो क्या वहां अनुच्छेद 17 लागू होगा। इस पर सीनियर एडवोकेट परासरन का जवाब था कि मंदिर में पाबंदी मूर्ति की ब्रह्मचारी प्रकृति के कारण है न कि जाति के आधार पर। उधर दूसरी ओर महिला संगठनों और मूल याचिकाकर्ता के वकीलों ने पुनर्विचार याचिकाओं का विरोध किया।

अब शीर्ष कोर्ट इस मामले में अपना फैसला सुनाने जा रहा है। सबरीमाला मामले में पुनर्विचार के लिए कुल 65 याचिकाएं दायर की गई हैं।

ये पांच जज सुनाएंगे फैसला?

सबरीमाला मामले में दायर पुनर्विचार याचिका पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, आरएफ नरीमन, एएम खनविल्कर, डीवाई चंद्रचूड़ और इंदु मल्होत्रा ने सुनवाई की है। इससे पहले 28 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायमूर्तियों की संविधान पीठ ने सबरीमाला मामले में 4:1 से अपना फैसला सुनाया था और सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की इजाजत दी थी।

हालांकि इस फैसले पर जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने असहमति जताई थी। पिछली बार सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सबरीमाला मंदिर में किसी भी उम्र की महिलाओं को प्रवेश नहीं करने देना असंवैधानिक है।पिछली बार इन जजों ने सुनाया था फैसला

पिछली बार जब सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत दी थी, तो उस समय चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा थे और वो बेंच का हिस्सा थे। इस बार दीपक मिश्रा की जगह वर्तमान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई फैसला सुनाने वाली पीठ में शामिल हैं। इसके अलावा पिछली बेंच की तरह आरएफ नरीमन, एएम खनविल्कर, डीवाई चंद्रचूड़ और इंदु मल्होत्रा भी इस बेंच में शामिल हैं।

बता दे, 800 साल पुराने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर दशकों से विवाद चल रहा है। मान्यता ये है कि 12वीं सदी के भगवान अयप्पा नित्य ब्रह्मचारी माने जाते हैं। जिसकी वजह से मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है।

इस साल जनवरी में 50 साल से कम उम्र की दो महिलाओं ने पुलिसकर्मियों के साथ मंदिर में प्रवेश किया था। उन्होंने वहां पूजा भी की थी। हालांकि, इसके बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया गया था।