
म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले की सड़कों पर अब शवों से भयानक दुर्गंध फैलने लगी है, और लोग अब भी अपने परिवारजनों की तलाश में हाथों से मलबा हटाने में जुटे हैं। दो दिन पहले आए विनाशकारी भूकंप में 1700 से अधिक लोगों की जान गई है और अनगिनत लोग मलबे में दब गए हैं। म्यांमार में मरने वालों की संख्या 1710 तक पहुँच चुकी है, जबकि 5000 से अधिक लोग घायल हुए हैं और लगभग 4000 लोग अब भी लापता हैं।
शुक्रवार दोपहर को 7.7 तीव्रता का भूकंप मांडले के पास केंद्रित था। इस भीषण भूकंप से कई इमारतें गिर गईं और शहर के हवाई अड्डे जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ। टूटी हुई सड़कें, गिरे हुए पुल, और संचार प्रणाली में गड़बड़ी के कारण राहत कार्यों में बाधाएं आईं हैं।
स्थानीय लोग भारी उपकरणों के बिना ही जीवित बचे लोगों की तलाश में हाथों और फावड़ों से मलबा हटाने में जुटे हुए हैं, जबकि तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है। रविवार दोपहर को 5.1 तीव्रता के झटके आने के बाद सड़कों पर लोगों में चीख-पुकार मच गई, लेकिन थोड़ी देर बाद राहत कार्य फिर से शुरू हो गए।
मांडले के 15 लाख निवासियों में से कई ने रात सड़कों पर बिताई क्योंकि वे भूकंप के कारण बेघर हो गए हैं। भूकंप ने पड़ोसी देश थाईलैंड को भी प्रभावित किया, जहां कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई। मांडले के स्थानीय लोग लगातार आ रहे झटकों के कारण अस्थिर इमारतों के ढहने की चिंता में हैं।
म्यांमार में ‘कैथोलिक रिलीफ सर्विसेज’ की यांगून इकाई के प्रबंधक, कैरा ब्रैग ने बताया कि म्यांमार में अब तक 1,644 लोगों की मौत हो चुकी है और 3,408 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में अब तक बचाव कार्य नहीं हो पाया है और लोग अभी भी हाथों से मलबा हटाने में लगे हुए हैं।
म्यांमार में विदेशी मदद पहुंचनी शुरूम्यांमार में विदेशी सहायता पहुंचना शुरू हो गई है। शनिवार देर रात दो भारतीय सी-17 सैन्य परिवहन विमान ने नेपीताव में लैंड किया, जिसमें सेना का एक मेडिकल दल और करीब 120 कर्मी सवार थे। म्यांमार के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह भारतीय दल 60 बिस्तरों वाला एक आपातकालीन उपचार केंद्र स्थापित करने के लिए उत्तर मांडले पहुंचेंगे। इसके अलावा, भारत की ओर से अन्य सहायता भी म्यांमार के सबसे बड़े शहर यांगून में पहुंच चुकी है, जो अब विभिन्न देशों द्वारा भेजी जा रही सहायता का केंद्र बन गया है।