अक्सर ऐसे कई मामले सामने आते हैं जो समाज की संवेदनहीनता को पेश करते हैं। ऐसा ही एक मामला नीमकाथाना में सामने आया जहां एक महिला को मारपीट के दौरान चोट लग गई और डॉक्टरों ने पुलिस केस बताकर इलाज नहीं किया। लुहारवास में रास्ते काे लेकर विवाद की कीमत एक गर्भवती को कोख में पल रहे बच्चे की जान देकर चुकानी पड़ी। पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। आखिरकार दाे दिन चक्कर काटने के बाद पीड़ित परिवार बच्चे का शव लेकर कोर्ट पहुंचा।
मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने बुधवार रात पीड़िता काे अस्पताल में भर्ती कर लिया गया और शव काे माेर्चरी में रखवा दिया गया। रास्ते को लेकर बिमला बावरिया व सरदारा मीणा के परिवार के बीच 18 अक्टूबर को मारपीट हो गई। विमला की गर्भवती दोहिती उसी दिन अपने ससुराल श्रीमाधोपुर से लुहारवास आई थी। मारपीट में उसे भी चोट लगी, जिससे उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। बिमला का आराेप था कि रेखा के साथ सरदारा व हरि मीणा ने मारपीट की। एक सप्ताह बाद होनी थी डिलीवरी, 1 घंटे तड़पती रही
सात-आठ दिन बाद ही डिलीवरी होनी थी। चोट लगने से गर्भपात हो गया। बिमला के अनुसार रेखा और शिशु के शव काे लेकर वे कपिल अस्पताल पहुंचे। आरोप है वहां पुलिस केस होने की बात कहकर उसे संभाला तक नहीं। पहले थाने जाने को कहा। एक घंटे प्रसूता अस्पताल के बाहर तड़पती रही।अस्पताल व पुलिस का तर्क : हमारे पास काेई आया ही नहीं
पीएमओ डॉ. जीएस तंवर का कहना है कि पीड़िता अस्पताल में चिकित्सकों के पास नहीं पहुंची। इलाज के लिए मना करने का सवाल ही नहीं है। डिलीवरी भी अस्पताल में नहीं हुई। सदर थाना सीआई लालसिंह यादव ने बताया कि गर्भवती से मारपीट व शिशु की मौत के मामले में कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। पीड़ित परिवार पुलिस थाने तक आया ही नहीं था।