निपाह वायरस से अब तक 12 लोगों की मौत, मलेशिया से मंगवाया एंटी-वायरल ड्रग

केरल में निपाह वायरस से मरने वालों की संख्या में बढ़कर 12 हो गई है। केरल से शुरू हुए निपाह वायरस का खौफ पूरे भारत में देखने को मिल रहा है। कर्नाटक, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश में भी इसके फैलने की खबरों से हड़कंप मच गया है। वहीं इसने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की भी चिंता बढ़ा दी है। मंत्रालय की ओर से एक एडवाइजरी जारी कर सभी राज्यों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

दिल्ली-एनसीआर के लोगों को भी इस वायरस को लेकर अलर्ट कर दिया गया है। वायरस के संक्रमण से बचने के लिए कोझिकोड में सार्वजिनक सभाओं पर रोक लगा दी गई है।

निपाह वायरस की चपेट में आने से जैसे-जैसे मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। वैसे-वैसे लोगों के मन में इस वायरस के लिए डर भी फैलता जा रहा है। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जिसमें नर्सों का लोगों ने बहिष्कार किया है वहीं श्मशान घाट भी वायरस की वजह से मृत लोगों का अंतिम संस्कार करने से मना कर रहे है।

बता दे, राज्य स्वास्थ्य विभाग ने रीबाविरीन नाम के एंटी-वायरल ड्रग को मलेशिया से मंगवाया है ताकि निपाह से लड़ा जा सके। कोझीकोड के मेडिकल कॉलेज अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल में तीन मरीजों को यह ड्रग दिया जा रहा है।

राज्य में विभिन्न अस्पतालों में इस समय इस वायरस के लक्षणों वाले 23 लोग भर्ती हैं। वहीं जिन दो लोगों की पहचान वायरस से पीड़ित के तौर पर हुई थी उनकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। राज्य सरकार ने हालांकि केरला की यात्रा कर रहे लोगों के लिए स्वास्थ्य दिशा-निर्देश जारी किए हैं। लोगों को सलाह दी गई है कि वह कोझीकोड, मल्लपुरम, वायनाड और कन्नूर ना जाएं।

केंद्र सरकार ने भी लोगों के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए है। एडवाइजरी के मुताबिक जमीन पर पड़े हुए या पहले से खाए हुए फलों का सेवन ना करें। इस्तेमाल में ना लिए जा रहे कुओं के पानी का उपयोग न करें और ना ही उसके आस-पास जाएं। एडवाइजरी में केवल ताजे फल खाने की सलाह दी गई है।

सरकार का कहना है, 'बीमारी के कारण मारे गए लोगों के शवों का अंतिम संस्कार सरकारी परामर्श के अनुसार करना चाहिए और साथ ही ऐसे भावुक क्षण के दौरान बीमारी को परिवार के अन्य सदस्यों में फैलने से रोकने की कोशिश करनी होगी।'

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने निपाह को एक उभरती बीमारी करार दिया


केरल में निपाह वायरस से मौतों के बाद फैली दहशत के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने निपाह को एक उभरती बीमारी करार दे चुका है। WHO के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ की एक नस्ल में पाया जाता है। यह वायरस उनमें प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है। चमगादड़ जिस फल को खाते है, उनके अपशिष्ट जैसी चीजों के संपर्क में आने पर यह वायरस किसी भी अन्य जीव या इंसान को प्रभावित कर सकता है। ऐसा होने पर ये जानलेवा बीमारी का रूप ले लेता है। हाल ही में केरल में हुई रहस्यमयी मौतों का कारण 'निपाह वायरस (NiV)' को बताया गया है। नीपाह वायरस को लेकर दिल्ली-एनसीआर समेत जम्मू-कश्मीर, गोवा, राजस्थान, गुजरात और तेलंगाना में अलर्ट जारी कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने भी इस पर चिंता जाहिर करते हुए पैनिक नहीं होने की सलाह दी है।

हिमचल प्रदेश में मिले 18 मरे चमगादड़

अब हिमचल प्रदेश में 18 मरे हुये चमगादड़ मिलने से सनसनी मच गई है। बताया जा रहा है कि ये चमगादड़ बीते काफी सालों से यहां के पेड़ों पर रहते थे, ये कभी किसी को परेशान नहीं करते थे लेकिन अचानक बुधवार को यहां इनकी की मौत हो गई, जिसे देखकर लोग भयभीत हो गए।

मौके पर पहुंचे स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग और वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर सैंपल ले लिये हैं और जांच की जा रही है। जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संजय शर्मा ने बताया कि हर साल इस इलाके में चमगादड़ों की संख्या बढ़ जाती है लेकिन इस बार कुछ ज्यादा ही है। डॉक्टर शर्मा ने बताया कि स्कूल के अध्यापकों और छात्रों को इस बीमारी और बचाव के बारे में बता दिया गया है। किसी भी तरह के लक्षण पाये जाते हैं तो किसी लोगों से दूर रहे क्योंकि यह एक संक्रामक बीमारी है। वहीं स्कूल की प्रिसिंपल सुपर्णा भरद्वाज का कहना कि लोगों में दहशत है। जिस तरह से चमगादड़ों की मौत हुई है उनके डर को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है।