पश्चिम बंगाल में दो जूनियर डॉक्टरों पर हुए हिंसक हमले के बाद से छिड़ा आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। हिंसा के शिकार साथियों के प्रति समर्थन जताते हुए बंगाल के 700 सरकारी डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। इस मामले से निपटने को लेकर सरकार शुक्रवार को दिशाहीन नजर आई। गुरुवार को एसएसकेएम हॉस्पिटल का दौरा करने वाली ममता बनर्जी पूरी तरह शांत रहीं। इस बीच, ज्यादातर डॉक्टरों ने काम पर वापस लौटने के लिए सीएम ममता बनर्जी की ओर से माफी मांगे जाने की भी शर्त रखी है।
हड़ताल के समर्थन में दिल्ली, मुंबई से लेकर राजस्थान, केरल, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में डॉक्टर अब एकजुट नजर आ रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के एम्स समेत 14 बड़े अस्पतालों के जूनियर डॉक्टरों ने भी शनिवार को हड़ताल का एलान किया है। इसके अलावा जम्मू एंड कश्मीर डॉक्टर्स कोऑर्डिनेशन कमेटी ने भी हड़ताल करने का ऐलान किया है। जम्मू एंड कश्मीर डॉक्टर्स कोऑर्डिनेशन कमेटी के मुताबिक जम्मू-कश्मीर और लेह रीजन के सभी अस्पतालों में 15 जून को सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल रहेगी। पश्चिम बंगाल में पूरा हेल्थ सिस्टम चरमराया नजर आ रहा है।
10 हजार से ज्यादा डॉक्टर होंगे शामिलइस हड़ताल में 10 हजार से ज्यादा डॉक्टर शामिल हो रहे हैं। फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के बैनर तले इन सभी अस्पतालों के डॉक्टरों ने हड़ताल की पूर्व लिखित सूचना अपने मेडिकल सुपरिटेंडेंट को दे दी है। इन डॉक्टरों के हड़ताल में जाने से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से हिंदुस्तान के कई हिस्सों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई है। मरीजों में भी गुस्सा देखने को मिल रहा है।
आईएमए ने कहा है कि शुक्रवार से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन आज और रविवार को भी जारी रहेगा। इसमें डॉक्टर काले रंग के बिल्ले लगाएंगे और धरना देने के अलावा शांति मार्च निकालेंगे। दिल्ली में आज डॉक्टरों ने काम नहीं करने का फैसला किया है।
एम्स असोसिएशन का 2 दिन का अल्टिमेटमदिल्ली स्थित एम्स के डॉक्टरों की असोसिएशन ने भी ममता सरकार को दो दिन का अल्टिमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि यदि दो दिनों में पश्चिम बंगाल सरकार ने मांगें स्वीकार नहीं की तो फिर एम्स में भी अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
दिल्ली के इन अस्पतालों में हड़तालशनिवार को दिल्ली के जिन अस्पतालों के डॉक्टर हड़ताल पर शामिल रहेंगे, उनमें एम्स, सफदरजंग हॉस्पिटल, बाबा साहब अंबेडकर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, हिंदूराव हॉस्पिटल, बीएमएच दिल्ली, दीनदयाल उपाध्याय हॉस्पिटल, संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एंड एसोसिएटेड हॉस्पिटल्स, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज (इहबास), श्री दादा देव मातृ एवं शिशु चिकित्सालय, नॉर्दन रेलवे सेंट्रल हॉस्पिटल, ईएसआईसी हॉस्पिटल, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, गुरु तेग बहादुर हॉस्पिटल और गुरु गोविंद सिंह हॉस्पिटल समेत अन्य हॉस्पिटल शामिल हैं।
हालांकि शुक्रवार की शाम तक हालात कुछ बदलने लगे और तृणमूल के नेताओं के तेवर खासे नरम हो गए। मंत्री पार्थ चटर्जी और फिरहाद हाकिम ने डॉक्टरों के समर्थन में बयान देते हुए हिंसा की निंदा की। इसके साथ ही उन्होंने डॉक्टरों से काम पर वापस लौटने की भी गुहार लगाई।
डॉक्टरों ने ममता के बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरायाशुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों को राज्य सचिवालय में बैठक के लिये बुलाया जिसे डॉक्टरों ने यह कहते हुए ठुकरा दिया कि यह उनकी एकता को तोड़ने की एक चाल है। ममता ने सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में सामान्य सेवाओं को बाधित करने वाले गतिरोध का हल खोजने के लिए बैठक बुलाई थी।
क्या है पूरा मामलाआपको बता दें कि 10 जून को नील रत्न सरकार (NRS) मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान एक 75 वर्षीय मरीज की मौत हो गई थी। इससे गुस्साए परिजनों ने हॉस्पिटल में पहुंचकर डॉक्टरों को गालियां दी थी। इसके बाद डॉक्टरों ने माफी मांगने को कहा। उन्होंन कहा कि जब तक मृतक के परिजन हमसे माफी नहीं मांगते हैं, तब तक हम प्रमाण पत्र नहीं देंगे।
इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और हिंसक रूप ले लिया। डॉक्टरों द्वारा प्रमाण पत्र नहीं देने और माफी की मांग पर अड़ने के कुछ देर बाद हथियारों के साथ भीड़ ने हॉस्पिटल में हमला कर दिया, जिसमें दो जूनियर डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा कई और डॉक्टरों को चोटें आईं। इसके बाद जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए।
असल में डॉक्टरों का गुस्सा गुरुवार को ममता बनर्जी की ओर से दिए गए उस बयान के चलते भड़का, जिसमें उन्होंने कहा था कि डॉक्टर या तो 4 घंटे में काम पर लौटें या फिर ऐक्शन के लिए तैयार रहें। ममता की धमकी से बेपरवाह जूनियर डॉक्टरों ने अपने आंदोलन को तेज कर दिया और धीरे-धीरे तमाम सीनियर डॉक्टर्स भी उनके समर्थन में आ गए।
उसी दिन एनआरएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कॉलेज ऑफ मेडिसिन ऐंड सागर दत्त हॉस्पिटल के भी 21 सीनियर डॉक्टरों ने अपनी नौकरी छोड़ दी। शुक्रवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज के 107 डॉक्टरों ने अपने इस्तीफे के साथ एक बार फिर से विरोध को तेज कर दिया।
इसके बाद तो इस्तीफों का दौर ही चल पड़ा। आंदोलन को धार देते हुए मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल के 100 डॉक्टरों ने पद छोड़ दिया, जबकि एसएसकेएम के 175 डॉक्टरों ने भी इस्तीफा दे दिया। चितरंजन नैशनल मेडिकल कॉलेज के 16 डॉक्टरों ने पद छोड़ दिया।
इसके अलावा हिंसा का शिकार हुए डॉक्टरों के हॉस्पिटल एनआरएस मेडिकल कॉलेज के भी 100 चिकित्सकों ने अपनी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन के भी 33 छात्रों ने पद छोड़ दिया। कई विभागों के प्रमुखों ने भी डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा के विरोध में पद छोड़ दिया।