अजीत जोगी ने अपने करियर की शुरुआत मध्यप्रदेश में बतौर कलेक्टर की थी। इसी दौरान वह तत्कालीन प्रधाननमंत्री राजीव गांधी के संपर्क में आए थे और साल 1986 के आसपास वह कांग्रेस से जुड़ गए और नौकरशाही छोड़ सक्रिय राजनीति में आ गए थे।
साल 1986 से 1998 तक राज्यसभा के सदस्य रहे जोगी 1998 में रायगढ़ से लोकसभा सांसद चुने गए थे। साल 2000 में जब छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना तो वहां कांग्रेस का बहुमत था और कांग्रेस ने बिना देरी किए जोगी को मुख्यमंत्री बना दिया। वह 2003 तक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे।
एक समय में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का चेहरा माने जाने वाले अजित जोगी ने साल 2016 में कांग्रेस से बगावत करते हुए अपनी अलग पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का गठन किया। साल 2018 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हराने के लिए जोगी ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से हाथ मिलाया। हालांकि, उनके गठबंधन को महज सात सीटें मिली थीं।
BJP का साथ देने से अच्छा है सूली पर चढ़ जाना : अजीत जोगी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अजीत जोगी ने नवंबर 2018 में कहा था कि जरूरत पड़ने पर वह भाजपा से समर्थन लेने या देने के बारे में सोच सकते हैं, लेकिन मायावती ने कहा कि विपक्ष में बैठना मंजूर पर भाजपा का साथ देना नहीं। उसके बाद पार्टी मुख्यालय पर आठ धर्मग्रंथों की शपथ खाकर जोगी ने कहा कि सूली पर चढ़ना पसंद करुंगा पर भाजपा को समर्थन देना नहीं। माना गया कि मायावती का रुख देख जोगी ने यू-टर्न लिया है।बता दे, गंभीर दुर्घटना में पैरों से लाचार होने के बाद भी जोगी जिवटता के साथ राजनीति के मैदान में डटे रहे। अजीत जोगी के जीवन पर लिखी पुस्तक 'अजीत जोगी: अनकही कहानी में कई अहम बातों का जिक्र है। इस किताब को अजीत जोगी की पत्नी डॉ. रेणु जोगी ने लिखा।नेत्र चिकित्सक से विधायक तक का सफर तय करने वाली रेणु जोगी कहती हैं कि अपने 40 वर्ष के वैवाहिक जीवन के उतार-चढ़ाव आदि के सफर को उन्होंने इस पुस्तक में समाहित करने का प्रयास किया है। अजीत जोगी के प्रशासनिक अनुभव (कलेक्टर के रूप में) व राजनीतिक क्षमता का भी जिक्र है। पुस्तक में जीरम घाटी नरसंहार, जग्गी हत्याकांड, जर्सी गाय प्रकरण, जूदेव प्रकरण, जाति प्रकरण व जकांछ स्थापना आदि का जिक्र है।