कभी उदयपुर में मिलावटी केरोसिन बेचने वाला धीरज उर्फ भंवर पानेरी फरारी काटते-काटते 7 साल में उज्जैन का बड़ा बिजनेसमैन बन गया। भंवर 15 साल पुराने अवैध केरोसिन और 2.50 लाख रुपए के चेक अनादरण के मामले में 2013 में उदयपुर से फरार हो गया। इसके बाद उसने अपना नाम भंवर से बदलकर धीरज कर लिया और उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास रूद्राक्ष का कोरोबार करने लगा। अब उज्जैन के मुख्य बाजार में उसकी दो दुकानें हैं।
रहने के लिए एक फ्लैट भी है। धीरज अब तक महाकाल मंदिर में एक करोड़ से ज्यादा का दान दे चुका है। हिरण मगरी पुलिस धीरज को रविवार को गिरफ्तार कर उदयपुर लाई। कोर्ट में पेश कर उसे जेल भेजा दिया गया। गौरतलब है कि धीरज उदयपुर के हिस्ट्रीशीटर नरेंद्र पानेरी का भाई है। धीरज को गिरफ्तार करने वाले कांस्टेबल रामजी लाल ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि धीरज उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास रह रहा है। उज्जैन पहुंचकर उसकी दुकान का पता निकाला।आसपास के दुकानदारों से पूछताछ कर उसके दुकान आने-जाने के बारे में जानकारी जुटाई। अगले दिन उसे दबोचने का प्लान बनाया। वह हमेशा सुबह 6 बजे दुकान पर आ जाता था, इसलिए मैं 6 बजे से पहले ही वहां पहुंच गया। लेकिन वह 10 बजे तक नहीं आया। इसके बाद उसके घर का पता निकाला, जो मंदिर से करीब 10 किमी दूर था। वहां पहुंचकर उसे हिरासत में लिया और उदयपुर के लिए रवाना हुआ।