स्वराज इंडिया के प्रमुख और राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन को लेकर स्पष्ट किया है कि फिलहाल इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस्तीफा या सत्ता परिवर्तन नहीं है। उन्होंने आंदोलन में शामिल लोगों और इसे समर्थन देने वालों से अपील की कि इसकी मांग को निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने तक सीमित रखा जाना चाहिए। यादव ने आशंका जताई कि उनकी इस राय के कारण उन्हें आलोचना और गालियों का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि किसी भी जनआंदोलन की सफलता उसके नेतृत्व की निजी इच्छा पर नहीं, बल्कि उसमें शामिल लोगों की साझा मांग पर निर्भर करती है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन में कॉकरोच जनता पार्टी सहित अन्य संगठनों के साथ नजर आ रहे योगेंद्र यादव ने कहा कि इस आंदोलन को समर्थन देने वाले आम लोग अभी मोदी सरकार के इस्तीफे या सत्ता परिवर्तन की मांग नहीं कर रहे हैं। उनके मुताबिक, आंदोलन से जुड़े हजारों लोग, इसे समर्थन देने वाले लाखों लोग और इसके प्रति थोड़ी सहानुभूति रखने वाले करोड़ों लोग फिलहाल एक बुनियादी मांग चाहते हैं- निष्पक्ष चुनाव।
वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम को दिए इंटरव्यू में यादव ने कहा कि आंदोलन के मंच से मोदी सरकार के इस्तीफे की मांग करना फिलहाल उचित नहीं होगा, क्योंकि यह आंदोलन में शामिल लोगों की न्यूनतम साझा मांग नहीं है। उन्होंने कहा, “इस आंदोलन के माध्यम से यह मांग करना कि मोदी सरकार इस्तीफा दे, यह अभी इस आंदोलन की मांग नहीं हो सकती है।”
उन्होंने आगे कहा कि आंदोलन से जुड़े लोगों की मांग को उसी सीमा तक रखना चाहिए, जिस पर व्यापक सहमति मौजूद है। यादव ने अपनी बात रखते हुए कहा, “मैं जानता हूं कि यह कहने के बाद बहुत गालियां पड़ेंगी, क्योंकि इस देश में असहमति की भाषा तो हमें आती नहीं है। मूल्यांकन की असहमति हम कर नहीं सकते हैं तो गाली की भाषा हमारे देश में उपलब्ध है। लेकिन मेरी जिम्मेदारी बनती है कि मैं इस गंभीर बात को लोगों के सामने रखूं।”
'रेजीम चेंज' की मांग से आंदोलन का लक्ष्य नहीं बदलना चाहिएयोगेंद्र यादव से जब आंदोलन में 'रेजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन की मांग उठाए जाने और इससे आंदोलन को होने वाले संभावित नुकसान के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि इस शब्द का इस्तेमाल करना अपने आप में कोई अपराध नहीं है। हालांकि, उनके मुताबिक, मौजूदा आंदोलन का तात्कालिक उद्देश्य सत्ता परिवर्तन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक समझ के अनुसार, इस आंदोलन की प्राथमिकता चुनावी सुधार की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। यादव ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन अपने आप में सकारात्मक बात है, लेकिन वर्तमान आंदोलन का लक्ष्य वह नहीं है।
उन्होंने इंटरव्यू में कहा, “मेरे विचार से यह जो आंदोलन है उसका तात्कालिक लक्ष्य या मांग रेजीम चेंज नहीं है, नहीं होनी चाहिए। लोकतांत्रिक अर्थ में भी जो बिल्कुल सकारात्मक है, लोकतंत्र के माध्यम से सत्ता परिवर्तन। मैं समझता हूं कि यह आंदोलन सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं है। यह आंदोलन चुनावी सुधार ही नहीं फ्री एंड फेयर चुनाव सुनिश्चित करने के लिए है।”
यादव ने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर अपनी राय रखने के बाद कुछ लोग नाराज हो गए थे। उन्होंने देश में राजनीतिक असहमति को लेकर बन रहे माहौल पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी की बात या भाषा से सहमत नहीं है, तो उसे सीधे आरएसएस का दलाल करार देने की प्रवृत्ति ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा, “हमारे देश में राजनीतिक समझदारी की ऐसी अवस्था आ गई है कि तुम मेरी भाषा को मेरे शब्द में नहीं बोलेगे तो तुम आरएसएस के दलाल हो। मैंने पहले भी कहा तो गालियां पड़ीं और फिर जोखिम लेकर कह रहा हूं।”
जनआंदोलन में नेतृत्व की इच्छा से ज्यादा अहम लोगों की साझा मांगयोगेंद्र यादव ने समझाया कि किसी जनआंदोलन का लक्ष्य तय करते समय यह देखना जरूरी है कि उसमें शामिल अलग-अलग विचारधाराओं और राजनीतिक पृष्ठभूमियों के लोगों की साझा मांग क्या है। उन्होंने इसके लिए गणित के 'एलसीएम' यानी लघुत्तम समापवर्त्य का उदाहरण दिया और कहा कि आंदोलन को सभी प्रतिभागियों की न्यूनतम साझा राय के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने बताया कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन में अलग-अलग विचार रखने वाले लोग शामिल हैं। इनमें उनके जैसे लोग भी हैं, जो मोदी सरकार के घोर आलोचक रहे हैं। वहीं, विपक्षी दलों से जुड़े ऐसे लोग भी हैं, जिनकी इच्छा भविष्य में नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाकर खुद सरकार बनाने की हो सकती है। इसके अलावा आंदोलन में ऐसे क्रांतिकारी विचारों वाले लोग भी शामिल हैं, जो पूरी पूंजीवादी व्यवस्था को उखाड़ फेंकना चाहते हैं।
यादव ने कहा कि आंदोलन में ऐसे लोग भी हैं, जिनकी इन तीनों में से कोई इच्छा नहीं है। संभव है कि इनमें से कुछ लोगों ने या उनके माता-पिता ने पहले नरेंद्र मोदी को वोट दिया हो। इसके बावजूद वे चुनाव में कथित हेराफेरी के खिलाफ हैं और चाहते हैं कि ऐसी स्थिति स्वीकार न की जाए।
उन्होंने कहा, “ये जो लोग हैं इनकी जो भावना है वह इस आंदोलन का केंद्रीय मंतव्य होना चाहिए। मेरी इच्छा उससे 50 गुना ज्यादा फालतू हो सकती है उससे क्या फर्क पड़ता है।” यादव की दलील का मुख्य आधार यही था कि आंदोलन में शामिल किसी नेता की निजी राजनीतिक इच्छा को सभी प्रतिभागियों की मांग नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, आंदोलन की दिशा तय करते समय उस साझा उद्देश्य को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जिस पर अलग-अलग विचारधाराओं और राजनीतिक पसंद वाले लोग एकमत हैं।
'रेजीम चेंज' के दो अर्थ, सत्ता परिवर्तन और तख्तापलट में अंतर'रेजीम चेंज' शब्द को लेकर अपनी बात स्पष्ट करते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि इसके दो अलग-अलग अर्थ हो सकते हैं। एक अर्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए सत्ता परिवर्तन है, जबकि दूसरे अर्थ में इसका इस्तेमाल तख्तापलट के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि दोनों स्थितियों के बीच अंतर समझना जरूरी है। यादव के मुताबिक, 1977 में हुए राजनीतिक बदलाव को भी 'रेजीम चेंज' कहा गया था और इस पर खुलकर चर्चा हुई थी। इसी तरह, 2014 में चुनाव के जरिए सत्ता परिवर्तन हुआ। उन्होंने कहा कि यदि आज विपक्ष लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन चाहता है, तो इसमें कुछ भी गलत, गैरकानूनी, खतरनाक या बगावती नहीं है।
उन्होंने कहा, “रेजीम चेंज की बात करना कोई गुनाह नहीं क्योंकि इसके दो अर्थ होता है। इसका एक अर्थ होता है सत्ता परिवर्तन और एक कभी-कभी होता है तख्तापलट। 1977 में जो हुआ उसे रेजीम चेंज कहा गया उसको लेकर खुलकर चर्चा हुई। 2014 में चुनाव के जरिए रेजीम चेंज हुआ। आज यदि विपक्ष रेजीम चेंज चाहता है तो इसमें कुछ भी गलत, गैर कानूनी, खतरनाक या बगावती नहीं है।”
हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि इसी शब्द का दूसरा अर्थ तख्तापलट भी होता है। उन्होंने श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि इस संदर्भ में बात तब अलग हो जाती है, जब कोई चुनाव के बजाय सड़क के जरिए सरकार गिराने की बात करता है।
यादव ने स्पष्ट किया कि उनके मुताबिक, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन में किसी ने इस तरह की मांग नहीं की है। उन्होंने कहा कि प्रशांत भूषण ने भी ऐसी कोई बात नहीं कही और कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट किया है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति हिंसा की बात करे और चुनाव के बिना सड़क पर आंदोलन के जरिए सत्ता परिवर्तन कराने की मांग करे, तो वह अलग स्थिति होगी। लेकिन उनके अनुसार, प्रशांत भूषण ने ऐसा कुछ नहीं कहा है। योगेंद्र यादव ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर कही गई बातों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs):Q1. योगेंद्र यादव ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन को लेकर क्या कहा?योगेंद्र यादव ने कहा कि आंदोलन की मौजूदा मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस्तीफा या सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है।
Q2. योगेंद्र यादव के अनुसार, आंदोलन की मांग क्या होनी चाहिए?उनके मुताबिक, आंदोलन की मांग उन मुद्दों तक सीमित रहनी चाहिए, जिन पर इसमें शामिल लोगों और इसे समर्थन देने वालों की व्यापक सहमति है। उन्होंने निष्पक्ष चुनाव को इसकी केंद्रीय मांग बताया।
Q3. योगेंद्र यादव ने 'रेजीम चेंज' के बारे में क्या कहा?उन्होंने कहा कि 'रेजीम चेंज' का अर्थ लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन भी हो सकता है और तख्तापलट भी। उनके अनुसार, चुनाव के जरिए सत्ता परिवर्तन की मांग अपने आप में गलत या गैरकानूनी नहीं है।
Q4. योगेंद्र यादव ने जनआंदोलन की सफलता के लिए किस बात को अहम बताया?उन्होंने कहा कि जनआंदोलन की दिशा नेतृत्व की निजी इच्छा से नहीं, बल्कि उसमें शामिल लोगों की न्यूनतम साझा राय से तय होनी चाहिए।
Q5. योगेंद्र यादव ने प्रशांत भूषण और कांग्रेस को लेकर क्या कहा?यादव ने कहा कि प्रशांत भूषण ने चुनाव के बिना सड़क के जरिए सत्ता का तख्तापलट करने जैसी कोई बात नहीं कही। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने अपना रुख स्पष्ट किया है और भाजपा पर बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया।