महिला आरक्षण को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी मुद्दे पर महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर महिला आरक्षण कानून 2024 में लागू कर दिया गया होता, तो आज लोकसभा में लगभग 180 महिलाएं सांसद के रूप में बैठी होतीं।
अलका लांबा ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण विधेयक को संसद में सर्वसम्मति से पारित किया गया था, जिसमें विपक्ष ने भी समर्थन दिया था। इसके बावजूद अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। उनका आरोप है कि सरकार ने करीब 30 महीने तक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया, जो महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय है।
सीट बढ़ाने की शर्त पर आरक्षण क्यों?लांबा ने केंद्र सरकार की रणनीति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर महिला आरक्षण को लागू करने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की शर्त क्यों रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा 545 सीटों पर ही महिलाओं को आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता। उनके मुताबिक यह प्रक्रिया जानबूझकर टालने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि आगामी मानसून सत्र में महिला कांग्रेस सरकार पर दबाव बनाने के लिए पूरी तैयारी में है। साथ ही, देशभर में जनजागरूकता अभियान चलाकर इस मुद्दे को और तेज किया जाएगा ताकि सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए मजबूर किया जा सके।
विशेष सत्र और नोटिफिकेशन पर सवालअलका लांबा ने यह भी दावा किया कि जब संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था, तब 16 अप्रैल को सरकार ने मजबूरी में नोटिफिकेशन जारी किया। उनका कहना है कि यदि 2023 में ही कानून लागू कर दिया जाता, तो 2024 के लोकसभा चुनाव में मौजूदा 543 सीटों पर ही एक-तिहाई आरक्षण लागू हो जाता और आज करीब 180 महिलाएं संसद में निर्वाचित होकर पहुंच चुकी होतीं।
महिला कांग्रेस का देशव्यापी अभियानमहिला कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर 33 प्रतिशत आरक्षण को महिलाओं का मौलिक अधिकार बताया है। पार्टी का कहना है कि आने वाले मानसून सत्र में केंद्र सरकार पर दबाव बनाकर इस कानून को जल्द से जल्द लागू करवाने की मांग की जाएगी।
अलका लांबा ने केंद्र सरकार को “महिला विरोधी सोच” वाला बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर देशभर में हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही पोस्टकार्ड अभियान भी चलाया जाएगा, जिसमें दो प्रमुख मांगें शामिल होंगी—पहली, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को तुरंत लागू करना और दूसरी, ओबीसी महिलाओं को आरक्षण में उचित प्रतिनिधित्व देना।
उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान में जुटाए गए हस्ताक्षरों का रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपा जाएगा, ताकि सरकार पर जल्द कानून लागू करने का दबाव बनाया जा सके।