आज से बदला UPI पेमेंट सिस्टम, डबल सिक्योरिटी हुई लागू, जानिए कैसे काम करेगा नया तरीका

नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही डिजिटल पेमेंट के तरीके में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। अब यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए लेनदेन करने वाले यूजर्स को पहले से ज्यादा सुरक्षा मिलेगी। भारतीय रिजर्व बैंक के नए दिशा-निर्देशों के तहत आज से यूपीआई ट्रांजेक्शन में डबल सिक्योरिटी सिस्टम यानी टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) को अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब केवल यूपीआई पिन डालकर पेमेंट पूरा नहीं होगा, बल्कि एक अतिरिक्त सत्यापन प्रक्रिया भी जरूरी होगी।

अब तक ज्यादातर यूजर्स QR कोड स्कैन करने के बाद केवल 4 या 6 अंकों का पिन डालकर आसानी से भुगतान कर लेते थे। लेकिन नए नियम लागू होने के बाद इस प्रक्रिया में एक और सुरक्षा स्तर जोड़ दिया गया है। अब पिन दर्ज करने के बाद यूजर को OTP, फिंगरप्रिंट या फेस ऑथेंटिकेशन में से किसी एक माध्यम से अपनी पहचान की पुष्टि करनी होगी। इसके बाद ही ट्रांजेक्शन सफल माना जाएगा। इस बदलाव से पेमेंट में कुछ सेकंड का अतिरिक्त समय जरूर लगेगा, लेकिन इससे सुरक्षा का स्तर काफी मजबूत हो जाएगा।

2 फैक्टर ऑथेंटिकेशन का काम करने का तरीका भी बेहद आसान रखा गया है। सबसे पहले यूजर को पहले की तरह QR कोड स्कैन करना होगा या रिसीवर का यूपीआई आईडी डालना होगा। इसके बाद पिन एंटर करने के बाद सिस्टम दूसरी लेयर के तौर पर OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की मांग करेगा। अगर OTP का विकल्प आता है, तो वह रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा, जिसे डालना जरूरी होगा। वहीं कई मामलों में फिंगरप्रिंट या फेस स्कैन के जरिए भी यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि हर ट्रांजेक्शन में सभी विकल्प नहीं आएंगे, बल्कि पिन के बाद किसी एक माध्यम से 2FA पूरा करना होगा।
इस नई व्यवस्था के पीछे सबसे बड़ा कारण बढ़ते साइबर फ्रॉड और डिजिटल ठगी के मामलों को रोकना है। हाल के समय में ठगों ने केवल पिन या ओटीपी के आधार पर होने वाले ट्रांजेक्शन में भी सेंध लगानी शुरू कर दी थी, जिससे कई यूजर्स को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे में डबल सिक्योरिटी लेयर लागू करके यूजर्स के बैंक खातों को ज्यादा सुरक्षित बनाने की कोशिश की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है, जो ऑनलाइन भुगतान को न सिर्फ सुरक्षित बल्कि अधिक विश्वसनीय भी बनाएगा। हालांकि शुरुआती दिनों में यूजर्स को इस नए सिस्टम के साथ तालमेल बैठाने में थोड़ी असुविधा हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह बदलाव उनके लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।