हिंदुत्ववादी इंफ्लुएंसर और यूट्यूबर स्वतंत्र भारद्वाज को एक ही दिन में अदालत से दो मोर्चों पर राहत नहीं मिल सकी। गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में दायर उनकी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी गई। वहीं, मारपीट से जुड़े मामले में अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाकर 21 सितंबर तक कर दी है।
स्वतंत्र भारद्वाज को एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। हाई कोर्ट में उनकी ओर से गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने की मांग की गई थी। जस्टिस नवीन चावला और रविंद्र डुडेजा की बेंच ने याचिका पर सुनवाई के बाद इसे खारिज कर दिया।
इससे पहले सोमवार सुबह चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की बेंच ने मामले पर तत्काल सुनवाई के लिए सहमति दी थी। भारद्वाज की ओर से अधिवक्ता उमेश शर्मा ने अदालत में कहा था कि वह पिछले तीन दिनों से हिरासत में हैं और बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को उसी दिन सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था।
मारपीट के मामले में 21 सितंबर तक हिरासतदूसरी ओर, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललर की अदालत ने मारपीट के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी। उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के सामने पेश किया गया था। अदालत ने अब उनकी हिरासत 21 सितंबर तक कर दी है।
भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया था। उन पर एक दलित यूट्यूबर के पिता के साथ मारपीट करने का आरोप है। इससे पहले रविवार को उन्हें ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने ऑनलाइन पेश किया गया था, जहां से उन्हें एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
वीडियो के बाद फिर चर्चा में आया मारपीट का मामलापुलिस के मुताबिक, करीब दो महीने पहले हुई मारपीट की घटना से जुड़ा मामला एक वीडियो सामने आने के बाद फिर चर्चा में आया। सीजेपी आंदोलन के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज और एक दलित व्यक्ति के बीच कथित मारपीट हुई थी।
भारद्वाज ने हाल में एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में मारपीट की बात कही थी। उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने सामने वाले व्यक्ति का सिर फोड़ दिया था और उसे सात टांके लगे थे। इंटरव्यू में उन्होंने इस घटना को धारा 307 से जोड़ते हुए भी टिप्पणी की थी।
इसके बाद सीजेपी और विपक्षी दलों के नेताओं ने संसद मार्ग थाने के बाहर धरना दिया और पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बनाया। इसके बाद पुलिस ने भारद्वाज के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया।
नाबालिग की शिकायत पर पॉक्सो एक्ट में नया मामलाइस मामले में पुलिस ने शुक्रवार को एक नाबालिग छात्रा की शिकायत के आधार पर पॉक्सो एक्ट के तहत नई शिकायत दर्ज की। शिकायत में ऑनलाइन धमकियों और उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस ने प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(3), धारा 78 और धारा 79 के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 भी जोड़ी है। धारा 78 पीछा करने से जुड़ी है, जबकि धारा 79 महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कृत्यों से संबंधित है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि अपने पिता पर हुए कथित हमले के खिलाफ आवाज उठाने और पुलिस में शिकायत करने के बाद उसे दुष्कर्म की धमकियां दी गईं। इसके अलावा उसके खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने और छेड़छाड़ कर तैयार की गई तस्वीरें भेजने का भी आरोप लगाया गया है।
इस तरह स्वतंत्र भारद्वाज को फिलहाल हाई कोर्ट से गिरफ्तारी के खिलाफ राहत नहीं मिली है और मारपीट से जुड़े मामले में उनकी न्यायिक हिरासत 21 सितंबर तक जारी रहेगी।