मोदी के पुराने ट्वीट से थरूर का वार, दिल्ली के हालात पर बोले- युवाओं को लोकतंत्र चाहिए, ‘अघोषित इमरजेंसी’ नहीं

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पुराने ट्वीट को साझा कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। थरूर ने 25 जून 2015 के मोदी के पोस्ट का हवाला देते हुए मौजूदा हालात पर तंज कसा और कहा कि आज के युवाओं को भी वही बातें सीखने का मौका मिल रहा है, जिनका जिक्र प्रधानमंत्री ने इमरजेंसी-विरोधी आंदोलन के संदर्भ में किया था। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और राजधानी में लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर थरूर पहले ही सरकार की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने मौजूदा हालात को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि Gen Z को 'अघोषित इमरजेंसी' से बेहतर स्थिति मिलनी चाहिए। उनके बयान में खास तौर पर युवाओं के विरोध करने के अधिकार, चुनावों की निष्पक्षता और सरकार की जवाबदेही का मुद्दा प्रमुख रहा।

PM मोदी के पुराने ट्वीट को साझा कर थरूर का तंज

शशि थरूर ने शनिवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 25 जून 2015 का ट्वीट साझा किया। इस पोस्ट में मोदी ने इमरजेंसी की यादों का जिक्र करते हुए लिखा था कि युवा रहते हुए उन्होंने इमरजेंसी-विरोधी आंदोलन के दौरान बहुत कुछ सीखा था। प्रधानमंत्री के इसी पुराने बयान को मौजूदा परिस्थितियों से जोड़ते हुए थरूर ने लिखा, आज के युवाओं को वही सब बातें सिखाने के लिए धन्यवाद, मोदी जी। कांग्रेस सांसद की यह टिप्पणी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की सख्ती और विरोध प्रदर्शनों पर लगाए गए प्रतिबंधों के संदर्भ में थी। थरूर ने अपने संदेश के जरिए मौजूदा हालात और प्रधानमंत्री के पुराने विचारों के बीच तुलना पेश की। उनका तंज ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन और उसके दौरान की गई पुलिस कार्रवाई राजनीतिक बहस का विषय बनी हुई है।

दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर थरूर ने उठाए सवाल


इससे पहले दिन में शशि थरूर ने राजधानी में लगाए गए प्रतिबंधों और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सरकार की आलोचना की थी। तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद ने बताया कि वह रात दो बजे के बाद दिल्ली लौटे थे और उन्होंने राजधानी में इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था पहले कभी नहीं देखी थी। थरूर ने दिल्ली के हालात को युद्ध जैसी तैनाती से जोड़ते हुए कई व्यवस्थाओं का उल्लेख किया। इनमें चेकपॉइंट, कंक्रीट के बैरिकेड, स्पाइक स्ट्रिप और 22,000 पुलिसकर्मियों तथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती शामिल थी। उन्होंने ट्रेन सेवाएं रद्द किए जाने और युवाओं को हिरासत में लिए जाने की खबरों का भी जिक्र किया। कांग्रेस सांसद ने राजधानी के बीचों-बीच इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने और जंतर-मंतर जाने पर रोक को लेकर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, नागरिकों को सवाल पूछने से रोकने के बजाय सरकार को चुनावों की निष्पक्षता से संबंधित सवालों का जवाब देना चाहिए।
'जवाब देना चाहिए, लाठियां नहीं', सरकार से थरूर की मांग

शशि थरूर ने विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोगों को अपनी बात रखने की आजादी मिलनी चाहिए, न कि उनकी आवाज दबाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा, सरकार को जवाब देना चाहिए, लाठियां नहीं और अपनी बात कहने की आजादी देनी चाहिए, उसे दबाना नहीं चाहिए। थरूर ने यह भी कहा कि सड़कों पर बैरिकेड लगाने से चुनाव आयोग के प्रति जनता का भरोसा बहाल नहीं होगा। उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर था कि चुनावों की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। कांग्रेस सांसद ने मौजूदा परिस्थितियों को युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए 'अघोषित इमरजेंसी' का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि Gen Z को इससे बेहतर स्थिति मिलनी चाहिए। हालांकि, यह शब्दावली थरूर की राजनीतिक टिप्पणी का हिस्सा है, न कि किसी औपचारिक सरकारी घोषणा का।

प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस और BJP के आरोप आमने-सामने

दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए हैं। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर लोकतांत्रिक असहमति को दबाने का आरोप लगाया है। वहीं, BJP ने प्रदर्शन के आयोजकों पर देश को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। इस तरह मामले में दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। एक ओर विपक्ष प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई और प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर BJP ने प्रदर्शन के आयोजकों की मंशा पर आरोप लगाए हैं।

हिरासत में लिए गए लोगों को लेकर दिल्ली पुलिस ने क्या बताया?

दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि CJP नेताओं को छोड़कर हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, CJP नेताओं के मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। इसी बीच, मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट रविवार को अवमानना याचिका पर सुनवाई करेगा। इस घटनाक्रम के बीच दिल्ली में प्रदर्शन, सुरक्षा व्यवस्था और नागरिकों के विरोध के अधिकार को लेकर बहस जारी है। शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने ट्वीट को साझा करके मौजूदा परिस्थितियों पर अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया दी है। उनके बयान में चुनावी निष्पक्षता, युवाओं की आवाज और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दे केंद्र में रहे।