कांग्रेस पार्टी और वरिष्ठ सांसद शशि थरूर के बीच रिश्ते अब दिन-ब-दिन और तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। कभी प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की तारीफ करके चर्चा में रहने वाले थरूर, अब एक नए लेख को लेकर पार्टी के भीतर फिर से निशाने पर हैं। दरअसल, मलयालम भाषा की एक प्रमुख पत्रिका में लिखे अपने आर्टिकल में थरूर ने 1975 की इमरजेंसी के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी की खुलकर आलोचना की है। इस साहसिक लेख के बाद कांग्रेस के ही एक और सांसद मणिकम टैगोर ने थरूर पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें भाजपा की लाइन पर चलने वाला करार दिया।
क्या अब आप भी पक्षी तोता बन गए हैं?मणिकम टैगोर ने अपने साथी सांसद को आड़े हाथों लेते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जब कोई सहयोगी भाजपा की बातें हू-ब-हू दोहराने लगे, तो क्या उसे तोता कहा जाए? नकल पक्षियों में अच्छी लगती है, लेकिन राजनीति में नहीं।” उनके इस कटाक्ष ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। ये बयान कहीं न कहीं यह भी दर्शाता है कि पार्टी में थरूर के बयानों को लेकर बेचैनी बढ़ती जा रही है।
थरूर ने क्या कहा था इमरजेंसी पर?अपने लेख में थरूर ने इंदिरा गांधी और संजय गांधी द्वारा लगाए गए इमरजेंसी के फैसले को न सिर्फ कठोर, बल्कि अमानवीय बताया। उन्होंने लिखा, “संजय गांधी का नसबंदी अभियान निर्दयता की मिसाल बना। पिछड़े इलाकों में जबरदस्ती लक्ष्य पूरे करने के लिए हिंसा और भय का सहारा लिया गया। वहीं, दिल्ली जैसे शहरों में झुग्गियों को बुलडोजर से रौंद दिया गया, जिससे हजारों लोग बेघर हो गए।”
थरूर की चिड़िया वाली बात पर आया 'तोता' वाला तंजथरूर की यह टिप्पणी उस वक्त आई है जब उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था, “एक चिड़िया के लिए सबसे अच्छा खुला आकाश होता है। उड़ने के लिए अनुमति मत मांगो।” माना जा रहा है कि कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर का ‘तोता’ वाला तंज इसी ट्वीट पर पलटवार था।
पहलगाम हमले पर भी दिया था अलग सुरगौरतलब है कि शशि थरूर पहले भी पहलगाम आतंकी हमले के बाद पीएम मोदी की नीति का समर्थन करते दिखे थे। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जब थरूर के बयानों पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा था, “कांग्रेस हमेशा ‘देश पहले’ के सिद्धांत पर काम करती है। लेकिन कुछ लोगों के लिए शायद ‘मोदी पहले और देश बाद में’ हो गया है।”