देश में ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कांग्रेस और विपक्षी दलों पर बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करके सरकार बदलने की कोशिश करने के आरोप के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर हमला और तेज कर दिया है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया है कि विपक्ष देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए सरकार और उसकी नीतियों पर सवाल उठाए हैं। इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल यह है कि ‘रिजीम चेंज’ से आशय लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बदलने की मांग से है या, जैसा कि बीजेपी आरोप लगा रही है, अराजकता के जरिए सत्ता हासिल करने की कोशिश से। अलग-अलग राजनीतिक नेताओं के बयान के बाद सत्ता परिवर्तन और विरोध प्रदर्शनों को लेकर बहस तेज हो गई है।
कपिल सिब्बल बोले- सत्ता परिवर्तन कांग्रेस नहीं, जनता चाहती हैराज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन की मांग कांग्रेस की नहीं, बल्कि जनता की है। उन्होंने कहा कि अब इस सरकार के जाने का समय आ गया है। अपने बयान में सिब्बल ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का भी जिक्र किया। सिब्बल ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है। अगर लोगों को लगता है कि सरकार की नीतियां गलत हैं और संसद में उनकी बात नहीं सुनी जा रही है, तो उन्हें अपना विरोध दर्ज कराने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने जंतर-मंतर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों में से एक है। ऐसे में अगर लोग बिना हथियार के शांतिपूर्वक खड़े होकर नारे लगाते हैं, तो इस पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए? कपिल सिब्बल ने अपने तर्क के समर्थन में संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा करने का अधिकार देता है। सिब्बल ने आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती कि लोग सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों के माध्यम से अपनी बात रखें। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस पर टिप्पणी करते हुए सिब्बल ने कहा कि वह अदालत में विचाराधीन मामले पर चर्चा नहीं करेंगे, क्योंकि इस विषय में फैसला न्यायालय को करना है।
पवन खेड़ा ने सरकार और आरएसएस पर उठाए सवालकांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने भी ‘रिजीम चेंज’ को लेकर चल रही बहस में सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार अतीत और भविष्य की बातें तो करती है, लेकिन देश के लोकतंत्र और संविधान से जुड़े सवालों पर चर्चा करना जरूरी है। खेड़ा के मुताबिक, कांग्रेस और लोकतांत्रिक विचारों से जुड़े लोगों का उद्देश्य संघ और संघ जैसे संगठनों का भारतीयकरण करना था। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि इसके उलट आरएसएस ने पूरे देश का ‘संघीकरण’ कर दिया। खेड़ा ने दावा किया कि विश्वविद्यालयों, चुनाव आयोग और नौकरशाही समेत कई संस्थानों में आरएसएस का प्रभाव बढ़ा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि जब कोई गैर-पंजीकृत संगठन पूरे सिस्टम पर कब्जा जमाने की कोशिश करता है, तो विपक्ष चुप नहीं बैठ सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाता रहेगा। उनके बयान में ‘रिजीम चेंज’ का आशय व्यवस्था में बदलाव से जुड़ा बताया गया, जबकि बीजेपी इस शब्दावली को देश में अराजकता के जरिए सत्ता हासिल करने की कोशिश के तौर पर पेश कर रही है।
राजनाथ सिंह ने 16 अक्टूबर को क्या कहा था?‘रिजीम चेंज’ को लेकर शुरू हुआ विवाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के 16 अक्टूबर को लखनऊ में दिए गए बयान के बाद तेज हुआ। उन्होंने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि वे बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करके भारत में सत्ता परिवर्तन करना चाहते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा था कि विपक्ष ‘रिजीम चेंज’ के नाम पर जबरन या अराजकता के रास्ते सत्ता बदलने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि विपक्ष अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए युवाओं का इस्तेमाल कर रहा है। रक्षा मंत्री के इस बयान के बाद बीजेपी के अन्य नेताओं ने भी विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए और इसे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा स्थिरता से जुड़ा मुद्दा बताया।
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्ष पर लगाए आरोपबीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार, ‘सत्ता परिवर्तन’ जैसे शब्द विपक्ष की मंशा को उजागर करते हैं।
नितिन नवीन ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई चुनाव सुधार या युवाओं के भविष्य के लिए नहीं, बल्कि देश में अराजकता फैलाकर सत्ता हासिल करने के लिए है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में सत्ता हासिल करने का रास्ता जनता के जनादेश से होकर गुजरता है, न कि अराजकता के जरिए। बीजेपी अध्यक्ष ने यह भी कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। उनके बयान से स्पष्ट है कि बीजेपी इस मुद्दे को केवल सरकार बदलने की मांग के तौर पर नहीं, बल्कि देश की स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े सवाल के रूप में उठा रही है।
सुधांशु त्रिवेदी ने भी विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाएबीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी ‘रिजीम चेंज’ से जुड़ी टिप्पणी को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की शब्दावली का इस्तेमाल देश में अशांति पैदा करने की कोशिशों की ओर इशारा करता है। त्रिवेदी ने त्योहारों के दौरान मध्य दिल्ली में प्रदर्शन आयोजित किए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रदर्शनों का उद्देश्य देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना हो सकता है। इस तरह बीजेपी के नेताओं ने विरोध प्रदर्शनों के समय और उनके उद्देश्य को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
देवेंद्र फडणवीस बोले- संविधान के रहते चुनाव से ही बदलेगी सरकारमहाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी ‘रिजीम चेंज’ विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि जब तक देश में संविधान है, तब तक सत्ता परिवर्तन केवल चुनावों के जरिए ही हो सकता है और फैसले संसद में लिए जाएंगे। फडणवीस का यह बयान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की ‘रिजीम चेंज’ टिप्पणी को लेकर जारी विवाद के बीच आया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में संविधान और देश के लोकतंत्र पर हमले की कोशिशें हुई हैं। इस तरह ‘रिजीम चेंज’ को लेकर बीजेपी और विपक्ष के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। जहां बीजेपी के नेता विपक्ष पर अराजकता और अस्थिरता फैलाने के आरोप लगा रहे हैं, वहीं कपिल सिब्बल और पवन खेड़ा सरकार की नीतियों, लोकतांत्रिक अधिकारों और संस्थानों की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।