अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। जांच में जुटी एसआईटी (विशेष जांच दल) को अब ऐसे अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनसे पूरे प्रकरण की परतें खुलने की उम्मीद बढ़ गई है। दो दिनों तक अयोध्या में कैंप करने के दौरान एसआईटी को न केवल चोरी से जुड़े कुछ गायब रिकॉर्ड मिले, बल्कि विशेष तकनीक की मदद से डिलीट किए गए सीसीटीवी फुटेज भी दोबारा हासिल कर लिए गए। सूत्रों के अनुसार इन रिकवर फुटेज में कुछ संदिग्ध लोग नोटों की गड्डियां अपनी जेब और जुराबों में छिपाते हुए दिखाई दे रहे हैं। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में सामने आए ये दृश्य जांच अधिकारियों को भी हैरान कर देने वाले बताए जा रहे हैं।
हालांकि शुरुआती फुटेज में कई संदिग्धों के चेहरे स्पष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। इसी वजह से अब हाई-रिजॉल्यूशन और हाई-जूम तकनीक के जरिए फुटेज को और स्पष्ट बनाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि संबंधित लोगों की सही पहचान की जा सके। जांच में यह भी सामने आया है कि चढ़ावे की रकम को ठिकाने लगाने के दौरान कुछ लोग जानबूझकर सीसीटीवी कैमरों के सामने ऐसे खड़े होते थे कि उनके चेहरे रिकॉर्ड न हो सकें। पहले उपलब्ध फुटेज में भी कई ब्लाइंड स्पॉट पाए गए थे, जिसके बाद डिलीट रिकॉर्डिंग को रिकवर कराने का फैसला लिया गया।
रिकवर फुटेज से खुल सकते हैं कई अहम राजविशेष सॉफ्टवेयर की सहायता से दोबारा प्राप्त किए गए सीसीटीवी फुटेज अब एसआईटी की जांच का सबसे महत्वपूर्ण आधार बन गए हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि इन रिकॉर्डिंग के जरिए यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित चोरी में वास्तविक रूप से कौन-कौन लोग शामिल थे, सुरक्षा व्यवस्था में कहां-कहां चूक हुई और पूरा मामला किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा था या केवल चोरी तक सीमित था। इन सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था से जुड़े एक जिम्मेदार व्यक्ति को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया। अधिकारियों ने उससे फुटेज की मॉनिटरिंग, कैमरों की स्थिति और रिकॉर्डिंग से जुड़े कई सवाल किए। बताया जा रहा है कि जांच के दौरान उसकी भूमिका को लेकर भी कड़ी नाराजगी जताई गई और उससे विस्तृत जवाब मांगा गया।
निर्माण एजेंसियों और इंजीनियरों से भी हुई पूछताछएसआईटी की जांच अब केवल कथित चढ़ावा चोरी तक सीमित नहीं रह गई है। जांच का दायरा बढ़ाते हुए राम मंदिर निर्माण से जुड़ी एजेंसियों को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। दूसरे दिन एसआईटी अधिकारियों ने निर्माण कार्य से जुड़ी प्रमुख एजेंसी एलएंडटी तथा पर्यवेक्षण संस्था के अभियंताओं को तलब कर उनसे विस्तृत पूछताछ की।
पूछताछ के दौरान टीईसी की ओर से अभियंता जगदीश आफले और गिरीश सहस्त्र भोजनी सहित एलएंडटी के कई इंजीनियर उपस्थित हुए। अधिकारियों ने उनसे निर्माण प्रक्रिया, तकनीकी निगरानी और अन्य संबंधित विषयों पर सवाल पूछे। इसके साथ ही निर्माण कार्य से जुड़े दस्तावेज और अभिलेख भी जांच के लिए मांगे गए हैं। इन अभिलेखों की गहन जांच अभी जारी है। हालांकि एसआईटी के तीनों वरिष्ठ अधिकारी लखनऊ लौट चुके हैं और उनके सोमवार को दोबारा अयोध्या आने की संभावना है। इस बीच तकनीकी और सहायक स्टाफ स्थानीय स्तर पर दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करने में जुटा हुआ है।
निर्माण कार्य और अन्य अनियमितताओं की भी हो रही जांचजांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले को व्यापक दृष्टिकोण से देख रही हैं। एक ओर जहां कथित चढ़ावा चोरी के आरोपियों की पहचान, चोरी की शुरुआत, सुरक्षा व्यवस्था की कमियां और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम को लेकर काम किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर राम मंदिर परियोजना से जुड़े अन्य मामलों की भी समीक्षा की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार जमीन खरीद-फरोख्त, निर्माण सामग्री की आपूर्ति, निर्माण कार्य में संभावित अनियमितताओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भी अलग-अलग स्तर पर जांच की जा रही है। एसआईटी इन सभी बिंदुओं पर उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड का मिलान कर रही है ताकि पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा सके।
गोपनीय तरीके से आगे बढ़ रही है एसआईटी की कार्रवाईजांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि एसआईटी पूरी प्रक्रिया को अत्यंत गोपनीय तरीके से आगे बढ़ा रही है। बताया जा रहा है कि जांच दल के अध्यक्ष तकनीकी मामलों के विशेषज्ञ हैं और डिजिटल फॉरेंसिक समेत आधुनिक जांच तकनीकों का अनुभव रखते हैं। इसी विशेषज्ञता का लाभ पूरी टीम को मिल रहा है।
एसआईटी की कोशिश है कि जांच से जुड़ी कोई भी संवेदनशील जानकारी समय से पहले सार्वजनिक न हो, जिससे जांच प्रभावित होने की आशंका पैदा हो। सभी तथ्यों को अंतिम रूप देने के बाद ही सक्षम मंच पर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
राजस्व रिकॉर्ड और बैंक दस्तावेज भी खंगाल रही जांच टीमअयोध्या में दो दिनों तक मौके पर जांच करने के बाद एसआईटी के वरिष्ठ अधिकारी शुक्रवार शाम लखनऊ लौट गए, लेकिन उनका तकनीकी स्टाफ शनिवार को भी विभिन्न दस्तावेजों की जांच में जुटा रहा। पूरे दिन राजस्व अभिलेखों की पड़ताल की गई और उनसे जुड़े रिकॉर्ड का मिलान किया गया।
सूत्रों के अनुसार बैंक अधिकारियों से ट्रस्ट के कुछ वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए हैं। विशेष रूप से वर्ष 2021 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीनों से संबंधित रिकॉर्ड को प्राथमिकता के आधार पर जांचा जा रहा है। इन्हीं तथ्यों को संकलित कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। बताया जा रहा है कि मामले में लगाए गए विभिन्न आरोपों के मद्देनजर जांच की गति और तेज कर दी गई है।
बैंक अधिकारी ने गिनती प्रक्रिया को लेकर दी अहम जानकारीजांच के दौरान एक बैंक अधिकारी ने नोटों की गिनती की प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। सूत्रों के अनुसार अधिकारी ने बताया कि नकदी गिनने वाले कर्मचारी सामान्य और बेहद सरल व्यवहार वाले प्रतीत होते थे, इसलिए किसी को उन पर संदेह नहीं हुआ। वे गिनती के दौरान पूरी मर्यादा का पालन करते थे और वहां मौजूद वरिष्ठ लोगों के प्रति सम्मान भी जताते थे। बताया गया कि कई कर्मचारी टिन्नू यादव के पैर तक छूते थे, जिससे उन पर विश्वास और बढ़ जाता था। बैंक अधिकारी के अनुसार उसे कभी यह एहसास नहीं हुआ कि उस दौरान सीसीटीवी कैमरे बंद थे या उनकी रिकॉर्डिंग सामान्य तरीके से नहीं हो रही थी।