विपक्ष की ओर से एसआईआर और चुनाव सुधार को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच सत्ता परिवर्तन की मंशा को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के बयान पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन की बात कहकर विपक्ष की मंशा स्पष्ट कर दी है। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के युवाओं को अराजकता की राजनीति का मोहरा बनाने की कोशिश की जा रही है। इस पूरे विवाद में प्रशांत भूषण, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान भी सामने आए हैं।
राजनाथ सिंह का आरोप- सत्ता परिवर्तन के लिए अराजकता फैलाना चाहता है विपक्षलखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल यह संकेत देता है कि विपक्ष की लड़ाई केवल चुनाव सुधार, एसआईआर या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तक सीमित नहीं है। राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि विपक्ष देश में अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करना चाहता है। उन्होंने कहा, ‘रिजीम चेंज जैसे शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि ये उनकी लड़ाई चुनाव सुधार के लिए नहीं है, उनकी लड़ाई एसआईआर के लिए नहीं है, उनकी लड़ाई ज्ञानेश कुमार के लिए नहीं है, बल्कि देश में अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करने की उनकी यह साजिश है।’ राजनाथ सिंह ने आगे आरोप लगाया कि देश के युवाओं को अराजकता की राजनीति में इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष के कुछ लोग उसी तर्ज पर भारत में भी सत्ता बदलने की बात कर रहे हैं। रक्षा मंत्री के मुताबिक, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बांग्लादेश से प्रेरणा लेकर शासन बदलने की बात कही गई है, जबकि एक अन्य व्यक्ति खुले तौर पर सरकार गिराने की बात कर रहा है।
प्रशांत भूषण ने कहा- सरकार की बर्बरता जारी रही तो बदलनी होगी सरकारराजनाथ सिंह की टिप्पणी के केंद्र में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण का वह बयान है, जिसमें उन्होंने सत्ता परिवर्तन की बात कही थी। गुरुवार, 15 अक्टूबर को CJP नेता अभिजीत दीपके और AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस कार्यक्रम में शामिल प्रशांत भूषण ने कहा कि यदि सरकार की बर्बरता जारी रहती है, तो सरकार बदलनी होगी। उन्होंने लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में नागरिक समाज और युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया। प्रशांत भूषण ने कहा, ‘सरकार की बर्बरता जारी रही, तो सरकार बदलनी होगी। लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई सिविल सोसायटी और युवाओं के नेतृत्व में लड़ी जाएगी।’ उन्होंने आगे स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘हां, हम रिजीम बदलना चाहते हैं।’ बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने प्रशांत भूषण के इसी बयान को आधार बनाकर विपक्ष पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि सत्ता परिवर्तन की बात कहकर विपक्ष ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है। दूसरी ओर, विपक्ष की ओर से सत्ता परिवर्तन को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनाव के जरिए सरकार बदलने के संदर्भ में पेश किया जा रहा है।
नेहा बोरा ने बांग्लादेश के छात्र आंदोलन से प्रेरणा लेने की बात कहीइस विवाद में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा का बयान भी चर्चा में है। नेहा बोरा ने 14 अक्टूबर को बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट (SSF) के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर एक संदेश दिया था। इस संदेश में उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने उन्हें क्रांति का रास्ता दिखाया है। नेहा बोरा ने अपने संदेश में कहा, ‘हम आपको रास्ता दिखाने के लिए बधाई देते हैं। हम जानते हैं कि आपके देश में धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ जो लड़ाई आप लड़ रहे हैं, वही लड़ाई आज यहां के युवा भी लड़ रहे हैं।’ उन्होंने भारत और बांग्लादेश के युवाओं के आंदोलनों के बीच समानता का उल्लेख करते हुए कहा कि बांग्लादेश में युवा धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे, जबकि भारत में छात्र मोदी सरकार के खिलाफ इसी तरह की लड़ाई लड़ रहे हैं। राजनाथ सिंह ने बांग्लादेश का जिक्र करते हुए विपक्ष पर सत्ता परिवर्तन के लिए उसी तर्ज पर आगे बढ़ने का आरोप लगाया है।
पवन खेड़ा का पलटवार- विपक्ष का मकसद चुनाव के जरिए सत्ता बदलना हैराजनाथ सिंह के आरोपों पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पलटवार किया। उन्होंने रक्षा मंत्री की टिप्पणी पर तंज कसते हुए सवाल किया कि वह इस मामले में जासूस की भूमिका क्यों निभा रहे हैं। खेड़ा ने कहा कि विपक्ष सत्ता परिवर्तन की बात कर रहा है और इसमें कुछ छिपाने जैसी बात नहीं है। पवन खेड़ा ने कहा, ‘ये राजनाथ सिंह जी जग्गा जासूस बनकर क्यों आ गए? शरलॉक होम्स। ‘रिजीम चेंज हो रहा है।’ अरे, तो हम तो कह रहे हैं रिजीम चेंज करेंगे साहब।’ उन्होंने 1977 का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि उस समय क्या सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ था। खेड़ा के मुताबिक, जब भी विपक्ष सड़क पर उतरता है या कोई आंदोलन करता है, तो उसका मकसद चुनाव के जरिए सरकार बदलना होता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य ही चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से सत्ता परिवर्तन करना है। खेड़ा ने आगे कहा, ‘मोदी जी की रक्षा में आप आ गए, हमें एक बात आज समझ में आई, ये इतना गुस्सा अल्बर्ट पिंटो को क्यों आता है? इन्हें लोकतंत्र की आदत ही खत्म हो गई।’ अपने बयान के जरिए कांग्रेस नेता ने राजनाथ सिंह के आरोपों को चुनौती देते हुए कहा कि विपक्ष का सरकार बदलने की बात करना लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा है। उन्होंने सत्ता परिवर्तन की मांग और अराजकता फैलाने के आरोपों के बीच अंतर को रेखांकित किया।
किरेन रिजिजू ने इसे ‘दिमागी नक्सलियों’ और देशभक्तों की लड़ाई बतायाकेंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस राजनीतिक विवाद पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने मौजूदा टकराव को ‘दिमागी नक्सलियों’ और ‘देशभक्त भारतीयों’ के बीच की लड़ाई बताया। रिजिजू ने इसे संविधान में विश्वास रखने वालों और अराजकतावादियों के बीच का संघर्ष भी करार दिया। उन्होंने कहा, ‘लड़ाई की लकीर खिंच चुकी है। यह ‘दिमागी नक्सलियों’ बनाम ‘देशभक्त भारतीयों’ की लड़ाई है। यह भारत के संविधान में विश्वास रखने वालों बनाम अराजकतावादियों के बीच की लड़ाई है।’ इस तरह एसआईआर और चुनाव सुधार से शुरू हुई बहस सत्ता परिवर्तन, बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरणा लेने और लोकतंत्र में विरोध की भूमिका जैसे मुद्दों तक पहुंच गई है। जहां बीजेपी नेताओं ने विपक्ष पर अराजकता के जरिए सत्ता हासिल करने की कोशिश का आरोप लगाया, वहीं पवन खेड़ा ने चुनाव के माध्यम से सरकार बदलने को विपक्ष का सामान्य राजनीतिक उद्देश्य बताया। प्रशांत भूषण और नेहा बोरा के बयानों को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बहस जारी है।