खरगे के बयान पर राजनाथ सिंह का कांग्रेस को कड़ा संदेश, बोले- व्यक्तिगत मर्यादाओं का उल्लंघन मत कीजिए

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बयान की आलोचना करते हुए कांग्रेस को नसीहत दी कि राजनीतिक विरोध के दौरान व्यक्तिगत मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खरगे जैसे वरिष्ठ नेता से सार्वजनिक जीवन में अधिक गंभीरता, संयम और जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस टिप्पणी पर खेद जताने के बजाय उसका बचाव कर रही है।

यह विवाद बिहार की राजधानी पटना में रविवार, 25 अक्टूबर को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाषण दे रहे थे। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति की टिप्पणी पर खरगे ने जवाब दिया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। भाजपा ने खरगे के बयान को आपत्तिजनक बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।

पटना में खरगे ने क्या कहा था?

पटना में भाषण के दौरान खरगे मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और वोट चोरी के मुद्दे पर बोल रहे थे। इसी क्रम में उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। तभी सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर टिप्पणी की।

खरगे ने जवाब में कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर विवाद की स्थिति पैदा हो गई। घटना के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष की भाषा पर सवाल उठाए और इसे प्रधानमंत्री के परिवार के प्रति अपमानजनक टिप्पणी बताया।

इस घटना से जुड़ा एक और पहलू सामने आया। टिप्पणी करने वाले व्यक्ति की पहचान संतोष कुमार के रूप में हुई। संतोष ने बाद में कहा कि उनकी बात को पूरी तरह नहीं सुना गया और गलतफहमी के कारण विवाद हुआ। उनके मुताबिक, वह कहना चाहते थे कि जब तक देश में विद्रोह नहीं होगा, मोदी कहीं नहीं जाएंगे, लेकिन उनकी बात का एक हिस्सा ही सुनाई दिया। उन्होंने यह भी कहा कि गलतफहमी के कारण सभा में उनके साथ मारपीट हुई और उन्हें बाहर निकाल दिया गया।
भाजपा ने आरोप लगाया कि खरगे की टिप्पणी प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को निशाना बनाती है। पार्टी ने इस बयान के विरोध में प्रदर्शन करने का ऐलान भी किया। भाजपा नेताओं ने यह सवाल उठाया कि सार्वजनिक जीवन में शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं को राजनीतिक मतभेद व्यक्त करते समय किस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।

राजनाथ सिंह ने कहा- टिप्पणी से स्तब्ध और आहत हूं

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खरगे की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता के बारे में कही गई बात से वह स्तब्ध और आहत हैं। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी किसी सामान्य कार्यकर्ता या युवा नेता की ओर से नहीं, बल्कि खुद को देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कहने वाली कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से की गई है।

राजनाथ सिंह के अनुसार, खरगे के बयान से करोड़ों देशवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी अपनी गलती स्वीकार करने और खेद जताने के बजाय खरगे के शब्दों को सही ठहराने में लगी हुई है। रक्षा मंत्री ने कहा कि इस तरह की प्रतिक्रिया से विवाद और बढ़ता है।

उन्होंने कांग्रेस के राजनीतिक आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे पद पर बैठे व्यक्ति से सार्वजनिक जीवन में गंभीरता, संयम और मर्यादा की उम्मीद की जाती है। उनके मुताबिक, जब किसी प्रमुख राजनीतिक दल का शीर्ष नेता इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करता है, तो इससे उसके राजनीतिक व्यवहार और संस्कृति पर सवाल उठते हैं।

'स्तरहीन राजनीति कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची'

राजनाथ सिंह ने अपने बयान में कांग्रेस पर प्रधानमंत्री मोदी और उनके परिवार को लेकर व्यक्तिगत टिप्पणियां करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन उसे व्यक्तिगत अपमान में बदलना उचित नहीं है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि अतीत में भी कांग्रेस के कुछ नेताओं पर प्रधानमंत्री की पारिवारिक पृष्ठभूमि का मजाक उड़ाने और उनकी दिवंगत माता के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अब इस तरह की राजनीति पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गई है।

राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोधियों की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाना स्वाभाविक है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियों से राजनीतिक विमर्श की गरिमा प्रभावित होती है। उन्होंने खरगे के पद का उल्लेख करते हुए कहा कि उनसे अधिक जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा की जाती है।

उनका कहना था कि किसी वरिष्ठ नेता की भाषा केवल व्यक्तिगत व्यवहार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह उस राजनीतिक संगठन की कार्यशैली और सार्वजनिक छवि को भी प्रभावित करती है, जिसका वह नेतृत्व करता है।

'व्यक्तिगत मर्यादाओं का उल्लंघन मत कीजिए'

राजनाथ सिंह ने कांग्रेस को सीधे संदेश देते हुए कहा कि वैचारिक विरोध को व्यक्तिगत अपमान में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना, नीतियों पर सवाल उठाना और राजनीतिक असहमति जताना सभी का अधिकार है, लेकिन ऐसा करते समय व्यक्तिगत मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।

रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के परिवार को निशाना बनाना कांग्रेस की हताशा और वैचारिक कमजोरी को दर्शाता है। उन्होंने इसे केवल एक व्यक्ति या परिवार का अपमान नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति की गरिमा पर चोट बताया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता राजनीतिक दलों और नेताओं के आचरण पर नजर रखती है और समय आने पर अपना जवाब देती है। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि इस तरह की टिप्पणियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विचलित नहीं किया जा सकता और न ही जनसेवा के प्रति उनके संकल्प को कमजोर किया जा सकता है।

राजनाथ सिंह की इस प्रतिक्रिया ने खरगे की टिप्पणी को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद में भाजपा का रुख स्पष्ट किया। भाजपा का कहना है कि राजनीतिक आलोचना और व्यक्तिगत अपमान के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। वहीं, पटना की घटना में टिप्पणी करने वाले संतोष कुमार ने अपनी बात का गलत अर्थ निकाले जाने का दावा किया है।

भाजपा ने विरोध का किया ऐलान
खरगे की टिप्पणी के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधा और बयान के विरोध में प्रदर्शन की घोषणा की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत भाजपा के कई नेताओं ने भी इस टिप्पणी की आलोचना की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की भाषा राजनीतिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है।

भाजपा ने इस विवाद को प्रधानमंत्री और उनके परिवार के प्रति व्यक्तिगत टिप्पणियों से जोड़ते हुए कांग्रेस के राजनीतिक आचरण पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, पटना की सभा में मौजूद संतोष कुमार का कहना है कि उनकी मूल बात का पूरा संदर्भ सामने नहीं आया। इस तरह विवाद में खरगे की टिप्पणी के साथ-साथ उस टिप्पणी से पहले हुई बातचीत और उसके अर्थ को लेकर भी चर्चा हो रही है।