नई दिल्ली। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनुचित गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार सोमवार को बड़ा कदम उठाने जा रही है। सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को 27 जुलाई को लोकसभा में पेश किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण विधेयक को सदन में प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को सौंपी गई है। संसद के विधायी कार्यसूची (लेजिस्लेटिव बिजनेस एजेंडा) के अनुसार, वे सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन के लिए नया विधेयक पेश करेंगे। सरकार की ओर से इस विधेयक को सदन में पारित कराने की जिम्मेदारी भी डॉ. जितेंद्र सिंह के पास ही रहेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात राष्ट्र के नाम जारी अपने वीडियो संदेश में संकेत दिया था कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नया कानूनी ढांचा लेकर आ रही है। उन्होंने कहा था कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से संशोधित कानून तैयार किया गया है। अब इसी घोषणा के तहत सोमवार को यह विधेयक लोकसभा में पेश किया जाएगा और सरकार इसे जल्द से जल्द संसद से पारित कराने की कोशिश करेगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी संशोधन विधेयक को मंजूरीप्रधानमंत्री के वीडियो संदेश के अगले ही दिन शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 के नए प्रावधानों को मंजूरी दे दी। यह संशोधन प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा से जुड़े अपराधों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
सरकार के प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, दोषी पाए जाने वालों के लिए पहले से अधिक कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। नए कानून में गंभीर मामलों में 10 वर्ष तक की कैद और अपराध की प्रकृति के आधार पर 1 करोड़ रुपये से 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। सरकार का मानना है कि कड़े दंडात्मक प्रावधानों से परीक्षा माफियाओं और संगठित गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
तीन महीने के भीतर होगा मामलों का निपटारासूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित कानून में यह भी व्यवस्था की गई है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों का लंबा कानूनी विवाद न चले। इसके तहत ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी और अधिकतम तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का उद्देश्य है कि दोषियों को शीघ्र सजा मिले ताकि परीक्षा प्रणाली में लोगों का भरोसा मजबूत हो सके।
इसके अलावा देश के कई शहरों में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं। सरकार अन्य राज्यों और शहरों में भी ऐसे विशेष न्यायालयों की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है, जिससे मामलों का तेजी से निपटारा सुनिश्चित किया जा सके।
NEET पेपर लीक विवाद के बाद सरकार ने तेज किए सुधारयह संशोधन ऐसे समय लाया जा रहा है जब NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा आयोजित किए जाने के बीच कई छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हालांकि सरकार ने बाद में दोबारा परीक्षा आयोजित कर समय पर परिणाम घोषित कर दिए, लेकिन इस मुद्दे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू कर दिया।
समय के साथ यह आंदोलन लगातार व्यापक होता गया। बाद में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल पर बैठने के बाद बड़ी संख्या में छात्र भी आंदोलन से जुड़ गए। जब दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया तो विरोध प्रदर्शन और तेज हो गया। इसके बाद 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज के बाद देशभर में आंदोलन ने और व्यापक रूप ले लिया। बढ़ते जनदबाव के बीच अंततः केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
इसी पूरे घटनाक्रम के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। इनमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त करना, परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही बढ़ाने के उपाय लागू करना और पेपर लीक जैसे मामलों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए नया संशोधन कानून लाना शामिल है। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना और छात्रों के हितों की प्रभावी सुरक्षा करना है।