प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने पीएम मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए तंज किया कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व है।
चिदंबरम की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के लाल किले से दिए गए संबोधन के बाद सामने आई, जिसमें उन्होंने नक्सलवाद और माओवाद के खिलाफ लड़ाई में देश की उपलब्धियों का जिक्र करने के साथ-साथ ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर भी लोगों को आगाह किया था।
पीएम मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर क्या कहा?स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा कि जंगलों में हथियार उठाकर हिंसा करने वाले नक्सलवाद और माओवाद के खिलाफ देश ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। हालांकि, उन्होंने इसी के साथ यह भी कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ अब भी मौजूद हैं।
पीएम मोदी ने ऐसे तत्वों से सतर्क रहने की अपील की और कहा कि वे अवसर की तलाश में रहते हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे लोगों को पहचानने और उन्हें अलग-थलग करने की बात कही। प्रधानमंत्री ने इस चुनौती को गंभीरता से लेने की जरूरत पर भी जोर दिया।
चिदंबरम ने साधा निशानाप्रधानमंत्री के इस बयान के बाद पी. चिदंबरम ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, ‘मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है।’ उनके इस बयान को केंद्र सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री द्वारा इस्तेमाल की जा रही राजनीतिक भाषा के विरोध के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस पहले भी प्रधानमंत्री के ‘अर्बन नक्सल’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर सवाल उठाती रही है। पार्टी का आरोप रहा है कि सरकार अपने आलोचकों और विरोधियों को ऐसे विशेषणों के जरिए निशाना बनाती है। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में चिदंबरम की ताजा टिप्पणी सामने आई है।
‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर बढ़ी सियासी बहसपीएम मोदी के बयान और चिदंबरम की प्रतिक्रिया के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। सरकार की ओर से ऐसे विचारों को राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक शांति से जुड़ी चुनौती के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि विपक्ष इस तरह की भाषा को सरकार के आलोचकों को निशाना बनाने की कोशिश के तौर पर देखता है।
इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के अलग-अलग रुख के चलते आने वाले समय में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।