कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव परिणाम को लेकर अपनी ही पार्टी के रुख से अलग एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाया जाना गलत था और ऐसे मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल किए जाने चाहिए थे, लेकिन उन्हें ऐसा नहीं लगता कि इसी वजह से हाल में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में तमिलगा वेत्री कषगम की जीत और द्रमुक की हार हुई।
चिदंबरम ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाए गए, उन्हें सूची में शामिल किया जाना चाहिए था। हालांकि, उन्होंने विपक्ष के उस दावे को लेकर भी कहा कि मतों में हेरफेर हुआ है तो उसे साबित करना होगा। उनके मुताबिक, केवल मतदाता सूची में नाम हटने को चुनाव परिणाम का सीधा कारण मानना उचित नहीं है।
मतदाता सूची से नाम हटाने पर क्या बोले चिदंबरम
चिदंबरम ने स्पष्ट किया कि मतदाताओं के नाम हटाना गलत प्रक्रिया थी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम हटाए गए, उन्हें मतदाता सूची में वापस शामिल किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने इस दावे से सहमति नहीं जताई कि केवल इसी वजह से चुनाव का परिणाम बदल गया।
उनका कहना था कि चुनाव में किसी दल की जीत या हार को सिर्फ मतदाता सूची से हटाए गए नामों के आधार पर नहीं समझा जा सकता। साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों से मतों में हेरफेर से जुड़े अपने दावों को साबित करने की बात कही।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर CWC और INDIA गठबंधन में फैसलाSIR को लेकर विवाद के बीच चिदंबरम ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि अगर कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई का फैसला कांग्रेस कार्य समिति यानी CWC और INDIA गठबंधन की आगामी बैठकों में किया जाएगा।
चिदंबरम के मुताबिक, आगे की कार्रवाई में उच्चतम न्यायालय का रुख करने या संसद में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में अंतिम फैसला संबंधित बैठकों में लिया जाएगा।
निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेद को लेकर विवादमतदाता सूची और SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर कथित मतभेद सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हुआ है। संदर्भित रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले 10 महीनों के दौरान दो निर्वाचन आयुक्तों ने ऐसे मामलों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इस तरह की स्थिति को लेकर कहा है कि आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और सुझाव सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के अनुसार, उसके फैसले सर्वसम्मति से और स्थापित वैधानिक प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।
इस तरह SIR को लेकर राजनीतिक दलों की आपत्तियों और निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण के बीच विवाद जारी है। चिदंबरम ने भी एक तरफ मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को गलत बताया, वहीं दूसरी तरफ इसे तमिलनाडु चुनाव परिणाम का निर्णायक कारण मानने से इनकार किया।
राहुल गांधी की मांग का किया समर्थनचिदंबरम ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से पहले उठाई गई मांग को भी दोहराया। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ प्राथमिकी दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग की।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे को लेकर पार्टी की ओर से दी गई समयसीमा समाप्त होने के बाद देशभर में प्रदर्शन किए गए। उन्होंने कराईकुडी समेत कई स्थानों पर हुए विरोध प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया।
दोबारा चुनाव कराने के सुझाव को किया खारिजचिदंबरम ने चुनाव दोबारा कराने की संभावना को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि संविधान पहले ही संपन्न हो चुके चुनावों के लिए दोबारा चुनाव की अनुमति नहीं देता।
इसके साथ ही उन्होंने SIR को तत्काल रोकने की मांग की। चिदंबरम ने कहा कि 20 राज्यों में मतदाता सूची से हटाए गए 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम वापस शामिल किए जाने चाहिए।
SIR को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की आपत्तियों के बीच निर्वाचन आयोग अपने फैसलों को स्थापित वैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया बता चुका है। इसी विवाद के बीच चिदंबरम का यह बयान भी महत्वपूर्ण है कि मतदाता सूची से नाम हटाया जाना गलत होने के बावजूद इसे अकेले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणाम का कारण नहीं माना जा सकता।