समाज को बांटने की राजनीति और पिछड़ापन दिखाने की प्रवृत्ति खतरनाक: नितिन गडकरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में समाज में फैल रही विभाजन की राजनीति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जाति, भाषा और अन्य पहचान के आधार पर लोगों को बांटने का प्रयास हो रहा है, जो देश की प्रगति के लिए खतरा है। गडकरी ने यह बात एक पुस्तक विमोचन समारोह में कही, जहां उन्होंने देशवासियों को एकजुट रहने और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

गडकरी ने कहा, “आज पिछड़ापन केवल एक राजनीतिक हथियार बन गया है। हर कोई अपने आप को पिछड़ा बताने की कोशिश करता है। जाति, भाषा और अन्य पहचान के नाम पर समाज को विभाजित करने का प्रयास हो रहा है। यह देश की स्थिरता और विकास के लिए हानिकारक है।”

उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शताब्दी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि विरोधियों ने कई बार संघ को जातिवादी और सांप्रदायिक बताकर बदनाम करने की कोशिश की। गडकरी ने स्पष्ट किया, “संघ में किसी की जाति नहीं देखी जाती। यहाँ किसी प्रकार का भेदभाव या छुआछूत नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि संगठन का उद्देश्य सभी का कल्याण करना है, यहाँ तक कि उन लोगों का भी जो उनका विरोध करते हैं।

वाहन उद्योग में भारत की महत्वाकांक्षा

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री के रूप में गडकरी ने अगले पांच साल में भारत के वाहन उद्योग को दुनिया में शीर्ष पर पहुंचाने के सरकार के लक्ष्य की जानकारी दी। उन्होंने ‘अंतरराष्ट्रीय मूल्य शिखर सम्मेलन 2025’ में यह उद्घाटन करते हुए कहा कि वाहन उद्योग सरकार को सबसे अधिक जीएसटी राजस्व देता है और रोजगार के कई अवसर पैदा करता है।

गडकरी ने बताया, “हमारा लक्ष्य अगले पांच साल के भीतर भारत के वाहन उद्योग को वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान पर पहुंचाना है। देश में दुनिया की सभी बड़ी वाहन कंपनियां सक्रिय हैं, और उद्योग का विकास लगातार हो रहा है।”

उन्होंने यह भी साझा किया कि जब उन्होंने परिवहन मंत्री का कार्यभार संभाला था, तब भारतीय वाहन उद्योग का आकार 14 लाख करोड़ रुपये था। अब यह आंकड़ा बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो चुका है। विश्व के अन्य बड़े उद्योगों में अमेरिका का आकार 78 लाख करोड़ रुपये, चीन का 47 लाख करोड़ रुपये, और भारत का वर्तमान आकार 22 लाख करोड़ रुपये है।

गडकरी के अनुसार, भारत का वाहन उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है और आने वाले वर्षों में यह वैश्विक बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उनका संदेश साफ था: देश की एकता और उद्योग की प्रगति दोनों ही सरकार की प्राथमिकता हैं।