NEET UG रिजल्ट ने किया हैरान, 720 में से 720 अंक हासिल नहीं कर सका कोई भी छात्र

NEET UG 2026 का परिणाम गुरुवार देर रात राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने घोषित कर दिया। इस वर्ष मेडिकल प्रवेश परीक्षा में करीब 20 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। इनमें से MBBS, BDS, AYUSH और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 11.21 लाख से अधिक उम्मीदवारों को योग्य घोषित किया गया है। इस बार के परिणाम की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि परीक्षा में किसी भी छात्र को पूर्ण 720 अंक प्राप्त नहीं हुए। वहीं, कुल सफल अभ्यर्थियों में लगभग 58 प्रतिशत लड़कियां शामिल हैं।

इस साल NEET UG में पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पंशुल बंसल संयुक्त रूप से शीर्ष स्थान पर रहे। दोनों ने 720 में से 715 अंक हासिल किए। आंकड़ों पर नजर डालें तो 19 उम्मीदवारों ने 700 से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, जबकि 138 छात्रों के अंक 690 से ऊपर रहे। इसके अलावा 1,492 अभ्यर्थियों ने 650 से अधिक अंक हासिल किए और 90,780 उम्मीदवारों ने 500 से ज्यादा अंक प्राप्त किए। राज्यवार प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा, जहां से 1.07 लाख से अधिक छात्र परीक्षा में सफल हुए।

श्रेणीवार सफल उम्मीदवार


General: 2.91 लाख
OBC-NCL: 5.12 लाख
SC: 1.59 लाख
ST: 63,716
Gen-EWS: 95,026
PwBD: 3,666
PwD: 303

पिछले साल की तुलना में बदली तस्वीर

एजुकेटर्स फेडरेशन के अध्यक्ष केशव अग्रवाल के अनुसार, वर्ष 2024 की NEET परीक्षा में 17 छात्रों ने 720 में से पूरे 720 अंक हासिल किए थे, जबकि लगभग 78 हजार उम्मीदवारों के 600 से अधिक अंक आए थे। इसके विपरीत इस वर्ष कोई भी अभ्यर्थी पूर्ण अंक नहीं ला सका। इस बार के दोनों टॉपर्स का स्कोर 715 रहा और 600 से अधिक अंक हासिल करने वाले छात्रों की संख्या भी घटकर 11 हजार से कम रह गई। इसके बावजूद जनरल कैटेगरी की क्वालिफाइंग कटऑफ 213 तक पहुंचना सभी के लिए हैरानी का विषय बना हुआ है।

आखिर इतनी ज्यादा क्यों रही कटऑफ?


केशव अग्रवाल ने बताया कि NTA द्वारा जारी Re-NEET 2026 के आंकड़ों के अनुसार जनरल वर्ग के लिए क्वालिफाइंग कटऑफ 715-213 निर्धारित की गई है। आमतौर पर जब परीक्षा का स्तर कठिन होता है, तो टॉप स्कोर करने वाले और 600 से अधिक अंक लाने वाले छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय कमी देखने को मिलती है। इस बार भी ऐसा ही हुआ, लेकिन इसके बावजूद क्वालिफाइंग कटऑफ नीचे आने के बजाय ऊंची बनी रही।

उन्होंने इसके पीछे सबसे बड़ा कारण परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की रिकॉर्ड संख्या को बताया। उनका कहना है कि जब कुल उम्मीदवारों की संख्या बहुत अधिक होती है, तो कठिन प्रश्नपत्र के बावजूद प्रतिस्पर्धा का स्तर ऊंचा बना रहता है। यही वजह है कि टॉप स्कोर कम होने और 600+ अंक पाने वाले छात्रों की संख्या घटने के बावजूद जनरल कैटेगरी की कटऑफ 213 तक पहुंच गई, जिसने छात्रों और शिक्षा विशेषज्ञों दोनों को चौंका दिया।